Skip to main content Scroll Top
India China Investment Deal: भारत-चीन के बीच नई ट्रेड डील की तैयारी, ग्लोबल सप्लाई चेन पर पड़ेगा असर
India China Investment Deal: भारत-चीन के बीच नई ट्रेड डील की तैयारी
India China Investment Deal: भारत और चीन के बीच रिश्तों में सुधार के साथ व्यापारिक सहयोग बढ़ाने की तैयारी चल रही है। जिससे दोनों देश एक नए निवेश ढांचे पर विचार कर रहे हैं, जिसके जरिए चीनी निवेश को बढ़ावा देने और व्यापारिक गतिविधियों को आसान बनाने की कोशिश की जा सकती है। सितंबर में होने वाली BRICS बैठक के दौरान इस दिशा में बड़ा ऐलान होने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में आइए यहां पढ़ें पूरी खबर को लेकर जानकारी

भारत-चीन रिश्तों में नई शुरुआत

भारत और चीन के रिश्ते पिछले कुछ वर्षों से सीमा विवाद और कई रणनीतिक मुद्दों के कारण तनावपूर्ण रहे हैं। हालांकि, अब दोनों देशों के बीच संबंधों को धीरे-धीरे सामान्य बनाने की कोशिश होती दिखाई दे रही है। इसी कड़ी में व्यापार और निवेश को लेकर बातचीत आगे बढ़ रही है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत और चीन एक ऐसे नए निवेश फ्रेमवर्क पर विचार कर रहे हैं, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक आदान-प्रदान आसान हो सके। इसका उद्देश्य गैर-संवेदनशील क्षेत्रों में चीनी निवेश को बढ़ावा देना और दोनों देशों के कारोबारी रिश्तों को मजबूत करना है।

BRICS सम्मेलन में बड़ा ऐलान संभव

12-13 सितंबर को होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन को भारत-चीन संबंधों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग इस सम्मेलन में भारत आ सकते हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर सकते हैं। ऐसे में अगर यह बैठक होती है तो यह दोनों नेताओं के बीच लंबे समय बाद महत्वपूर्ण आमने-सामने की बातचीत होगी। इसी दौरान चीन की ओर से भारत के लिए किसी निवेश पैकेज या नए निवेश ढांचे की घोषणा किए जाने की संभावना जताई गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, इस संभावित पहल की नींव राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की चीन यात्रा के दौरान तैयार हुई। दोनों देशों के बीच बातचीत बढ़ने से व्यापारिक संबंधों को भी नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

निवेश फ्रेमवर्क में क्या हो सकता है?

प्रस्तावित निवेश ढांचे में कई अहम क्षेत्रों को शामिल किए जाने की संभावना है। इनमें समुद्री मार्गों तक बेहतर पहुंच वाला विशेष आर्थिक क्षेत्र और भारत में निर्यात से जुड़े नए सेक्टर का विकास शामिल हो सकता है। इसके अलावा चीन की फंडिंग से भारत में एक एक्सपोर्ट प्रोसेसिंग सेक्टर स्थापित करने का प्रस्ताव भी सामने आया है। इससे भारत को तीसरे देशों के बाजारों में सामान निर्यात करने में मदद मिल सकती है।

चीनी इलेक्ट्रिक वाहन कंपनियों के लिए भी भारतीय बाजार में अवसर बढ़ने की संभावना है। BYD जैसी कंपनियों को भारत में अधिक कारोबारी पहुंच मिलने की चर्चा है। हालांकि, संवेदनशील और रणनीतिक क्षेत्रों में भारत अपनी सुरक्षा संबंधी शर्तों को बनाए रख सकता है।

बड़ा निवेश पैकेज नहीं, धीरे-धीरे बढ़ेगा सहयोग

बता दें शुरुआत में चीन की ओर से आने वाला निवेश पैकेज बहुत बड़ा नहीं होगा। इसकी बड़ी वजह दोनों देशों के बीच लंबे समय से चला आ रहा तनाव है। भारत और चीन फिलहाल भरोसा बहाल करने और पुराने मतभेदों को धीरे-धीरे दूर करने पर ध्यान दे रहे हैं।

भारत गैर-रणनीतिक क्षेत्रों में चीनी निवेश की मंजूरी प्रक्रिया को आसान बनाने पर विचार कर सकता है। हालांकि, सीमा क्षेत्र, रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील क्षेत्रों में प्रतिबंध जारी रहने की संभावना है।

भारत को चीन से क्या फायदा हो सकता है?

