
Ethanol Water Usage: भारत में आए दिन पेट्रोल से जुड़ी कई तरह की खबरें सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि पेट्रोल में एथेनॉल को मिला जा रहा है, जिसके कारण कई लोगों की गाड़ियां खराब हो रही है। पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण (E20) को लेकर जनता के बीच में गुस्से का माहौल बना हुआ है। दावा किया जा रहा है कि 1 लीटर एथेनॉल बनाने में 10,000 लीटर पानी खर्च होता है। इस दावे को अब भारत सरकार के द्वारा पूरी तरह से गलत बताया है। उन्होंने कहा है कि इसकी तकनीकी और वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट की है।
वहीं, केंद्र सरकार का कहना है कि एथेनॉल उत्पादन और E20 कार्यक्रम को लेकर फैलाई जा रही सभी जानकारियां भ्रामक हैं।
1 लीटर एथेनॉल बनाने में कितना पानी की जरूरत?
सरकार के मुताबिक, 1 लीटर एथेनॉल बनाने में 10,000 लीटर नहीं, बल्कि केवल 3 से 5 लीटर प्रोसेस्ड पानी की जरूरत होती है। यह पानी आधुनिक डिस्टिलरी में जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (Zero Liquid Discharge) तकनीक के जरिए दोबारा इस्तेमाल होता है, यानी उत्पादन प्रक्रिया में पानी का संरक्षण भी किया जाता है।
सरकार ने साफ कहा है कि भारत में एथेनॉल का उत्पादन (Ethanol production in India) मुख्य रूप से अधिशेष अनाज और मक्के से किया जाता है। यह वही अनाज होता है, जो देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित (Food Security Ensured) होने के बाद बच जाता है। इसलिए इससे खाद्यान्न संकट (Food Crisis) पैदा होने का दावा भी सही नहीं है।
E20 ईंधन को लेकर सरकार ने क्या कहा?
सरकार की ओर से जारी रिपोर्ट में E20 यानी 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (Ethanol-Blended Petrol) को पूरी तरह सुरक्षित बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, यह कार्यक्रम अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप लागू किया जा रहा है और इससे पर्यावरण को भी फायदा मिल रहा है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, E20 ईंधन के इस्तेमाल से प्रदूषण में भी कमी देखी गई है। ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) की जांच में पाया गया कि E20 के उपयोग से दोपहिया वाहनों में कार्बन मोनोऑक्साइड उत्सर्जन करीब 50 प्रतिशत तक कम हुआ, जबकि चारपहिया वाहनों में यह कमी लगभग 30 प्रतिशत दर्ज की गई।
इंजन और माइलेज पर असर को लेकर क्या है सच्चाई?
देखा जाए तो सोशल मीडिया पर यह भी दावा किया जा रहा है कि E20 पेट्रोल से वाहन का इंजन जल्दी खराब हो रहा है और साथ ही गाड़ियां पहले के मुकाबले अब माइलेज कम दे रही है। ऐसे में कंपनी की वारंटी भी खत्म हो जाती है। वहीं, सरकार ने इन सभी दावों को गलत बताया है और कहा है कि परीक्षण में माइलेज पर कोई बड़ा नकारात्मक प्रभाव नहीं मिला। एथेनॉल की ऑक्टेन रेटिंग अधिक होने के कारण कई मामलों में वाहन का पिकअप बेहतर और ड्राइविंग अनुभव अधिक स्मूद पाया गया।
सरकार ने कहा है कि SIAM और PIB Fact Check ने जून 2026 में भी साफ किया था कि मानकों के अनुरूप E20 ईंधन के इस्तेमाल से वाहन की वारंटी या बीमा पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ता।
देश को क्या मिला फायदा?
सरकार के अनुसार, एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम से देश को आर्थिक और पर्यावरणीय दोनों स्तर पर बड़ा लाभ मिला है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2014-15 से मई 2026 के बीच इस कार्यक्रम की वजह से भारत ने 1.90 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा बचाई है। इसके अलावा किसानों को 1.60 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान किया गया है, जिससे कृषि क्षेत्र को भी मजबूती मिली है।
E20 लक्ष्य हासिल करने का दावा
सरकार ने बताया कि भारत में एथेनॉल मिश्रण का स्तर 2013-14 में केवल 1.5 प्रतिशत था। लगातार प्रयासों के बाद दिसंबर 2025 तक 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण (E20) का लक्ष्य हासिल कर लिया गया। इससे कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम हुई है और ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूती मिली है।
सरकार ने जनता से की अपील
केंद्र सरकार ने लोगों से अपील की है कि एथेनॉल और E20 कार्यक्रम से जुड़ी किसी भी तरह की जानकारी पर भरोसा करने से पहले आप सभी को आधिकारिक स्रोतों से उसकी सही से पुष्टि जरूर करनी चाहिए, ताकि आप तक सही सूचना पहुंचे। इसके अलावा, सरकार का यह भी कहना है कि सोशल मीडिया पर फैल रही कई जानकारियां तथ्यहीन हैं और लोगों को भ्रमित कर सकती हैं।






