
MP Rajya Sabha Election: मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। दरअसल पार्टी की राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द कर दिया गया है। जिसके बाद रिटर्निंग ऑफिसर ने नामांकन पत्र की जांच के दौरान पाया कि उम्मीदवार ने अपने हलफनामे में एक लंबित न्यायिक मामले की जानकारी नहीं दी थी। इसी आधार पर उनका नामांकन खारिज कर दिया गया है।
जानकारी के लिए बता दें की नामांकन रद्द होने के बाद राज्य की तीसरी राज्यसभा सीट पर मुकाबला लगभग समाप्त हो गया है और भाजपा उम्मीदवार महेश केवट का निर्विरोध निर्वाचित होना तय माना जा रहा है। इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है।
भाजपा की आपत्ति के बाद हुई कार्रवाई
भाजपा नेताओं कैलाश विजयवर्गीय और राकेश सिंह ने मीनाक्षी नटराजन की उम्मीदवारी पर आपत्ति दर्ज कराई थी। जिसमें उनका आरोप था कि कांग्रेस उम्मीदवार ने अपने चुनावी हलफनामे में हैदराबाद की अदालत में लंबित एक मामले की जानकारी छिपाई है।
आपत्ति मिलने के बाद रिटर्निंग ऑफिसर ने मीनाक्षी नटराजन को अपना पक्ष रखने के लिए समय दिया था। मंगलवार शाम तक उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया था। हालांकि, अधिकारियों ने उनके जवाब को संतोषजनक नहीं माना और अंततः उनका नामांकन रद्द कर दिया गया।
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार यह मामला वर्ष 2025 में दर्ज एक शिकायत से जुड़ा हुआ है। हैदराबाद की मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट अदालत में ए. श्रीलता नाम की महिला ने मीनाक्षी नटराजन और अन्य लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी।
इस शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए थे। अदालत ने मामले की प्रारंभिक सुनवाई के बाद मीनाक्षी नटराजन को नोटिस जारी कर जवाब देने के लिए कहा था।
मीनाक्षी नटराजन की ओर से उनके वकील ने अदालत में जवाब दाखिल किया और आरोपों को राजनीतिक प्रेरित बताते हुए मामले को खारिज करने की मांग की थी। हालांकि अदालत ने शिकायत को खारिज नहीं किया और मामले की सुनवाई जारी रखने का फैसला लिया। यही मामला वर्तमान में विचाराधीन बताया जा रहा है।
हलफनामे में जानकारी नहीं देने पर विवाद
राज्यसभा चुनाव के लिए दाखिल किए गए नामांकन पत्र के साथ उम्मीदवारों को शपथपत्र देना होता है, जिसमें उनके खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों की जानकारी देना अनिवार्य होता है।
ऐसे में भाजपा का आरोप है कि मीनाक्षी नटराजन ने इस मामले का उल्लेख अपने हलफनामे में नहीं किया। इसी आधार पर उनके खिलाफ आपत्ति दर्ज कराई गई थी। रिटर्निंग ऑफिसर ने जांच के बाद जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के प्रावधानों का हवाला देते हुए उनका नामांकन रद्द करने का निर्णय लिया।
कांग्रेस ने फैसले को बताया गलत
कांग्रेस ने नामांकन रद्द करने के फैसले को पूरी तरह गलत और राजनीतिक प्रेरित बताया है। जिसमें पार्टी नेताओं का कहना है कि मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है और न ही उनके खिलाफ कोई एफआईआर (FIR) हुई है।
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि उम्मीदवार को केवल अदालत का नोटिस मिला था। कांग्रेस का तर्क है कि चुनावी हलफनामे में केवल उन्हीं मामलों की जानकारी देना जरूरी होता है जिनमें विधिवत आपराधिक मामला दर्ज हो। ऐसे में पार्टी का कहना है कि किसी शिकायत या नोटिस को आपराधिक मामला नहीं माना जा सकता। इसलिए जानकारी छिपाने का आरोप कानूनी और तथ्यात्मक रूप से गलत है।
विवेक तन्खा ने भी उठाए सवाल
कांग्रेस के राज्यसभा सांसद और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील विवेक तन्खा ने भी इस फैसले पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई है।
तन्खा के अनुसार, अदालत से केवल एक नोटिस जारी किया गया था, जिसमें पूछा गया था कि उनके और अन्य लोगों के खिलाफ 10 करोड़ रुपये के मुआवजे की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए। इस नोटिस का जवाब भी उनके वकील द्वारा अदालत में दिया जा चुका है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामले को आपराधिक केस मानना उचित नहीं है और इस आधार पर नामांकन रद्द किया जाना विवादास्पद है।
राज्यसभा चुनाव में बदला पूरा समीकरण
मध्य प्रदेश में 18 जून को राज्यसभा की तीन सीटों के लिए मतदान होना है। 230 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के पास 164 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के पास 63 विधायक हैं। हालांकि कांग्रेस के दो विधायक मतदान के लिए पात्र नहीं हैं, जिसके चलते उसकी प्रभावी संख्या 61 रह जाती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना था कि तीसरी सीट के लिए मुकाबला दिलचस्प हो सकता है और क्रॉस वोटिंग की संभावना भी बनी हुई थी, लेकिन मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद तीसरी सीट पर चुनावी मुकाबला लगभग खत्म हो गया है। इससे भाजपा को सीधा फायदा मिला है और उसके उम्मीदवार महेश केवट के निर्विरोध चुने जाने का रास्ता साफ हो गया है।
कांग्रेस विधायकों का कर्नाटक दौरा भी रुका
राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस अपने विधायकों को एकजुट रखने की रणनीति पर काम कर रही थी। पार्टी ने कथित तौर पर विधायकों को चार्टर्ड विमान से कर्नाटक भेजने की योजना बनाई थी ताकि किसी प्रकार की टूट-फूट या क्रॉस वोटिंग की संभावना को रोका जा सके।
सूत्रों के अनुसार कांग्रेस विधायकों को लेकर जाने वाला विशेष विमान रनवे पर तैयार भी था। लेकिन जैसे ही मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने की खबर आई, पार्टी ने अपना कार्यक्रम रद्द कर दिया। इसके बाद विधायकों को वापस भोपाल लौटने के निर्देश दे दिए गए।
भाजपा को मिला बड़ा राजनीतिक लाभ
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस घटनाक्रम से भाजपा को बड़ा फायदा मिला है। जहां पहले तीसरी सीट पर मुकाबले की संभावना थी, वहीं अब भाजपा बिना किसी चुनौती के तीनों सीटों पर जीत दर्ज करने की स्थिति में दिखाई दे रही है। दूसरी ओर कांग्रेस इस फैसले के खिलाफ कानूनी विकल्पों पर विचार कर सकती है। पार्टी नेताओं का कहना है कि वे मामले की पूरी कानूनी समीक्षा करेंगे और आगे की रणनीति तय करेंगे।
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