
Sunetra Pawar Baramati election 2026: महाराष्ट्र की राजनीति में बारामती विधानसभा सीट पर उपचुनाव के नतीजे लगभग तय दिखाई दे रहे हैं। यहां की राजनीतिक और भावनात्मक स्थिति को देखते हुए उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार निर्विरोध विजेता बन सकती हैं। कांग्रेस समेत कुल 23 उम्मीदवारों ने अपने नामांकन वापस ले लिए हैं, जिससे इस सीट पर चुनाव का मुकाबला अब प्रतीकात्मक हो गया है।
कांग्रेस ने किया उम्मीदवार का नाम वापस
बारामती उपचुनाव में कांग्रेस ने अपने उम्मीदवार आकाश विश्वनाथ मोरे का नामांकन वापस लेने का निर्णय लिया है। आकाश मोरे की उम्मीदवारी की शुरुआत में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मंजूरी दी थी और महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने 5 अप्रैल 2026 को इसकी ऑफिशियल घोषणा की थी। हालांकि पार्टी ने अब रणनीतिक कारणों से अपने उम्मीदवार को चुनाव से हटाने का निर्णय किया। इस कदम के पीछे कांग्रेस की यह सोच है कि पवार परिवार के प्रभाव और क्षेत्रीय सहानुभूति को देखते हुए सीधे मुकाबले में जीत पाना मुश्किल हो सकता है।
पवार परिवार का गढ़ बारामती
बारामती विधानसभा सीट को पवार परिवार का पारंपरिक गढ़ माना जाता है। पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने इस सीट से लगातार आठ बार जीत हासिल की थी। 2024 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने 24 उम्मीदवारों के सामने चुनाव लड़ा और 1 लाख 81 हजार से अधिक मतों के अंतर से जीत हासिल की थी। इस चुनाव में उनके भतीजे योगेंद्र पवार भी शामिल थे। अजित पवार के निधन के बाद इस उपचुनाव में क्षेत्र में सहानुभूति की लहर साफ देखी जा रही है। इसी भावनात्मक माहौल और राजनीतिक विरासत के कारण उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार को पवार परिवार और पार्टी ने उम्मीदवार बनाया।
राजनीतिक समीकरणों में बदलाव
शुरुआत में सुनेत्रा पवार को निर्विरोध जीत दिलाने की अपील की जा रही थी। लेकिन जब कांग्रेस ने उम्मीदवार उतारा, तो मुकाबला हाई‑प्रोफाइल बन गया। हालांकि अब कांग्रेस ने पीछे हटकर राजनीतिक स्थिति एक बार फिर पवार परिवार के पक्ष में कर दी है। इसके बाद, अन्य छोटे दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों के नाम भी वापस होने लगे, जिससे सुनेत्रा पवार की जीत की राह लगभग साफ हो गई है।
उपचुनाव की तारीख और प्रक्रिया
बारामती के साथ-साथ राहुरी विधानसभा सीट पर भी उपचुनाव होने वाले थे। मतदान की तिथि 23 अप्रैल 2026 तय थी, जबकि मतगणना 4 मई 2026 को होनी थी। लेकिन 23 उम्मीदवारों ने नामांकन वापस लेने के बाद बारामती में मतदान की प्रक्रिया अब अप्रासंगिक हो गई है।
भावनात्मक और राजनीतिक महत्व
बारामती सीट का राजनीतिक महत्व महाराष्ट्र में काफी अधिक है। पवार परिवार ने दशकों तक यहां मजबूत पकड़ बनाई है। अजित पवार के निधन के बाद इस क्षेत्र में भावनात्मक समर्थन उच्च स्तर पर है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि सुनेत्रा पवार की जीत सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि भावनात्मक कारणों से भी सुनिश्चित है। इलाके में उनके समर्थन में सहानुभूति की लहर है, जिसे कांग्रेस समेत अन्य दलों ने भी देखा और इसलिए उन्होंने नामांकन वापस लिया।
कांग्रेस की रणनीति
कांग्रेस ने बारामती उपचुनाव से अपने उम्मीदवार को हटाकर स्पष्ट संदेश दिया है कि वे पवार परिवार के मजबूत समर्थन का मुकाबला नहीं करना चाहते। यह रणनीति आगामी विधानसभा चुनाव और स्थानीय समीकरणों को ध्यान में रखकर बनाई गई है। वहीं, कांग्रेस के इस फैसले से पार्टी को राजनीतिक नुकसान से बचाया गया है और भविष्य के लिए रणनीतिक अवसर बनाए गए हैं।
सुनेत्रा पवार की राजनीतिक यात्रा
सुनेत्रा पवार महाराष्ट्र की राजनीति में उपमुख्यमंत्री के रूप में सक्रिय हैं। उन्होंने महिलाओं और क्षेत्रीय विकास के मुद्दों पर काम किया है। बारामती उपचुनाव में उनकी उम्मीदवारी से यह संदेश भी गया कि पवार परिवार का राजनीतिक प्रभाव अभी भी मजबूत है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस उपचुनाव में उनका निर्विरोध चुना जाना केवल राजनीतिक विरासत की जीत नहीं, बल्कि क्षेत्रीय भावनाओं और जनता के समर्थन का भी प्रमाण है।
विपक्ष की स्थिति
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का बारामती में मजबूत खड़ा होना मुश्किल प्रतीत हो रहा है। कई उम्मीदवारों ने नाम वापस लेने के बाद यह मान लिया है कि सुनेत्रा पवार की जीत सुनिश्चित है। जिससे यह भी देखा गया कि छोटे दल और निर्दलीय उम्मीदवार भी राजनीतिक और भावनात्मक दबाव के कारण पीछे हट रहे हैं। इस तरह, बारामती उपचुनाव में प्रतिस्पर्धा लगभग समाप्त हो गई है।
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