
Modi Phone Call Oman Kuwait: मिडिल ईस्ट में ईरान-इजरायल तनाव के बीच भारत ने सक्रिय कूटनीतिक पहल शुरू कर दी है। बता दें कि क्षेत्र में बढ़ते तनाव और सुरक्षा हालात को देखते हुए प्रधानमंत्री Narendra Modi ने ओमान और कुवैत के शीर्ष नेतृत्व से फोन पर बात की है। वहीं,इस दौरान खाड़ी देशों में रह रहे लाखों भारतीयों की सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और आपसी सहयोग पर विस्तार से चर्चा हुई।
जानकारी के लिए बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी ने पहले Haitham bin Tariq से टेलीफोन पर बातचीत की है। इसके बाद उन्होंने कुवैत के क्राउन प्रिंस Sheikh Sabah Al-Khalid Al-Hamad Al-Mubarak Al-Sabah से भी संपर्क किया। जिसके बाद दोनों वार्ताओं में क्षेत्रीय शांति और भारतीय समुदाय की सुरक्षा प्रमुख मुद्दा रहे।
ओमान के सुल्तान से बातचीत सुरक्षा और संप्रभुता पर जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने ओमान के सुल्तान से बातचीत के दौरान हाल ही के हमलों पर चिंता व्यक्त की और ओमान की संप्रभुता एवं क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने की बात दोहराई है। जिसमें उन्होंने कहा कि भारत शांति, संवाद और कूटनीति के माध्यम से समस्याओं के समाधान में विश्वास रखता है। साथ ही, ओमान में करीब 7 लाख भारतीय प्रवासी रहते हैं। ये लोग निर्माण, स्वास्थ्य, शिक्षा, तेल-गैस और सेवा क्षेत्र में काम करते हैं। ऐसे में मौजूदा हालात को देखते हुए भारत सरकार उनकी सुरक्षा को लेकर सतर्क है। बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने भारतीय समुदाय की भलाई और आपात स्थिति में सहयोग के तंत्र पर भी चर्चा की। वहीं, भारत और ओमान के बीच लंबे समय से मजबूत व्यापारिक और सामरिक संबंध रहे हैं। ऐसे समय में यह बातचीत दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत करने का संकेत माना जा रहा है।
कुवैत के क्राउन प्रिंस से संवाद भारतीयों की सुरक्षा प्राथमिकता
दरअसल, ओमान के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने कुवैत के क्राउन प्रिंस से भी फोन पर चर्चा की है। कुवैत में लगभग 10 लाख भारतीय कामगार रहते हैं, जो वहां की अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभाते हैं। वहीं, प्रधानमंत्री ने कुवैत में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा, कल्याण और आवश्यक सहायता सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा। दोनों नेताओं ने मौजूदा हालात पर चिंता जताते हुए क्षेत्रीय शांति की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही, कुवैत भारत के लिए ऊर्जा आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण स्रोत भी है।अब ऐसे में मौजूदा तनाव का असर तेल बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। इस पहल को भारत की सक्रिय और संतुलित विदेश नीति का हिस्सा माना जा रहा है।
खाड़ी देशों में भारतीयों की संख्या और चिंता
ईरान-इजरायल तनाव के कारण पूरे मिडिल ईस्ट में अस्थिरता का माहौल बना हुआ है। जिसमें ओमान और कुवैत जैसे देशों में बड़ी संख्या में भारतीय काम करते हैं। उनके परिवार भारत में रहते हैं और मौजूदा हालात को लेकर चिंतित हैं। विदेश मंत्रालय पहले ही बयान जारी कर भारतीयों से सतर्क रहने और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील कर चुका है। भारतीय दूतावास भी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और जरूरत पड़ने पर हेल्पलाइन सेवाएं सक्रिय रखने की तैयारी है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारत की यह पहल समय पर उठाया गया कदम है, जिससे प्रवासी भारतीयों को भरोसा मिलेगा कि सरकार उनके साथ खड़ी है।
भारत की संतुलित कूटनीति
भारत के ईरान और इजरायल दोनों देशों के साथ अच्छे संबंध रहे हैं।अब ऐसे में भारत की नीति हमेशा संतुलन और संवाद की रही है। मौजूदा हालात में प्रधानमंत्री मोदी की यह कूटनीतिक पहल दर्शाती है कि भारत क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए सक्रिय भूमिका निभाना चाहता है। भारत ने हमेशा कहा है कि किसी भी विवाद का समाधान बातचीत और शांतिपूर्ण तरीके से होना चाहिए। खाड़ी क्षेत्र में भारत के रणनीतिक, आर्थिक और ऊर्जा हित जुड़े हुए हैं। इसलिए वहां की स्थिरता भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
क्या सुरक्षित हैं खाड़ी देशों में भारतीय
बता दें कि फिलहाल ओमान और कुवैत में हालात काबू में बताए जा रहे हैं। वहां के प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की है। भारतीय दूतावास लगातार स्थानीय सरकारों के संपर्क में हैं। सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि यदि स्थिति बिगड़ती है तो भारतीयों को सुरक्षित निकालने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे। पहले भी भारत ने संकट की घड़ी में ‘ऑपरेशन गंगा’ और ‘ऑपरेशन कावेरी’ जैसे अभियानों के जरिए अपने नागरिकों को सुरक्षित वापस लाने का सफल अनुभव दिखाया है।
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