
Modi Cabinet Expansion 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल (मोदी 3.0) के पहले कैबिनेट विस्तार को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। बता दें की सोशल मीडिया से लेकर सत्ता के गलियारों तक यह सवाल सबसे ज्यादा पूछा जा रहा है कि आखिर मंत्रिमंडल का विस्तार कब होगा, किन नेताओं को नई जिम्मेदारी मिलेगी और किन मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है। हालांकि सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक हलकों में कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
ऐसे में माना जा रहा है कि संसद के संभावित मानसून सत्र से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी टीम में बदलाव कर सकते हैं। वहीं इस बार कैबिनेट विस्तार में प्रदर्शन, सामाजिक संतुलन, महिला प्रतिनिधित्व और चुनावी राज्यों को प्राथमिकता दिए जाने की चर्चा है।
कब हो सकता है कैबिनेट विस्तार?
राजनीतिक कार्यक्रमों को देखते हुए जुलाई का दूसरा सप्ताह कैबिनेट विस्तार के लिए अहम माना जा रहा है। दरअसल प्रधानमंत्री के विदेशी दौरे और अन्य सरकारी कार्यक्रमों के बाद 11 जुलाई से 20 जुलाई के बीच मंत्रिमंडल विस्तार की संभावना जताई जा रही है।
इससे पहले भी वर्ष 2021 में मानसून सत्र शुरू होने से ठीक पहले बड़े स्तर पर मंत्रिमंडल में फेरबदल किया गया था। ऐसे में इस बार भी उसी तरह का फैसला लिया जा सकता है।
कई मंत्रियों की जिम्मेदारी बदल सकती है
जानकारी के अनुसार इस बार केवल नए चेहरों को शामिल करने की ही तैयारी नहीं है, बल्कि कई मौजूदा मंत्रियों के विभागों में भी बदलाव हो सकता है। जिन मंत्रियों के पास एक से अधिक मंत्रालय हैं, उनके विभाग कम किए जा सकते हैं ताकि प्रशासनिक कामकाज अधिक प्रभावी हो सके। जिनमें कुछ मंत्रियों के प्रदर्शन की भी समीक्षा की गई है और उसी आधार पर बदलाव की संभावना बताई जा रही है।
किन नेताओं की सीट खाली होगी?
कुछ नेताओं की नई संगठनात्मक जिम्मेदारियों के कारण उनके मंत्री पद छोड़ने की चर्चा है।
- वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी को उत्तर प्रदेश भाजपा की जिम्मेदारी मिलने के बाद “एक व्यक्ति, एक पद” के सिद्धांत के तहत बदलाव संभव माना जा रहा है।
- रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू का राज्यसभा कार्यकाल समाप्त हो चुका है। उन्हें पंजाब की राजनीति में सक्रिय भूमिका देने की संभावना जताई जा रही है।
- हर्ष मल्होत्रा को दिल्ली भाजपा की जिम्मेदारी मिलने के बाद उनके मंत्री पद को लेकर भी अटकलें हैं।
- अल्पसंख्यक मामलों के राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन के इस्तीफे के बाद एक पद पहले से ही खाली माना जा रहा है।
महिलाओं और पिछड़े वर्ग पर रहेगा खास फोकस
आपकी जानकारी के लिए बता दें इस बार के संभावित कैबिनेट विस्तार में महिलाओं और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को ज्यादा प्रतिनिधित्व मिलने की चर्चा है। हाल ही में भाजपा के संगठनात्मक बदलावों में भी पिछड़े वर्ग, महिलाओं और युवाओं को बड़ी संख्या में जिम्मेदारी दी गई थी। माना जा रहा है कि उसी रणनीति को केंद्र सरकार के मंत्रिमंडल में भी अपनाया जा सकता है।
चुनावी राज्यों का भी रखा जाएगा ध्यान
अगले वर्ष जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं, उनमें उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गुजरात, गोवा, हिमाचल प्रदेश और मणिपुर शामिल हैं।
राजनीतिक एक्सपर्ट्स का मानना है कि इन राज्यों के सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए नए मंत्रियों का चयन किया जा सकता है। इससे भाजपा चुनावी तैयारियों को और मजबूत करने की कोशिश करेगी।
75 वर्ष के करीब नेताओं पर भी नजर
रिपोर्टों के अनुसार सरकार उम्र और प्रदर्शन दोनों को ध्यान में रखकर फैसला कर सकती है। 75 वर्ष की आयु के करीब पहुंच चुके कुछ नेताओं को संगठन या अन्य जिम्मेदारियां देकर मंत्रिमंडल से बाहर किया जा सकता है। हालांकि इस संबंध में भी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
प्रदर्शन रहेगा सबसे बड़ा पैमाना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार “परफॉर्मेंस आधारित गवर्नेंस” पर जोर देते रहे हैं। माना जा रहा है कि इस बार भी मंत्रियों के कामकाज, योजनाओं के क्रियान्वयन और जनता से जुड़े कार्यों की समीक्षा के बाद ही अंतिम फैसला लिया जाएगा। यही कारण है कि कैबिनेट विस्तार में केवल राजनीतिक संतुलन ही नहीं बल्कि प्रशासनिक प्रदर्शन भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
सचिवों की बैठक भी अहम
प्रधानमंत्री ने सभी मंत्रालयों और विभागों के सचिवों की बैठक भी बुलाई है। इस बैठक में ‘ईज़ ऑफ लिविंग’ और ‘ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस’ से जुड़े सुधारों की समीक्षा की जाएगी।
बैठक में कई मंत्रालय अपनी उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं पर प्रस्तुति देंगे। साथ ही सरकार की प्राथमिकता लोगों तक योजनाओं का लाभ तेजी से पहुंचाने और लंबित मामलों को कम करने पर रहेगी।
आधिकारिक घोषणा का इंतजार
ऐसे में फिलहाल कैबिनेट विस्तार को लेकर कई तरह की चर्चाएं और अटकलें जारी हैं, लेकिन सरकार की ओर से अभी तक किसी तारीख या संभावित मंत्रियों के नाम की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। ऐसे में अंतिम फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा नेतृत्व द्वारा उचित समय पर लिया जाएगा।
राजनीतिक एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि मानसून सत्र से पहले मंत्रिमंडल विस्तार होता है तो यह मोदी सरकार 3.0 का पहला बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक बदलाव होगा। इसमें नए चेहरों, बेहतर प्रदर्शन करने वाले नेताओं और सामाजिक संतुलन को प्राथमिकता मिल सकती है, जबकि कमजोर प्रदर्शन या नई संगठनात्मक जिम्मेदारी संभाल रहे कुछ मंत्रियों की विदाई भी संभव है।
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