
सीबीएसई OSM विवाद: देश की सबसे बड़ी स्कूली परीक्षा संस्था केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) एक बार फिर से सुर्खियों में है। बताया जा रहा है की इस बार मामला परीक्षा परिणाम, कॉपियों की जांच प्रणाली और ऑन स्क्रीन मार्किंग (OSM) को लेकर उठे विवाद से जुड़ा है।
मिली जानकारी के अनुसार, सरकार ने बड़ी कार्रवाई करते हुए CBSE के चेयरमैन राहुल सिंह और सेक्रेटरी हिमांशु गुप्ता का तबादला कर दिया है। इसके साथ ही OSM प्रणाली की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी भी गठित की गई है। जिससे यह फैसला छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों की लगातार बढ़ती शिकायतों के बाद लिया गया है।
क्या है CBSE OSM विवाद?
On Screen Marking (OSM) एक डिजिटल प्रणाली है, जिसके जरिए उत्तर पुस्तिकाओं की जांच ऑनलाइन माध्यम से की जाती है। वहीं, इस साल CBSE ने 12वीं की कॉपियों का मूल्यांकन इसी सिस्टम के जरिए कराया था, लेकिन इस प्रक्रिया के दौरान कई गंभीर समस्याएं सामने आईं, जिनमें स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाओं का धुंधला दिखाई देना, कुछ मामलों में पेज गायब होने के आरोप, और ऑनलाइन सिस्टम में तकनीकी खराबियां शामिल हैं। इसके अलावा मार्किंग प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल उठे और स्कैन कॉपी डाउनलोड व देखने में छात्रों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इन सभी समस्याओं के बाद छात्रों और अभिभावकों में असंतोष और नाराजगी बढ़ गई।
स्कैन कॉपी पोर्टल पर भी उठे सवाल
CBSE द्वारा 12वीं के छात्रों के लिए स्कैन कॉपी उपलब्ध कराने हेतु 19 मई को शुरू किया गया पोर्टल शुरुआत से ही विवादों में रहा। रिपोर्ट्स के अनुसार पहले ही दिन पोर्टल पूरी तरह से डाउन हो गया, जिससे छात्र सेवाओं का उपयोग नहीं कर पाए। इसके बाद दूसरे दिन पेमेंट सिस्टम में दिक्कतें सामने आईं और कई बार सर्वर क्रैश होने की शिकायतें दर्ज की गईं। स्थिति को देखते हुए आवेदन की अंतिम तिथि को बार-बार बढ़ाना पड़ा। इस दौरान कुछ मामलों में पोर्टल पर हैकिंग के प्रयास के दावे भी किए गए, जिससे सुरक्षा को लेकर सवाल और गहरे हो गए। इन लगातार तकनीकी समस्याओं ने छात्रों और अभिभावकों की चिंता को और बढ़ा दिया।
छात्रों की शिकायतें क्यों बढ़ीं?
दरअसल इस पूरे विवाद के बीच हजारों छात्रों ने शिकायत दर्ज कराई कि उन्हें समय पर स्कैन कॉपी उपलब्ध नहीं कराई गई है, जिससे उनकी आगे की प्रक्रिया प्रभावित हुई। जिसमें कई छात्रों ने यह भी बताया कि प्राप्त कॉपियों में स्पष्टता नहीं थी और कुछ मामलों में उत्तर पुस्तिकाओं के महत्वपूर्ण हिस्से गायब पाए गए। इसके अलावा री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया में लगातार हो रही देरी ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। छात्रों का कहना है कि इन समस्याओं का सीधा असर उनके परिणामों और भविष्य की संभावनाओं पर पड़ सकता है, जिससे उनकी चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।
सरकार ने क्यों लिया बड़ा एक्शन?
