
Taslima Nasrin: बांग्लादेश की चर्चित लेखिका तसलीमा नसरीन ने एक बार फिर से अपने बेबाक बयानों से राजनीतिक और सामाजिक बहस को तेज कर दिया है। बता दें आज रविवार को कोलकाता में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने बांग्लादेश की मौजूदा स्थिति, महिलाओं की सुरक्षा, हिंदू समुदाय की हालत, मदरसों की शिक्षा व्यवस्था और भारत-बांग्लादेश संबंधों पर खुलकर अपनी राय रखी। जिसमें उन्होंने आरोप लगाया है कि बांग्लादेश में कुछ मदरसों के माध्यम से कट्टरपंथ को बढ़ावा दिया जा रहा है और बच्चों को आधुनिक शिक्षा से दूर रखा जा रहा है। तसलीमा ने कहा कि देश के भविष्य के लिए धर्म आधारित शिक्षा की बजाय वैज्ञानिक और सेक्युलर शिक्षा को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
‘मदरसों में जिहादी तैयार किए जा रहे हैं’
जानकारी के लिए बता दें प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान तसलीमा नसरीन ने कहा कि बांग्लादेश में मदरसों की व्यवस्था पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। जिसमें उनका कहना था कि कई मदरसों में बच्चों को आधुनिक शिक्षा देने के बजाय धार्मिक कट्टरता की ओर मोड़ा जा रहा है। साथ ही उन्होंने कहा कि यदि देश को आगे बढ़ाना है तो बच्चों को गुणवत्तापूर्ण और वैज्ञानिक शिक्षा उपलब्ध करानी होगी। उनके अनुसार, शिक्षा व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जो समाज में समानता, वैज्ञानिक सोच और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करे।
युनूस सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
तसलीमा नसरीन ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार का भी नाम लेते हुए आरोप लगाया है कि वर्तमान शासन में अल्पसंख्यकों और महिलाओं की स्थिति बेहतर नहीं हुई है। उन्होंने दावा किया कि हिंदू समुदाय पर हमलों और महिलाओं के खिलाफ अत्याचार की घटनाएं बढ़ी हैं। उन्होंने कहा कि पहले भी समस्याएं थीं, लेकिन अब हालात और चिंताजनक दिखाई दे रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों पर बांग्लादेश सरकार की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
महिलाओं के अधिकारों को लेकर उठाई आवाज
दरअसल लेखिका ने कहा कि बांग्लादेश में महिलाओं को अभी भी बराबरी के अधिकार पूरी तरह नहीं मिल पाए हैं। ऐसे में उनका मानना है कि कानून सभी नागरिकों के लिए समान होना चाहिए, तभी महिलाओं और अल्पसंख्यकों के साथ होने वाले भेदभाव को कम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि किसी भी आधुनिक लोकतांत्रिक देश में महिलाओं और पुरुषों के अधिकार समान होने चाहिए और धर्म के आधार पर अलग-अलग कानून समाज में असमानता पैदा करते हैं।
समान नागरिक संहिता (UCC) की वकालत
तसलीमा नसरीन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में समान नागरिक संहिता (UCC) का समर्थन करते हुए कहा कि किसी भी सभ्य समाज के लिए एक समान कानून जरूरी है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग समुदायों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानून होने से महिलाओं के अधिकार प्रभावित होते हैं। उनका मानना है कि समान कानून लागू होने से सभी नागरिकों को बराबरी का अधिकार मिलेगा और न्याय व्यवस्था अधिक मजबूत होगी।
जय गोस्वामी विवाद पर भी रखी अपनी बात
कोलकाता के एक सांस्कृतिक कार्यक्रम में कवि जय गोस्वामी के साथ हुए विवाद का भी तसलीमा नसरीन ने जिक्र किया। जिसमें उन्होंने कहा कि जिस तरह कार्यक्रम के दौरान विरोध हुआ, उससे उन्हें व्यक्तिगत रूप से दुख पहुंचा।
तसलीमा ने कहा कि उन्होंने ही जय गोस्वामी को मंच पर बुलाया था और उनका अपमान केवल एक व्यक्ति का नहीं बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का भी अपमान है। जिसके बाद उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपनी राय रखने का अधिकार है, चाहे उसके राजनीतिक विचार किसी से अलग क्यों न हों। उन्होंने जल्द ही जय गोस्वामी से उनके घर जाकर मुलाकात करने की बात भी कही।
पश्चिम बंगाल सरकार को कहा धन्यवाद
प्रेस कॉन्फ्रेंस में तसलीमा नसरीन ने पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री का आभार भी व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन किसी भी व्यक्ति को सुरक्षा और सम्मान मिलना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि समाज में संवाद और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को हमेशा महत्व दिया जाएगा।
भारत-बांग्लादेश संबंधों पर क्या बोलीं?
भारत और बांग्लादेश के रिश्तों पर बोलते हुए तसलीमा नसरीन ने कहा कि दोनों देशों के संबंध हमेशा मजबूत और मित्रतापूर्ण बने रहने चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्ष 1971 में बांग्लादेश की स्वतंत्रता के दौरान भारत ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इसलिए दोनों देशों के बीच सहयोग और विश्वास कायम रहना जरूरी है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि कुछ ऐसे तत्व हैं जो दोनों देशों के रिश्तों में दूरी पैदा करने की कोशिश करते हैं, लेकिन दोनों देशों के लोगों के हित में बेहतर संबंध बने रहना आवश्यक है।
छात्र आंदोलन पर भी जताई चिंता
तसलीमा नसरीन ने बांग्लादेश में हुए हालिया छात्र आंदोलन पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान लोगों की भावनाओं का इस्तेमाल किया गया और इसके परिणाम उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे। उनका कहना था कि वर्तमान परिस्थितियों में कट्टरपंथी ताकतों का प्रभाव बढ़ता दिखाई दे रहा है, जो किसी भी लोकतांत्रिक समाज के लिए चिंता का विषय है।
धर्म और राजनीति को अलग रखने की अपील
तसलीमा नसरीन ने कहा कि किसी भी देश की प्रगति के लिए धर्म और राजनीति को अलग रखना जरूरी है। उनका मानना है कि सरकार का मुख्य उद्देश्य शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और नागरिकों की सुरक्षा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि शिक्षा व्यवस्था मजबूत होगी तो समाज में कट्टरता और हिंसा की संभावना स्वतः कम होगी।
बयान से फिर शुरू हो सकती है नई बहस
तसलीमा नसरीन अपने बेबाक विचारों के लिए लंबे समय से चर्चा में रही हैं। इस बार भी बांग्लादेश, मदरसों, महिलाओं के अधिकार और समान नागरिक संहिता को लेकर दिए गए उनके बयान राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर नई बहस को जन्म दे सकते हैं। हालांकि, उनके आरोप व्यक्तिगत विचार हैं और इन पर संबंधित पक्षों की अलग राय हो सकती है। ऐसे मामलों में आधिकारिक जांच, सरकारी प्रतिक्रिया और तथ्य सामने आने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित होगा।
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अपर्णा पवांर, एक हिंदी कंटेंट राइटर है, जिन्होंने डिजिटल मीडिया में अपनी लेखनी से पहचान बनाई। आज वे “Khaber Aaj Ki” में हिंदी कंटेंट राइटर के पद पर काम करते हुए पत्रकारिता को अपना जुनून मानती हैं। उनके विचारों में खबरें केवल सूचनाएं नहीं, बल्कि लोगों तक सच्चाई पहुँचाने का माध्यम हैं।






