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J&K: जम्मू-कश्मीर में आतंक के खिलाफ बड़ा एक्शन, पुलिस ने वन विभाग के कर्मचारी समेत 2 को किया गिरफ्तार
Current image: आरोपी गिरफ्तार

J&K: जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत सुरक्षा एजेंसियों को एक और महत्वपूर्ण सफलता मिली है। किश्तवाड़ पुलिस ने आतंकी नेटवर्क से जुड़े कथित सहयोगियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए वन विभाग के एक कर्मचारी समेत दो लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस का दावा है कि गिरफ्तार आरोपी स्थानीय आतंकियों को सहायता और समर्थन उपलब्ध करा रहे थे। इस कार्रवाई को जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकी नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार मामले की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

जांच के दौरान हुई गिरफ्तारी

पुलिस के अनुसार यह कार्रवाई किश्तवाड़ पुलिस स्टेशन में दर्ज एक मामले की जांच के दौरान की गई। मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS), गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) और आर्म्स एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज किया गया है। जांच के दौरान पुलिस को कुछ ऐसे सुराग मिले जिनके आधार पर दो संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। पूछताछ और साक्ष्यों के आधार पर दोनों को औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया।

कौन हैं गिरफ्तार आरोपी?

पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों की पहचान दच्छन क्षेत्र के टंडर गांव निवासी तारिक अहमद गिनू और मोहम्मद इकबाल के रूप में की है। इनमें से तारिक अहमद गिनू वन विभाग में सरकारी कर्मचारी के रूप में कार्यरत बताया गया है। सरकारी कर्मचारी की गिरफ्तारी ने इस मामले को और गंभीर बना दिया है। पुलिस का कहना है कि दोनों आरोपियों की गतिविधियों पर लंबे समय से नजर रखी जा रही थी और जांच में उनके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद यह कार्रवाई की गई।

आतंकियों को मदद पहुंचाने का आरोप

जांच एजेंसियों के अनुसार दोनों आरोपी स्थानीय आतंकियों को विभिन्न प्रकार की सहायता उपलब्ध करा रहे थे। पुलिस का आरोप है कि ये लोग आतंकियों की गतिविधियों को आसान बनाने, उन्हें रसद संबंधी मदद पहुंचाने और स्थानीय स्तर पर समर्थन जुटाने में भूमिका निभा रहे थे। हालांकि जांच एजेंसियां अभी इस नेटवर्क की पूरी संरचना का पता लगाने में जुटी हैं और यह जानने की कोशिश कर रही हैं कि इनके संपर्क किन-किन लोगों और संगठनों से थे।

पहले भी हो चुकी हैं गिरफ्तारियां

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इसी मामले में इससे पहले छात्रू क्षेत्र के दो अन्य व्यक्तियों को भी गिरफ्तार किया जा चुका है। उन गिरफ्तारियों से मिले इनपुट और पूछताछ के आधार पर जांच आगे बढ़ी, जिसके बाद अब दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। अधिकारियों का मानना है कि यह एक संगठित नेटवर्क हो सकता है, जिसकी कई परतों का खुलासा अभी बाकी है।

हथियारों का बड़ा जखीरा बरामद

मामले की जांच के दौरान सुरक्षा बलों ने आतंकियों द्वारा कथित रूप से छिपाकर रखे गए हथियारों और गोला-बारूद का जखीरा भी बरामद किया है। बरामद सामग्री में:

  • 16 जिंदा कारतूस
  • 47 खाली खोखे
  • 2 हैंड ग्रेनेड

शामिल बताए गए हैं। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इन हथियारों का इस्तेमाल किन गतिविधियों में किया जाना था और इन्हें कहां से लाया गया था।

सुरक्षा एजेंसियों की बढ़ी चिंता

विशेषज्ञों का मानना है कि हथियारों और विस्फोटकों की बरामदगी इस बात का संकेत है कि आतंकी संगठन अभी भी स्थानीय स्तर पर अपने नेटवर्क को सक्रिय रखने की कोशिश कर रहे हैं। हाल के महीनों में जम्मू-कश्मीर के कई इलाकों में सुरक्षा बलों ने ऐसे कई मॉड्यूल का खुलासा किया है, जिनका काम आतंकियों को लॉजिस्टिक सपोर्ट उपलब्ध कराना था। इसी वजह से सुरक्षा एजेंसियां अब केवल आतंकियों के खिलाफ ही नहीं बल्कि उनके सहयोगी नेटवर्क के खिलाफ भी लगातार कार्रवाई कर रही हैं।

एसएसपी ने क्या कहा?

किश्तवाड़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) नरेश सिंह ने बताया कि गिरफ्तारियां विस्तृत जांच और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर की गई हैं। उन्होंने कहा कि मामले की जांच अभी जारी है और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा रही है। एसएसपी के अनुसार यदि जांच में और नाम सामने आते हैं तो उनके खिलाफ भी कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

आतंक के खिलाफ लगातार अभियान

जम्मू-कश्मीर पुलिस, सेना और केंद्रीय सुरक्षा बल पिछले कई वर्षों से आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त अभियान चला रहे हैं। इन अभियानों के चलते कई बड़े आतंकी मॉड्यूल ध्वस्त किए गए हैं और बड़ी संख्या में हथियार व विस्फोटक बरामद किए गए हैं। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई केवल हथियारबंद आतंकियों को खत्म करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके स्थानीय समर्थन तंत्र को भी खत्म करना जरूरी है।

स्थानीय सहयोगियों पर विशेष नजर

विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी आतंकी संगठन के लिए स्थानीय नेटवर्क बेहद महत्वपूर्ण होता है। इसी नेटवर्क के माध्यम से आतंकियों को ठिकाने, भोजन, जानकारी और अन्य संसाधन उपलब्ध कराए जाते हैं। यही कारण है कि सुरक्षा एजेंसियां अब ऐसे सहयोगियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रही हैं।

क्षेत्र में बढ़ाई गई निगरानी

गिरफ्तारियों और हथियारों की बरामदगी के बाद किश्तवाड़ और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। पुलिस और सुरक्षा बल लगातार तलाशी अभियान चला रहे हैं ताकि किसी भी संभावित खतरे को समय रहते निष्क्रिय किया जा सके। अधिकारियों का कहना है कि आम नागरिकों की सुरक्षा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।

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Author

  • Sakshi Raj

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