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India Push Back Policy: असम सरकार की ‘पुश बैक’ नीति पर बढ़ी चर्चा, 193 घोषित विदेशी भेजे गए बांग्लादेश
Current image: India Push Back Policy: असम सरकार की 'पुश बैक' नीति पर बढ़ी चर्चा

India Push Back Policy: असम में अवैध प्रवासियों के खिलाफ चल रही कार्रवाई एक बार फिर से चर्चा का विषय बन गई है। बताया जा रहा है मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने विधानसभा के मानसून सत्र में बताया कि 1 जुलाई 2024 से 30 जून 2026 के बीच राज्य से 1,679 लोगों को बांग्लादेश वापस भेजा गया है। इनमें 193 ऐसे लोग भी शामिल हैं जिन्हें विदेशी न्यायाधिकरण (Foreigners Tribunal) ने विदेशी नागरिक घोषित किया था।

मुख्यमंत्री ने यह जानकारी एआईयूडीएफ विधायक बदरुद्दीन अजमल के सवाल के जवाब में दी। इस खुलासे के बाद असम सरकार की ‘पुश बैक’ (Push Back) नीति और विदेशी नागरिकों के खिलाफ अपनाई जा रही कार्रवाई पर देशभर में चर्चा तेज हो गई है।

क्या है ‘पुश बैक’ नीति?

‘पुश बैक’ नीति के तहत ऐसे लोगों को, जिन्हें विदेशी घोषित किया जा चुका है, बिना लंबी औपचारिक कूटनीतिक प्रक्रिया का इंतजार किए सीधे अंतरराष्ट्रीय सीमा पार भेजा जाता है। जिसमें असम सरकार ने मई 2025 से इस प्रक्रिया को लागू करना शुरू किया। वहीं सामान्य तौर पर किसी व्यक्ति को दूसरे देश भेजने से पहले दोनों देशों के बीच उसकी नागरिकता की पुष्टि की जाती है। इसके बाद ही औपचारिक डिपोर्टेशन (Deportation) की प्रक्रिया पूरी होती है। लेकिन ‘पुश बैक’ नीति में यह प्रक्रिया अलग तरीके से अपनाई जा रही है, जिससे कार्रवाई को तेज किया जा सके।

दो साल में कितने लोगों को भेजा गया बांग्लादेश?

असम सरकार के अनुसार, 2 साल में कुल 1,679 लोगों को बांग्लादेश भेजा गया है। इन लोगों को अलग-अलग श्रेणियों में शामिल किया गया है, जिनमें—

  • औपचारिक डिपोर्टेशन (Formal Deportation)
  • सेंट बैक (Sent Back)
  • एक्सपल्शन (Expulsion)

193 घोषित विदेशियों में 67 पर एक्सपल्शन एक्ट के तहत कार्रवाई

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का कहना है कि विदेशी घोषित किए गए 193 लोगों में से 67 लोगों पर ‘इमिग्रेंट्स (एक्सपल्शन फ्रॉम असम) एक्ट, 1950’ के तहत कार्रवाई की गई। इस कानून के जरिए उन्हें सीमा पार भेजा गया।

राज्य सरकार ने इस कानून को सितंबर 2025 में दोबारा प्रभावी बनाया और इसके लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) भी तैयार की। इस कानून के अनुसार विदेशी घोषित व्यक्ति को 24 घंटे के भीतर भारत छोड़ने का निर्देश दिया जाता है। निर्धारित समय के बाद प्रशासन उसे अंतरराष्ट्रीय सीमा तक पहुंचाकर आगे की कार्रवाई करता है।

क्या है इमिग्रेंट्स (एक्सपल्शन फ्रॉम असम) एक्ट, 1950?

आपकी जानकारी के लिए बता दें यह कानून असम में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों के निष्कासन के लिए बनाया गया था। जिसमें लंबे समय तक यह कानून प्रभावी रूप से लागू नहीं था, लेकिन असम सरकार ने इसे फिर से लागू करने का फैसला लिया है।

ऐसे में सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य राज्य में अवैध घुसपैठ पर रोक लगाना और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करना है। हालांकि इस कानून को लेकर कानूनी और मानवाधिकार से जुड़े कई सवाल भी उठते रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

इसी बीच विदेशी न्यायाधिकरणों की कार्यप्रणाली को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। सोमवार को जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने गुवाहाटी हाई कोर्ट के 27 फैसलों को रद्द कर दिया। इन मामलों में विदेशी न्यायाधिकरण ने संबंधित लोगों को एक्स-पार्टी (Ex-Parte) यानी उनकी अनुपस्थिति में विदेशी घोषित कर दिया था और हाई कोर्ट ने उन आदेशों को बरकरार रखा था।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नागरिकता का प्रश्न बेहद संवैधानिक और संवेदनशील मुद्दा है। इसलिए किसी भी व्यक्ति को विदेशी घोषित करने की प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और कानून के अनुरूप होनी चाहिए। कोर्ट ने सभी 27 मामलों को दोबारा सुनवाई के लिए संबंधित विदेशी न्यायाधिकरणों के पास भेज दिया।

विदेशी घोषित व्यक्ति के पास क्या अधिकार होते हैं?

कानून के अनुसार यदि किसी भी व्यक्ति को विदेशी न्यायाधिकरण विदेशी घोषित करता है तो उसके पास न्यायिक राहत लेने का अधिकार होता है। वह हैं-

  • गुवाहाटी हाई कोर्ट में अपील कर सकता है।
  • इसके बाद जरूरत पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटा सकता है।

किन जिलों से सबसे ज्यादा लोग भेजे गए?

असम सरकार के आंकड़ों के अनुसार 67 लोगों को एक्सपल्शन प्रक्रिया के तहत बांग्लादेश भेजा गया। इनमें सबसे अधिक लोग नागांव जिले से थे।

जिलावार आंकड़े इस प्रकार हैं—

  • नागांव – 19
  • कोकराझार – 16
  • बारपेटा – 7
  • चिरांग – 4
  • कार्बी आंगलोंग – 4
  • दीमा हसाओ – 3
  • होजाई – 3
  • कामरूप (ग्रामीण) – 2
  • धुबरी – 2
  • बोंगाईगांव – 1
  • तामुलपुर – 1
  • उदलगुरी – 1
  • बिस्वनाथ – 1
  • धेमाजी – 1
  • लखीमपुर – 1
  • हैलाकांडी – 1

राजनीतिक बहस भी तेज

असम सरकार की इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक दलों के बीच भी बहस तेज हो गई है। सरकार इसे अवैध घुसपैठ रोकने और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा कदम बता रही है, जबकि विपक्ष का कहना है कि नागरिकता से जुड़े मामलों में हर व्यक्ति को निष्पक्ष सुनवाई और कानूनी अधिकार मिलना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट की हालिया टिप्पणी के बाद यह मुद्दा और अधिक महत्वपूर्ण हो गया है, क्योंकि अदालत ने भी स्पष्ट किया है कि नागरिकता का निर्धारण पूरी कानूनी प्रक्रिया और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुसार होना चाहिए।

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Author

  • Aparna Panwar

    अपर्णा पवांर, एक हिंदी कंटेंट राइटर है, जिन्होंने डिजिटल मीडिया में अपनी लेखनी से पहचान बनाई। आज वे “Khaber Aaj Ki” में हिंदी कंटेंट राइटर के पद पर काम करते हुए पत्रकारिता को अपना जुनून मानती हैं। उनके विचारों में खबरें केवल सूचनाएं नहीं, बल्कि लोगों तक सच्चाई पहुँचाने का माध्यम हैं।

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