भारत लंबे समय से चीन के साथ अपने व्यापार घाटे को कम करने की कोशिश कर रहा है। चीन से भारत का आयात काफी अधिक है, जबकि भारत से चीन को होने वाला निर्यात तुलनात्मक रूप से कम है। ऐसे में भारत चीन से अधिक निवेश के साथ-साथ भारतीय उत्पादों के लिए चीनी बाजार में बेहतर पहुंच चाहता है। इसके अलावा IT सेक्टर और महत्वपूर्ण कच्चे माल की सप्लाई को सुचारु बनाए रखना भी भारत के लिए महत्वपूर्ण है।

अब अगर दोनों देशों के बीच सप्लाई चेन को लेकर भरोसा बढ़ता है तो भारतीय उद्योगों को कच्चे माल और टेक्नोलॉजी से जुड़े सामान की उपलब्धता में फायदा मिल सकता है।

अमेरिका पर पड़ेगा असर?

भारत और चीन के बीच व्यापारिक सहयोग बढ़ने की खबर ऐसे समय सामने आई है जब भारत और अमेरिका के बीच भी व्यापार और टैरिफ को लेकर बातचीत जारी है। अमेरिका की ओर से भारतीय उत्पादों और रूस से तेल खरीद जैसे मुद्दों पर दबाव बनाए जाने के बीच भारत के लिए अन्य बड़े व्यापारिक साझेदारों के साथ विकल्प मजबूत करना रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है। हालांकि, इसे सीधे तौर पर अमेरिका के खिलाफ भारत-चीन गठजोड़ कहना जल्दबाजी होगी। भारत की विदेश नीति में राष्ट्रीय हित और रणनीतिक स्वायत्तता प्रमुख भूमिका निभाते हैं। चीन के साथ व्यापार बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि भारत अमेरिका के साथ अपने संबंधों को कमजोर करना चाहता है।

ग्लोबल सप्लाई चेन पर असर

अगर भारत और चीन के बीच निवेश और व्यापारिक संबंध मजबूत होते हैं तो इसका असर केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं रह सकता। दोनों देश वैश्विक विनिर्माण और सप्लाई चेन में बड़ी भूमिका रखते हैं।

भारत में चीनी निवेश, बेहतर कच्चे माल की सप्लाई और निर्यात से जुड़े नए सेक्टर विकसित होने से कंपनियों को उत्पादन और व्यापार के नए विकल्प मिल सकते हैं। इससे आने वाले समय में ग्लोबल सप्लाई चेन में भारत की भूमिका और मजबूत हो सकती है। फिलहाल यह पूरा प्रस्ताव शुरुआती स्तर पर है और अंतिम फैसला दोनों देशों के बीच होने वाली बातचीत पर निर्भर करेगा। सितंबर में BRICS सम्मेलन के दौरान मोदी-जिनपिंग मुलाकात और संभावित निवेश घोषणा पर दुनिया की नजर रहेगी।

ये भी पढ़ें: Uttar Pradesh News: योगी कैबिनेट ने दी मंजूरी, राज्य की इन महिलाओं को मिलेगा फ्री यात्रा का लाभ

Author

  • Aparna Panwar

    अपर्णा पवांर, एक हिंदी कंटेंट राइटर है, जिन्होंने डिजिटल मीडिया में अपनी लेखनी से पहचान बनाई। आज वे “Khaber Aaj Ki” में हिंदी कंटेंट राइटर के पद पर काम करते हुए पत्रकारिता को अपना जुनून मानती हैं। उनके विचारों में खबरें केवल सूचनाएं नहीं, बल्कि लोगों तक सच्चाई पहुँचाने का माध्यम हैं।

Related Posts

लेटेस्ट ➤

Advertising Banner
305x250