
One Nation One Election: संसद के मॉनसून सत्र के बीच ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ (एक देश, एक चुनाव) को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। लंबे समय से यह चर्चा चल रही थी कि केंद्र सरकार इस सत्र में इस महत्वपूर्ण संविधान संशोधन विधेयक को संसद में पेश कर सकती है। लेकिन अब साफ हो गया है कि मौजूदा मॉनसून सत्र में यह बिल पेश नहीं किया जाएगा। इस फैसले की सबसे बड़ी वजह यह है कि विधेयक की समीक्षा कर रही संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को अपनी रिपोर्ट तैयार करने के लिए अतिरिक्त समय दिया गया है। अब समिति अपनी रिपोर्ट संसद के शीतकालीन सत्र के अंतिम सप्ताह के पहले दिन तक सौंपेगी। ऐसे में इस विधेयक पर आगे की प्रक्रिया भी उसी के बाद आगे बढ़ेगी।
क्या है ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’?
‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ का मतलब है कि देशभर में लोकसभा और सभी राज्यों की विधानसभा के चुनाव एक साथ कराए जाएं। अभी भारत में अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग समय पर चुनाव होते हैं। इसके कारण लगभग हर साल किसी न किसी राज्य में चुनावी प्रक्रिया चलती रहती है। सरकार का तर्क है कि यदि सभी चुनाव एक साथ होंगे तो चुनावी खर्च कम होगा, प्रशासनिक संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और बार-बार लागू होने वाली आचार संहिता से विकास कार्य प्रभावित नहीं होंगे।
मॉनसून सत्र में क्यों नहीं आएगा बिल?
मॉनसून सत्र शुरू होने से पहले यह अटकलें थीं कि सरकार इस विधेयक को आगे बढ़ा सकती है। लेकिन अब स्पष्ट हो गया है कि ऐसा नहीं होगा। विधेयक पर विचार कर रही संयुक्त संसदीय समिति अभी विभिन्न राज्यों, विशेषज्ञों, संवैधानिक संस्थाओं और अन्य पक्षों से राय ले रही है। समिति का मानना है कि यह एक बड़ा संवैधानिक बदलाव है, इसलिए सभी पहलुओं का गहराई से अध्ययन करना जरूरी है। इसी कारण समिति ने अधिक समय की आवश्यकता जताई और संसद ने उसका कार्यकाल बढ़ाने को मंजूरी दे दी।
JPC को मिला अतिरिक्त समय
‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ विधेयक की समीक्षा के लिए गठित संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की अध्यक्षता भाजपा सांसद पी. पी. चौधरी कर रहे हैं। पहले उम्मीद थी कि समिति मॉनसून सत्र के दौरान अपनी रिपोर्ट पेश कर देगी। लेकिन अब उसका कार्यकाल बढ़ा दिया गया है। नई समय-सीमा के अनुसार समिति अपनी रिपोर्ट शीतकालीन सत्र के अंतिम सप्ताह के पहले दिन तक संसद में सौंपेगी। इसका मतलब है कि मौजूदा सत्र में रिपोर्ट भी नहीं आएगी और विधेयक पर आगे की चर्चा भी फिलहाल टल गई है।
किन विधेयकों की हो रही है समीक्षा?
JPC केवल एक विधेयक नहीं बल्कि दो महत्वपूर्ण प्रस्तावों की समीक्षा कर रही है।
इनमें शामिल हैं:-
- संविधान (129वां संशोधन) विधेयक, 2024
- केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2024
इनका उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनावों को एक साथ कराने के लिए आवश्यक संवैधानिक और कानूनी बदलाव करना है।
सरकार की रणनीति क्या है?
सरकार का कहना है कि इतने बड़े संवैधानिक बदलाव को जल्दबाजी में लागू नहीं किया जा सकता। इसलिए पहले समिति की रिपोर्ट का इंतजार किया जाएगा। रिपोर्ट मिलने के बाद उसकी सिफारिशों का अध्ययन होगा और जरूरत पड़ने पर विधेयक में संशोधन किए जा सकते हैं। इसके बाद ही सरकार संसद में बिल पेश करने और उसे पारित कराने की दिशा में आगे बढ़ेगी। माना जा रहा है कि सरकार इस मुद्दे पर व्यापक राजनीतिक सहमति बनाने की भी कोशिश कर रही है।
विपक्ष क्यों कर रहा है विरोध?
‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ को लेकर विपक्षी दलों ने कई सवाल उठाए हैं। विपक्ष का कहना है कि भारत एक संघीय व्यवस्था वाला देश है, जहां राज्यों की अपनी राजनीतिक परिस्थितियां होती हैं। यदि सभी चुनाव एक साथ होंगे तो क्षेत्रीय मुद्दे राष्ट्रीय चुनावी माहौल में दब सकते हैं। कुछ दलों का यह भी मानना है कि यदि किसी राज्य की सरकार बीच कार्यकाल में गिर जाती है तो उस स्थिति में चुनाव कराने की प्रक्रिया जटिल हो सकती है। इसी वजह से विपक्ष इस प्रस्ताव पर विस्तृत चर्चा और व्यापक विचार-विमर्श की मांग कर रहा है।
सरकार के पक्ष में क्या तर्क हैं?
केंद्र सरकार का कहना है कि एक साथ चुनाव कराने से कई फायदे होंगे। बार-बार चुनाव होने से सरकारी मशीनरी का बड़ा हिस्सा चुनावी कार्यों में लग जाता है। इसके अलावा सुरक्षा बलों की भी लगातार तैनाती करनी पड़ती है। सरकार का दावा है कि यदि एक साथ चुनाव होंगे तो सरकारी खर्च कम होगा, प्रशासनिक कामकाज में रुकावट कम आएगी और विकास परियोजनाओं पर अधिक ध्यान दिया जा सकेगा।
आगे क्या होगी प्रक्रिया?
अब पूरी प्रक्रिया JPC की रिपोर्ट पर निर्भर करेगी। समिति अपनी रिपोर्ट शीतकालीन सत्र में सौंपेगी। इसके बाद सरकार रिपोर्ट का अध्ययन करेगी और यदि आवश्यक हुआ तो विधेयक में संशोधन किए जाएंगे। फिर इस संविधान संशोधन विधेयक को संसद के दोनों सदनों में पेश किया जाएगा। चूंकि यह संविधान संशोधन से जुड़ा प्रस्ताव है, इसलिए इसे पारित कराने के लिए विशेष बहुमत की आवश्यकता होगी। कुछ प्रावधानों के लिए राज्यों की मंजूरी भी जरूरी हो सकती है।
क्यों अहम माना जा रहा है यह प्रस्ताव?
‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ पिछले कई वर्षों से देश की राजनीति का प्रमुख मुद्दा रहा है। इस पर विशेषज्ञों, राजनीतिक दलों, चुनाव आयोग और कानून के जानकारों के बीच लगातार चर्चा होती रही है। इसे चुनाव सुधारों की दिशा में बड़ा कदम माना जाता है, लेकिन इसके संवैधानिक और राजनीतिक प्रभावों को लेकर अलग-अलग राय भी सामने आती रही है। यही वजह है कि सरकार भी इस प्रस्ताव को जल्दबाजी में आगे बढ़ाने के बजाय व्यापक विचार-विमर्श के बाद लागू करना चाहती है।
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