
Bangladesh Crisis: जमात-ए-इस्लामी पर प्रतिबंध की मांग तेज, शेख हसीना की वापसी की अटकलों से बढ़ी हलचलबांग्लादेश की राजनीति में एक बार फिर से बड़े बदलाव के संकेत दे रही है। बता दें की एक ओर पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने इस साल के भीतर देश लौटने का ऐलान किया है, वहीं दूसरी ओर सत्तारूढ़ बीएनपी (BNP) के सांसदों ने कट्टरपंथी संगठन जमात-ए-इस्लामी पर दोबारारोक लगाने की मांग तेज कर दी है। इन दोनों घटनाओं ने देश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें 2024 के छात्र आंदोलन के बाद बांग्लादेश की सत्ता और राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल गए थे। जिससे अब 2026 में फिर से ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि देश की राजनीति एक नए मोड़ की ओर बढ़ रही है।
संसद में उठी जमात-ए-इस्लामी पर प्रतिबंध की मांग
22 जून 2026 को बांग्लादेश की संसद में बीएनपी (BNP) सांसद रफीकुल इस्लाम ने जमात-ए-इस्लामी की राजनीति पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की है। उन्होंने बिना नाम लिए ही कहा कि जो राजनीतिक दल 1971 के स्वतंत्रता संग्राम का विरोध करता रहा और धर्म का राजनीतिक इस्तेमाल करता है, उसे राजनीति करने का अधिकार नहीं मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल किसी पार्टी के नाम में “इस्लाम” शब्द होने से वह इस्लाम का प्रतिनिधित्व नहीं करने लगती। साथ ही उन्होंने मस्जिदों को राजनीतिक गतिविधियों से दूर रखने की भी अपील की।
रफीकुल इस्लाम का कहना था कि बांग्लादेश के लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्ष व्यवस्था को मजबूत रखने के लिए ऐसे संगठनों पर सख्त कार्रवाई जरूरी है।
जमात-ए-इस्लामी ने दिया करारा जवाब
बीएनपी की इस मांग पर जमात-ए-इस्लामी (Jamaat-e-Islami) ने संसद के भीतर ही तीखी प्रतिक्रिया दी है। जिसमें पार्टी के सांसद एटीएम अज़हरुल इस्लाम ने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि उनकी पार्टी पर प्रतिबंध लगा दिया जाता है तो विपक्ष की जगह कौन भरेगा। उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या वह देश में एक-दलीय शासन स्थापित करना चाहती है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बीएनपी कहीं न कहीं अवामी लीग को दोबारा मुख्यधारा की राजनीति में लाने की कोशिश कर रही है।
अज़हरुल इस्लाम ने यह भी कहा कि यदि फासीवाद खत्म करना है तो उसके सभी प्रतीकों को हटाना होगा। उन्होंने मौजूदा राष्ट्रपति को बनाए रखने के फैसले पर भी सवाल उठाए।
2024 के आंदोलन के बाद बदल गई थी राजनीति
बांग्लादेश में जुलाई-अगस्त 2024 का छात्र आंदोलन देश की राजनीति का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ। इस आंदोलन के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को देश छोड़ना पड़ा और उनकी अवामी लीग सरकार सत्ता से बाहर हो गई। इसके बाद बनी अंतरिम व्यवस्था और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के कारण जमात-ए-इस्लामी पर लगा पुराना प्रतिबंध हटा लिया गया। इससे पार्टी को दोबारा संगठित होने और चुनाव लड़ने का मौका मिला।
फरवरी 2026 में हुए आम चुनाव में जमात-ए-इस्लामी ने 68 सीटें जीतकर खुद को एक मजबूत विपक्षी दल के रूप में स्थापित कर लिया। यही वजह है कि अब उसकी बढ़ती राजनीतिक ताकत को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।
राष्ट्रपति को लेकर भी बढ़ा विवाद
बांग्लादेश के वर्तमान राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन को शेख हसीना की अवामी लीग सरकार ने 2023 में राष्ट्रपति बनाया था। 2024 के सत्ता परिवर्तन के बाद प्रशासन में कई बड़े बदलाव हुए, लेकिन राष्ट्रपति अपने पद पर बने रहे। उन्होंने पहले संकेत दिया था कि चुनाव के बाद इस्तीफा दे सकते हैं, लेकिन अब तक उन्होंने ऐसा नहीं किया है। फरवरी 2026 में उन्होंने ही बीएनपी नेता तारिक रहमान के नेतृत्व वाली नई सरकार को शपथ दिलाई थी।
जमात-ए-इस्लामी का आरोप है कि राष्ट्रपति को बनाए रखने के पीछे राजनीतिक कारण हो सकते हैं। इसी मुद्दे पर संसद में सरकार से कई सवाल भी पूछे गए।
शेख हसीना ने किया वापसी का ऐलान
इस बीच बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने साफ कहा है कि वह इस साल अपने देश लौटेंगी। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि उनका पूरा राजनीतिक जीवन बांग्लादेश के लोगों, लोकतंत्र और विकास के लिए समर्पित रहा है। उन्होंने कहा कि हर बाधा और हर साजिश को पार करते हुए वह अपने देश लौटेंगी। शेख हसीना ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी वापसी को लेकर बीएनपी के साथ किसी तरह की बैकचैनल बातचीत नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र, चुनाव और न्याय किसी गुप्त समझौते का विषय नहीं हो सकते। यदि किसी राजनीतिक दल या नेता के खिलाफ कोई मामला है तो उसका फैसला स्वतंत्र और निष्पक्ष न्यायपालिका के जरिए होना चाहिए।
क्या फिर बदलेंगे बांग्लादेश के राजनीतिक समीकरण?
राजनीतिक एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि शेख हसीना की वापसी होती है और दूसरी ओर जमात-ए-इस्लामी पर प्रतिबंध लगाने की प्रक्रिया आगे बढ़ती है, तो बांग्लादेश की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
बीएनपी सरकार के सामने एक तरफ मजबूत विपक्ष है, तो दूसरी ओर अवामी लीग की संभावित वापसी की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। ऐसे में आने वाले महीनों में देश की राजनीति और अधिक दिलचस्प हो सकती है।
अब आगे क्या होगा?
दरअसल आने वाले समय में बांग्लादेश की राजनीति इन तीन बड़े मुद्दों पर टिकी रहेगी। जमात-ए-इस्लामी पर दोबारा प्रतिबंध लगता है या नहीं, शेख हसीना की वापसी कब और कैसे होती है, और राष्ट्रपति की भूमिका पर सरकार क्या फैसला लेती है। इन मुद्दों पर होने वाले निर्णय देश की राजनीतिक दिशा और सत्ता के समीकरण तय करेंगे।