सूत्रों के मुताबिक, CBSE की कार्यप्रणाली और OSM सिस्टम को लेकर लगातार मिल रही शिकायतों के बाद सरकार ने यह बड़ा कदम उठाया है। साथ ही, इन शिकायतों के आधार पर ही जांच के आदेश दिए गए और सुधार प्रक्रिया शुरू की गई है। ऐसे में रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया जा रहा है कि मामले पर उच्च स्तर पर निगरानी रखी गई और NEET तथा CBSE से जुड़े विभिन्न विवादों की समीक्षा भी की गई। साथ ही प्रशासनिक जवाबदेही तय करने पर जोर दिया गया है ताकि भविष्य में ऐसी समस्याओं को रोका जा सके। हालांकि इस पर आधिकारिक पुष्टि सीमित है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर हलचल काफी तेज देखी जा रही है।
जांच कमेटी क्या करेगी?
सरकार द्वारा गठित जांच कमेटी को OSM प्रणाली की पूरी गहन जांच का जिम्मा सौंपा गया है। जिससे यह कमेटी यह पता लगाएगी कि OSM सिस्टम का चयन किस प्रक्रिया के तहत किया गया, ठेका देने में सभी नियमों और प्रक्रियाओं का सही पालन हुआ या नहीं। इसके अलावा तकनीकी खामियों के कारणों की भी जांच की जाएगी, साथ ही यह भी देखा जाएगा कि छात्रों के डेटा की सुरक्षा व्यवस्था कितनी मजबूत है। कमेटी सिस्टम में पारदर्शिता और जवाबदेही के स्तर का मूल्यांकन भी करेगी। यह जांच बेहद अहम मानी जा रही है क्योंकि यह सीधे देश की परीक्षा प्रणाली और लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा मामला है।
CBSE की ऑनलाइन सेवाओं पर सवाल
इस विवाद ने CBSE की ऑनलाइन और डिजिटल सेवाओं की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल सिस्टम लागू करने का उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना था, लेकिन तकनीकी खामियों के कारण छात्रों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उनका यह भी मानना है कि किसी भी ऑनलाइन परीक्षा प्रणाली में डेटा सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती होती है, जिसे मजबूत किए बिना ऐसी व्यवस्थाएं पूरी तरह सफल नहीं हो सकतीं।
री-इवैल्यूएशन पोर्टल और नई समस्या
CBSE ने हाल ही में री-इवैल्यूएशन के लिए पोर्टल दोबारा खोला, लेकिन इसमें भी कई तकनीकी समस्याएं सामने आईं। रिपोर्ट्स के अनुसार हजारों छात्रों ने आवेदन किए, जिससे सिस्टम पर अचानक भारी दबाव बढ़ गया और कुछ समय के लिए पोर्टल धीमा पड़ गया। इस दौरान सुरक्षा और डेटा प्रोटेक्शन को लेकर भी सवाल उठने लगे। वहीं CBSE का कहना है कि सिस्टम पर साइबर हमले जैसी कोशिशें की गईं, जिसके कारण तकनीकी दिक्कतें और बढ़ गईं और सेवाओं में बाधा आई।
छात्रों और अभिभावकों की चिंता
इस पूरे विवाद ने छात्रों और अभिभावकों के बीच गहरी चिंता पैदा कर दी है। कई लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या मौजूदा परीक्षा प्रणाली पूरी तरह सुरक्षित है, क्या डिजिटल मार्किंग पर भरोसा किया जा सकता है और क्या भविष्य में ऐसी तकनीकी समस्याएं दोबारा सामने आ सकती हैं। स्थिति ने पारदर्शिता और सिस्टम की विश्वसनीयता पर भी बहस को तेज कर दिया है।
CBSE का क्या कहना है?
CBSE की ओर से कहा गया है कि सभी तकनीकी समस्याओं को ठीक करने के लिए लगातार सुधार कार्य किया जा रहा है और छात्रों से जुड़ी हर शिकायत को गंभीरता से लिया जा रहा है। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि सिस्टम में आ रही दिक्कतों को दूर करने के लिए तकनीकी टीम काम कर रही है और किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। साथ ही CBSE ने आश्वासन दिया है कि छात्रों के हित सर्वोच्च प्राथमिकता में हैं और परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
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