
Agra Bathroom Murder Case: उत्तर प्रदेश के आगरा में सामने आए बाथरूम मर्डर केस ने पूरे प्रदेश को हिला कर रख दिया है। बताया जा रहा है इस मामले में आरोपी महिला रूबी पर अपने पति सुरेंद्र शर्मा की हत्या कर शव को घर के बाथरूम के नीचे दफनाने का आरोप है। पुलिस की जांच में हर दिन नए खुलासे हो रहे हैं। अब इस केस की सबसे अहम कड़ी वह फोन कॉल माना जा रहा है, जिसमें रूबी ने अपने जेठ अनिल शर्मा से कहा था, “घर के अंदर मत आना… बच्चों को बाहर से ही ले जाना।” दरअसल उस समय यह बात सामान्य लगी, लेकिन अब माना जा रहा है कि इसी एक वाक्य के पीछे हत्या का पूरा राज छिपा था। ऐसे में आइए जानते हैं 18 मई से लेकर 3 जुलाई तक इस पूरे मामले की पूरी टाइमलाइन।
18 मई हत्या की साजिश और पहला फोन कॉल
पुलिस के अनुसार, 18 मई को सुरेंद्र शर्मा की हत्या की गई। जिसके बाद जांच में सामने आया कि आरोपी रूबी ने कथित तौर पर पहले अपने पति को खीर में 15 से 16 नींद की गोलियां मिलाकर खिलाईं। जब वह बेहोश हो गया तो उसकी हत्या कर दी गई। हत्या के बाद उसी सुबह रूबी ने अपने जेठ अनिल शर्मा को फोन किया। उसने कहा कि घर में पुलिस से जुड़ा कोई मामला हो गया है, इसलिए वह मां और दोनों बच्चियों को अपने साथ ले जाएं। रूबी ने फोन पर एक और बात कही “घर के अंदर मत आना, बच्चों को बाहर से ही ले जाना।” उस वक्त परिवार को इस बात पर कोई शक नहीं हुआ, लेकिन बाद में यही कॉल पुलिस जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया।
19 मई शव को बाथरूम में दफनाया गया
पुलिस की जांच के मुताबिक, अगले दिन रूबी ने अपनी दोनों बेटियों और सास को जेठ के घर भेज दिया। घर में अकेली रहने के बाद उसने पति के शव को बाथरूम तक घसीटा। जिसके बाद जांच में दावा किया गया है कि पहले से तैयार गड्ढे में शव को दबाकर उसके ऊपर मिट्टी डाल दी गई। इसके बाद उसने इस जगह को पूरी तरह छिपाने की योजना बनाई।
राज छिपाने के लिए बनवाया नया फर्श
शव दफनाने के बाद रूबी ने एक राजमिस्त्री को बुलाया। उसने कहा कि बाथरूम का फर्श ऊंचा करना है। मिस्त्री ने पुलिस को बताया कि जब वह मौके पर पहुंचा तो रूबी खुद बाथरूम में मलबा डाल रही थी। उसने मजदूर लगाने की सलाह दी, लेकिन रूबी ने कहा कि वह खुद काम कर लेगी।
करीब चार गुणा छह फुट के बाथरूम में नया सीमेंट का फर्श तैयार कर दिया गया। किसी को भी इस बात का अंदाजा नहीं था कि उसी फर्श के नीचे एक शव दफन है।
26 मई गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज
हत्या के करीब आठ दिन बाद सुरेंद्र शर्मा की गुमशुदगी दर्ज कराई गई। रूबी लगातार यही कहती रही कि पति घर छोड़कर चले गए हैं और जल्द वापस आ जाएंगे। इसी आधार पर पुलिस ने लापता व्यक्ति की जांच शुरू की। इस दौरान रूबी परिवार और पुलिस के सामने सामान्य व्यवहार करती रही।
45 दिनों तक चलता रहा झूठ का सिलसिला
पुलिस जांच के दौरान रूबी कई बार पुलिस के साथ CCTV फुटेज भी देखती रही। वह रिश्तेदारों के सामने पति की चिंता जताती थी। जिसमें कभी कहती कि वह पैसे लेकर गए हैं, कभी कहती कि जल्द लौट आएंगे। कई बार वह रोने भी लगती थी। हालांकि उसके अलग-अलग बयान परिवार के लोगों के मन में शक पैदा कर रहे थे।
सुरेंद्र शर्मा के बड़े भाई अनिल शर्मा को लगातार महसूस हो रहा था कि रूबी कुछ छिपा रही है। उन्होंने बैंक रिकॉर्ड और अन्य जानकारियां जुटानी शुरू कीं। उन्होंने रूबी से कहा कि यदि कोई परेशानी है तो सच बता दे, वह उसका साथ देंगे। माना जा रहा है कि इसी बातचीत के बाद रूबी मानसिक दबाव में आ गई।
3 जुलाई 45 दिन बाद खुला पूरा राज
करीब डेढ़ महीने बाद 3 जुलाई को रूबी ने खुद अपने जेठ को फोन कर घर बुलाया। जब अनिल शर्मा पहुंचे तो उन्होंने पूछा कि सुरेंद्र कहां हैं। पहले रूबी ने कहा कि वह घर में हैं। जब दोबारा पूछा गया तो उसने कहा कि “बाथरूम में।” जब बाथरूम में कुछ नहीं मिला तो उसने बताया कि शव फर्श के नीचे दफन है। यह सुनते ही परिवार ने पुलिस को सूचना दी गई।
फर्श तोड़ते ही मिला शव
पुलिस मौके पर पहुंची और बाथरूम का सीमेंट तोड़ा गया। नीचे गड्ढे में सुरेंद्र शर्मा का शव मिला। वहीं, करीब 45 दिन पुराना शव बुरी तरह गल चुका था। मौके पर फॉरेंसिक टीम को बुलाया गया और सभी जरूरी साक्ष्य जुटाए गए। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।
पुलिस किन सवालों के जवाब तलाश रही है?
पुलिस फिलहाल इस मामले के हर पहलू की गहन जांच कर रही है। अधिकारियों की कोशिश है कि यह पता लगाया जाए कि क्या हत्या में रूबी के अलावा कोई और भी शामिल था। साथ ही बाथरूम का गड्ढा कब और किसने खोदा, शव को दफनाने में किसी की मदद ली गई या नहीं और हत्या की असली वजह क्या थी, इसकी भी जांच की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि वारदात पहले से सुनियोजित थी या अचानक हुई।
फोन कॉल बना पूरे केस की सबसे अहम कड़ी
जांच में अब 18 मई की सुबह किया गया फोन कॉल सबसे महत्वपूर्ण सबूत माना जा रहा है। रूबी ने जिस समय अपने जेठ से कहा था कि “घर के अंदर मत आना”, उस समय किसी को अंदाजा नहीं था कि घर के बाथरूम के नीचे उसके पति का शव दफन है। अगर उसी समय इस बात पर संदेह होता और घर की जांच की जाती, तो संभव है कि यह मामला 45 दिन पहले ही सामने आ जाता।






