
EV Toll Tax Rules: देश में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की मांग तेजी से बढ़ती जा रही है। बता दें कि पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों और पर्यावरण को बचाने की सोच के बीच लोग इलेक्ट्रिक कार और स्कूटर खरीदने की तरफ रुख कर रहे हैं। वहीं, इसी बीच एक सवाल अक्सर सुनने को मिलता है। क्या इलेक्ट्रिक वाहन पर टोल टैक्स नहीं लगता। जिसमें कई लोग मानते हैं कि EV लेने के बाद टोल प्लाजा पर पैसे नहीं देने पड़ते, लेकिन क्या यह सच है। आइए जानते हैं यहां पूरी जानकारी।
क्या पूरे भारत में EV पर टोल फ्री है
जानकारी के लिए बता दें कि देश में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए टोल टैक्स पूरी तरह माफ नहीं है। वहीं, अगर आपके पास इलेक्ट्रिक कार है, तो इसका मतलब यह नहीं कि आप हर नेशनल हाईवे पर बिना टोल दिए निकल सकते हैं। नेशनल हाईवे पर टोल वसूली का जिम्मा National Highways Authority of India (NHAI) के पास होता है। NHAI के नियमों के अनुसार, इलेक्ट्रिक वाहन भी सामान्य वाहनों की तरह टोल देने के दायरे में आते हैं। यानी नेशनल हाईवे पर EV के लिए अलग से पूरी छूट का कोई सार्वभौमिक नियम लागू नहीं है।
महाराष्ट्र में मिलती है खास राहत
बता दें कि देश में फिलहाल महाराष्ट्र ऐसा राज्य है, जहां इलेक्ट्रिक वाहनों को टोल में खास छूट दी गई है। साथ ही,राज्य सरकार ने EV को बढ़ावा देने के लिए एक अलग नीति लागू की है।वहीं, इस नीति के तहत राज्य के अंदर चलने वाले कई इलेक्ट्रिक वाहनों को टोल प्लाजा पर राहत दी जाती है।
- प्राइवेट इलेक्ट्रिक कारें
- पैसेंजर वाहन
- कुछ पब्लिक ट्रांसपोर्ट वाहन
- राज्य परिवहन की इलेक्ट्रिक बसें
क्या पूरी तरह टोल माफ है
दरअसल, महाराष्ट्र में भी हर इलेक्ट्रिक वाहन को पूरी छूट नहीं मिलती है। इलेक्ट्रिक मालवाहक वाहन (Goods Carrier) को टोल देना ही पड़ता है। इसके अलावा, जो हाईवे सीधे NHAI के अंतर्गत आते हैं, वहां इलेक्ट्रिक वाहनों को आमतौर पर 50 फीसदी तक की छूट मिलती है। यानी टोल पूरी तरह माफ नहीं होता, बल्कि आधा देना पड़ता है। इससे यात्रा थोड़ी सस्ती जरूर हो जाती है, लेकिन पूरी तरह मुफ्त नहीं।
बाकी राज्यों में क्या नियम हैं
जानकारी के मुताबिक, देश के कई राज्यों में फिलहाल इलेक्ट्रिक वाहनों को टोल टैक्स में कोई विशेष छूट नहीं दी गई है। चाहे आप उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा, मध्य प्रदेश या किसी और राज्य में हों। टोल प्लाजा पर EV को भी पेट्रोल-डीजल गाड़ियों की तरह सामान्य दर से शुल्क देना होता है। जिसमें कई राज्यों ने EV खरीद पर सब्सिडी, रोड टैक्स में छूट और रजिस्ट्रेशन फीस में राहत दी है, लेकिन टोल टैक्स के मामले में अभी ज्यादातर जगहों पर कोई अलग नियम लागू नहीं किया गया है।
EV को बढ़ावा देने के लिए सरकार क्या कर रही है
केंद्र और राज्य सरकारें इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठा रही हैं। इनमें शामिल हैं:
- वाहन खरीद पर सब्सिडी
- कम GST दर
- रोड टैक्स में छूट
- चार्जिंग स्टेशन की संख्या बढ़ाना
- रजिस्ट्रेशन फीस में राहत। वहीं, इन सुविधाओं की वजह से EV खरीदना पहले की तुलना में आसान और सस्ता हुआ है। लेकिन टोल टैक्स को लेकर जो धारणा बनी हुई है, वह पूरी तरह सही नहीं है।
टोल नियम कैसे तय होते हैं
टोल टैक्स का निर्धारण सड़क निर्माण की लागत, रखरखाव खर्च और ट्रैफिक कैटेगरी के आधार पर किया जाता है। जिसमें NHAI और राज्य सरकारें मिलकर दरें तय करती हैं। हर वाहन को उसकी श्रेणी के अनुसार टोल देना होता है।जैसे कार, बस, ट्रक, हल्के कमर्शियल वाहन आदि। साथ ही, इलेक्ट्रिक वाहन भी अभी तक इसी श्रेणी में गिने जाते हैं। यानी उनकी ईंधन तकनीक के आधार पर टोल में स्वचालित छूट नहीं मिलती।
क्या भविष्य में पूरे देश में छूट मिल सकती है
एक्सपर्ट्स का कहना है कि जैसे-जैसे देश में EV की संख्या बढ़ेगी, वैसे-वैसे सरकारें और प्रोत्साहन दे सकती हैं। पर्यावरण संरक्षण और कार्बन उत्सर्जन कम करने के लक्ष्य को देखते हुए आने वाले समय में टोल में और रियायत दी जा सकती है। हालांकि अभी तक केंद्र सरकार की ओर से पूरे देश में EV को टोल फ्री करने का कोई आधिकारिक फैसला नहीं लिया गया है।
EV खरीदने से पहले किन बातों का रखें ध्यान
बता दें कि अगर आप इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने का सोच रहे हैं, तो केवल टोल फ्री की अफवाह के आधार पर फैसला न लें। जिसमें इन बातों पर जरूर विचार करें।
- आपके राज्य में EV नीति क्या है।
- क्या आपके रोजाना के रूट पर कोई टोल प्लाजा है।
- क्या उस टोल प्लाजा पर EV के लिए कोई विशेष छूट है।
- क्या वह हाईवे राज्य के अंतर्गत है या NHAI के अधीन।
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Aparna Panwar
अपर्णा पवांर, एक हिंदी कंटेंट राइटर है, जिन्होंने डिजिटल मीडिया में अपनी लेखनी से पहचान बनाई। आज वे “Khaber Aaj Ki” में हिंदी कंटेंट राइटर के पद पर काम करते हुए पत्रकारिता को अपना जुनून मानती हैं। उनके विचारों में खबरें केवल सूचनाएं नहीं, बल्कि लोगों तक सच्चाई पहुँचाने का माध्यम हैं।






