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West Bengal Politics: TMC बगावत का सबसे बड़ा लाभार्थी बनी NCPI, बंगाल में नई राजनीतिक ताकत का उदय
Current image: West Bengal Politics: TMC बगावत का सबसे बड़ा लाभार्थी बनी NCPI

West Bengal Politics: पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। बताया जा रहा है की तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी सांसदों ने नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल होने का ऐलान कर दिया है। जिससे इस कदम के बाद एक ऐसी पार्टी, जिसका नाम तक अधिकांश लोगों ने नहीं सुना था, अचानक राज्य की सबसे बड़ी संसदीय ताकत बन गई है। हैरानी की बात यह है कि यही पार्टी 2023 के पंचायत चुनावों में एक भी सीट जीतने में सफल नहीं हुई थी।

राजनीतिक गलियारों में इस घटनाक्रम को बंगाल की राजनीति का सबसे बड़ा बदलाव माना जा रहा है। जिसमें NCPI अब लोकसभा में पश्चिम बंगाल की 42 सीटों में से 20 सीटों के साथ सबसे बड़े संसदीय समूह का दावा कर रही है।

कौन है NCPI?

NCPI यानी नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया एक छोटी राजनीतिक पार्टी है, जो मूल रूप से त्रिपुरा में पंजीकृत है। ऐसे में चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के अनुसार यह एक गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल है। इसका मतलब है कि पार्टी को अभी तक राष्ट्रीय या राज्य स्तरीय मान्यता प्राप्त नहीं हुई है। हालांकि अब 20 सांसदों के समर्थन के बाद पार्टी अचानक राष्ट्रीय राजनीति की चर्चा का विषय बन गई है। पार्टी नेतृत्व का दावा है कि यह बदलाव बंगाल की राजनीति में नए अध्याय की शुरुआत करेगा।

पंचायत चुनाव में नहीं मिला था जनसमर्थन

NCPI की मौजूदा स्थिति को देखकर यह जानना और भी जरुरी हो जाता है कि पिछले पंचायत चुनावों में उसका प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा था।

2023 के पंचायत चुनावों में पार्टी ने पश्चिम बंगाल में केवल दो उम्मीदवार उतारे थे। दोनों उम्मीदवार चुनाव हार गए थे और उन्हें कुल मिलाकर सिर्फ 822 वोट मिले थे। पार्टी एक भी सीट जीतने में सफल नहीं हुई थी। यही वजह है कि अब 20 सांसदों के साथ पार्टी का सबसे बड़ा संसदीय समूह बनना राजनीतिक विश्लेषकों को भी चौंका रहा है।

हावड़ा में मिला पार्टी का रजिस्टर्ड पता

बता दें की जब समाचार एजेंसी पीटीआई (PTI) ने पार्टी के पश्चिम बंगाल स्थित पंजीकृत पते की जांच की, तो वहां कोई बड़ा राजनीतिक कार्यालय नहीं मिला। पार्टी का रजिस्टर्ड पता हावड़ा जिले के संकरैल इलाके में स्थित एक सामान्य मकान निकला।

यह संपत्ति उत्तिय कुंडू और उनकी पत्नी शेवली कुंडू के नाम पर दर्ज है। स्थानीय लोगों के अनुसार यह परिवार करीब आठ वर्ष पहले नदिया जिले से यहां आकर रहने लगा था। पड़ोसियों ने बताया कि उन्होंने कभी इस स्थान को बड़े राजनीतिक कार्यालय के रूप में काम करते नहीं देखा। यही वजह है कि अचानक राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आने के बाद यह पता लोगों की उत्सुकता का केंद्र बन गया है।

घर के बाहर लगे बोर्ड ने बढ़ाई चर्चा

जिस घर को NCPI का पंजीकृत पता बताया गया है, उसके मुख्य द्वार पर लगे बोर्ड ने भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया।

बोर्ड के अनुसार उत्तिय कुंडू खुद को एक बंगाली समाचार पत्र के संपादक, गणित शिक्षक, ऑडिटर, स्वास्थ्य सलाहकार और योग स्वयंसेवक बताते हैं। वहीं उनकी पत्नी शेवली कुंडू को कोलकाता हाईकोर्ट की अधिवक्ता और भूमि सर्वेक्षण विशेषज्ञ के रूप में दर्शाया गया है।

