
Chirag Paswan News: राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी NDA में शामिल दलों के बीच दलित आरक्षण के मुद्दे को लेकर मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने हिंदुस्तान आवाम मोर्चा (HAM) के अध्यक्ष जीतनराम मांझी और उनके बेटे संतोष सुमन के रुख पर सवाल उठाए हैं। चिराग पासवान ने कहा है कि अगर मांझी और उनके बेटे आरक्षण व्यवस्था में सब-कैटगराइजेशन चाहते हैं, तो उन्हें पहले अपने मंत्री पद से इस्तीफा देना चाहिए।
वहीं, चिराग पासवान का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब बिहार की राजनीति में आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर चर्चा का केंद्र बन गया है। जीतनराम मांझी केंद्र की मोदी सरकार में मंत्री हैं, जबकि उनके बेटे संतोष सुमन बिहार सरकार में मंत्री हैं। ऐसे में दोनों नेताओं की ओर से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के आरक्षण में सब-कैटगराइजेशन की मांग रखी गई है। यहां पढ़ें पूरी खबर
चिराग पासवान ने क्या कहा?
दरअसल आज शनिवार के दिन पत्रकारों से बातचीत के दौरान चिराग पासवान ने आरक्षण को लेकर अपना रुख स्पष्ट किया। जिसमें उन्होंने कहा कि अनुसूचित वर्ग की सभी जातियां एकजुट हैं और इसी एकता की वजह से उनका अधिकार मजबूत है। चिराग ने चिंता जताई कि अगर दलित समाज के भीतर विभाजन बढ़ता है, तो इसका असर आरक्षण की व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
चिराग पासवान ने कहा कि उनकी पार्टी दलित आरक्षण में किसी तरह के सब-कोटा के पक्ष में नहीं है। उन्होंने कहा कि पहले भी दलित और महादलित के नाम पर समाज को बांटने की कोशिशों का उन्होंने विरोध किया है।
LJP (रामविलास) प्रमुख ने आरक्षण को संविधान से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रावधान बताते हुए कहा कि अनुसूचित जातियों को सामाजिक भेदभाव और छुआछूत जैसी परिस्थितियों को ध्यान में रखकर आरक्षण दिया गया था। उनके मुताबिक, आरक्षण का मूल आधार केवल आर्थिक स्थिति नहीं है।
मांझी और संतोष सुमन से इस्तीफा क्यों मांगा?
चिराग पासवान ने अपने बयान में जीतनराम मांझी और संतोष सुमन दोनों को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि अगर दोनों नेता आरक्षण व्यवस्था में सब-कैटगराइजेशन की मांग कर रहे हैं, तो उन्हें पहले मंत्री पद छोड़ना चाहिए।
चिराग ने कहा कि अगर मांझी और उनके बेटे को लगता है कि मौजूदा आरक्षण व्यवस्था में बदलाव होना चाहिए, तो वे मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद इस मुद्दे पर सदन में चर्चा कर सकते हैं। चिराग के इस बयान से NDA के भीतर आरक्षण को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।
संतोष सुमन ने क्या मांग रखी थी?
दरअसल, विवाद की शुरुआत संतोष सुमन के उस बयान से हुई, जिसमें उन्होंने SC-ST आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा और उसमें सब-कैटगराइजेशन की जरूरत की बात कही थी।
संतोष सुमन का तर्क है कि अनुसूचित जाति और जनजाति के भीतर कई ऐसे समुदाय हैं, जिन्हें आरक्षण का समान लाभ नहीं मिल पा रहा है। उनका कहना है कि यह देखना जरूरी है कि आरक्षण का लाभ किन समुदायों तक कितना पहुंच रहा है। जिनमें कुछ जातियां सामाजिक और शैक्षणिक रूप से अभी भी बेहद पिछड़ी हुई हैं और उन्हें आरक्षण का पर्याप्त लाभ नहीं मिल पाया है। इसलिए आरक्षण के लाभ को लेकर मूल्यांकन किया जाना चाहिए।
क्या होता है सब-कैटगराइजेशन?
सब-कैटगराइजेशन का मतलब आरक्षित वर्ग के भीतर अलग-अलग समूहों या जातियों के लिए आरक्षण के लाभ को अलग तरीके से निर्धारित करना है। इसके समर्थकों का तर्क है कि आरक्षण का फायदा कुछ अपेक्षाकृत मजबूत समूहों तक अधिक पहुंच गया है, जबकि कई अत्यंत पिछड़े समुदाय इससे पर्याप्त लाभ नहीं ले पाए हैं।
वहीं, इसका विरोध करने वालों का कहना है कि अनुसूचित जाति और जनजाति के आरक्षण को अलग-अलग हिस्सों में बांटने से इन वर्गों की एकजुटता प्रभावित हो सकती है। चिराग पासवान भी इसी आधार पर सब-कैटगराइजेशन का विरोध कर रहे हैं।
NDA के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह विवाद?
चिराग पासवान, जीतनराम मांझी और संतोष सुमन तीनों ही NDA से जुड़े हुए हैं। ऐसे में आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दे पर सहयोगी दलों के नेताओं के बीच सार्वजनिक तौर पर मतभेद सामने आना राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।
एक तरफ चिराग पासवान दलित आरक्षण में किसी तरह के सब-कोटा का विरोध कर रहे हैं, वहीं HAM की ओर से आरक्षण के लाभ का समान वितरण सुनिश्चित करने के लिए सब-कैटगराइजेशन की मांग उठाई जा रही है। फिलहाल यह साफ है कि आरक्षण के मुद्दे पर दोनों पक्षों के विचार अलग-अलग हैं। आने वाले दिनों में यह विवाद बिहार की राजनीति के साथ-साथ NDA के भीतर भी चर्चा का बड़ा मुद्दा बन सकता है।
चिराग का संदेश साफ
चिराग पासवान ने अपने बयान के जरिए यह साफ कर दिया है कि दलित आरक्षण में सब-कैटगराइजेशन को लेकर उनकी पार्टी का रुख फिलहाल विरोध का है। उन्होंने संविधान और अनुसूचित वर्ग की एकजुटता का हवाला देते हुए जीतनराम मांझी और संतोष सुमन से मंत्री पद छोड़ने की मांग कर दी है।
ऐसे में अब देखना होगा कि इस बयान पर जीतनराम मांझी और संतोष सुमन की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है और क्या यह विवाद आगे NDA के भीतर बड़े राजनीतिक मतभेद का रूप लेता है।
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अपर्णा पवांर, एक हिंदी कंटेंट राइटर है, जिन्होंने डिजिटल मीडिया में अपनी लेखनी से पहचान बनाई। आज वे “Khaber Aaj Ki” में हिंदी कंटेंट राइटर के पद पर काम करते हुए पत्रकारिता को अपना जुनून मानती हैं। उनके विचारों में खबरें केवल सूचनाएं नहीं, बल्कि लोगों तक सच्चाई पहुँचाने का माध्यम हैं।