घर की दीवारों पर ‘जागो बिस्वा’ और ‘असंगठित महिला कामगार संघ’ जैसे संदेश भी लिखे हुए पाए गए। स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां से एक गैर-सरकारी संगठन (NGO) भी संचालित किया जाता है, जो स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को प्रशिक्षण देने का काम करता है।

CRPF की तैनाती से बढ़ी हलचल

20 सांसदों के NCPI में शामिल होने की खबर सामने आने के बाद इस स्थान की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई। सोमवार सुबह से ही घर के बाहर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के जवान तैनात कर दिए गए।

सुरक्षा व्यवस्था बढ़ने के बाद स्थानीय लोगों और मीडिया की भीड़ वहां जुटने लगी। इलाके में पूरे दिन राजनीतिक चर्चाओं का माहौल बना रहा।

सोशल मीडिया पर NCPI का बड़ा दावा

20 सांसदों के समर्थन मिलने के बाद NCPI ने सोशल मीडिया पर अपनी नई राजनीतिक स्थिति का खुलकर प्रचार किया।
जिसमें पार्टी ने एक पोस्ट में दावा किया कि अब वह पश्चिम बंगाल की सबसे बड़ी संसदीय ताकत बन चुकी है। पार्टी द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार बंगाल की 42 लोकसभा सीटों में से 20 सीटें NCPI के पास हैं।

पार्टी के दावे के अनुसार वर्तमान स्थिति इस प्रकार है:

  • NCPI – 20 सीटें
  • BJP – 12 सीटें
  • TMC – 8 सीटें
  • कांग्रेस – 1 सीट

बागी सांसदों का किया स्वागत

NCPI ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सभी 20 सांसदों का स्वागत करते हुए कहा कि उनके अनुभव और जनसंपर्क से पार्टी को नई ताकत मिलेगी।

पार्टी का कहना है कि ये सांसद लंबे समय से राजनीति में सक्रिय हैं और जनता के बीच मजबूत पकड़ रखते हैं। ऐसे में उनके जुड़ने से संगठन का विस्तार होगा और पार्टी का प्रभाव बढ़ेगा।

संस्थापक सदस्य ने क्या कहा?

उत्तर 24 परगना जिले के रहने वाले संतनु डे ने खुद को NCPI का संस्थापक सदस्य और राष्ट्रीय संगठन सचिव बताया है।उन्होंने कहा कि पार्टी के लिए यह ऐतिहासिक अवसर है। उनके अनुसार NCPI अब राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी भूमिका निभाने की तैयारी कर रही है।

संतनु डे ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों का समर्थन करती है और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के सहयोगी के रूप में काम करना चाहती है। उन्होंने कहा कि यदि TMC की बागी नेता काकोली घोष दस्तीदार उन्हें दिल्ली बुलाती हैं तो वह वहां जाकर संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस भी करेंगे।

बंगाल की राजनीति में क्या होगा असर?

राजनीतिक एक्सपर्त्स का मानना है कि यदि यह घटनाक्रम आगे भी कायम रहता है तो पश्चिम बंगाल की राजनीति में शक्ति संतुलन पूरी तरह बदल सकता है।

TMC के लिए यह बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि उसके कई प्रभावशाली सांसद अब अलग मंच पर दिखाई दे रहे हैं। वहीं NCPI को पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। हालांकि बड़ा सवाल यह है कि क्या यह नया राजनीतिक समीकरण लंबे समय तक कायम रहेगा या आने वाले दिनों में इसमें और बदलाव देखने को मिलेंगे।

ये भी पढ़ें: TMC Crisis: ‘तृणमूल एक है, दो नहीं’, बागी सांसदों के खिलाफ अभिषेक बनर्जी का बड़ा कदम, लोकसभा स्पीकर को लिखा पत्र

Author

  • Aparna Panwar

    अपर्णा पवांर, एक हिंदी कंटेंट राइटर है, जिन्होंने डिजिटल मीडिया में अपनी लेखनी से पहचान बनाई। आज वे “Khaber Aaj Ki” में हिंदी कंटेंट राइटर के पद पर काम करते हुए पत्रकारिता को अपना जुनून मानती हैं। उनके विचारों में खबरें केवल सूचनाएं नहीं, बल्कि लोगों तक सच्चाई पहुँचाने का माध्यम हैं।

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