
Sonam Wangchuk News: सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल प्रशासन को पत्र लिखकर खुद को डिस्चार्ज करने की मांग की है। जिसमें उनका कहना है कि उनकी तबीयत अब पहले से बेहतर है और वह संसद मार्च में शामिल होना चाहते हैं। इस बीच अस्पताल प्रशासन का कहना है कि उनकी मेडिकल निगरानी अभी भी जरूरी है और डॉक्टर लगातार उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
आपकी जानकारी के लिए बता दें की यह मामला उस समय और चर्चा में आ गया जब सोनम वांगचुक ने अस्पताल को भेजी गई अपनी चिट्ठी और उससे जुड़ी जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर साझा की। जिसमें उन्होंने दावा किया कि यदि वे किसी तरह की हिरासत में नहीं हैं, तो उन्हें अस्पताल से छुट्टी क्यों नहीं दी जा रही है।
अस्पताल को लिखी चिट्ठी में क्या कहा?
सोनम वांगचुक ने अस्पताल प्रशासन को लिखे पत्र में कहा कि उनकी सेहत अब काफी बेहतर है। जिसमें उन्होंने लिखा कि उनके सभी स्वास्थ्य पैरामीटर सामान्य हैं और अब उन्हें अस्पताल में भर्ती रखने की जरूरत नहीं है। साथ ही उन्होंने पत्र में अनुरोध किया कि उन्हें जल्द से जल्द अस्पताल से डिस्चार्ज किया जाए ताकि वे प्रस्तावित संसद मार्च में शामिल हो सकें। उनका कहना है कि यह मार्च उनके आंदोलन का महत्वपूर्ण हिस्सा है और वह इसमें अपनी उपस्थिति दर्ज कराना चाहते हैं।
सोशल मीडिया पर भी उठाए सवाल
सोनम वांगचुक ने अपनी चिट्ठी को एक्स पर साझा करते हुए समर्थकों के नाम एक संदेश भी लिखा है। जिसमें उन्होंने कहा कि वह सभी लोगों से मिलने के लिए उत्सुक हैं और अस्पताल से बाहर आने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने अपने पोस्ट में सवाल उठाया कि यदि अस्पताल प्रशासन यह कह रहा है कि वे किसी प्रकार की हिरासत में नहीं हैं, तो फिर उन्हें अस्पताल से जाने की अनुमति क्यों नहीं दी जा रही। उन्होंने कहा कि उन पर लगी पाबंदियों को लेकर उन्हें स्पष्ट जानकारी नहीं मिल रही है।
अस्पताल ने जारी किया स्वास्थ्य अपडेट
सफदरजंग अस्पताल और संबंधित चिकित्सा टीम की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, सोनम वांगचुक की हालत फिलहाल ठीक है। उनके ब्लड प्रेशर, पल्स और अन्य जरूरी स्वास्थ्य संकेतकों पर लगातार नजर रखी जा रही है।
डॉक्टरों का कहना है कि लंबे समय से भूख हड़ताल पर रहने की वजह से उनके शरीर में कई तरह के बदलाव हुए हैं। ब्लड टेस्ट की रिपोर्ट को देखते हुए उन्हें अभी कुछ समय और निगरानी में रखना जरूरी है।
अस्पताल के अनुसार, मल्टीडिसिप्लिनरी मेडिकल टीम लगातार उनकी स्थिति की समीक्षा कर रही है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत इलाज उपलब्ध कराया जा सके।
दिल्ली पुलिस अस्पताल क्यों लेकर गई थी?
सोनम वांगचुक पिछले कई दिनों से दिल्ली के जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल कर रहे थे। उनका कहना था कि वे परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और पेपर लीक जैसे मामलों के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं।
भूख हड़ताल के 21वें दिन दिल्ली पुलिस उन्हें जंतर-मंतर से हटाकर सफदरजंग अस्पताल ले गई थी। पुलिस का कहना था कि उनकी स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराना जरूरी था। हालांकि, इस कार्रवाई के बाद उनके समर्थकों ने विरोध जताया और आरोप लगाया कि उन्हें जबरन अस्पताल ले जाया गया।
28 जून से जारी है भूख हड़ताल
सोनम वांगचुक 28 जून से लगातार भूख हड़ताल पर हैं। उनका आंदोलन कई प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं के खिलाफ चल रहा है।
आंदोलन में शामिल लोगों की मांग है कि परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाया जाए और जिन लोगों की लापरवाही से पेपर लीक जैसी घटनाएं हुई हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। प्रदर्शनकारी शिक्षा व्यवस्था में सुधार और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की भी मांग कर रहे हैं।
संसद मार्च को लेकर बढ़ी हलचल
सोनम वांगचुक ने अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद संसद मार्च में शामिल होने की इच्छा जताई है। उनका मानना है कि यह मार्च आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण कदम होगा। हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि अस्पताल प्रशासन उन्हें कब तक डिस्चार्ज करेगा। डॉक्टरों की राय और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर ही अंतिम फैसला लिया जाएगा। यदि डॉक्टर यह मानते हैं कि उनकी सेहत पूरी तरह सुरक्षित है, तभी उन्हें अस्पताल से छुट्टी दी जा सकती है।
समर्थकों की बढ़ी चिंता
सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल लंबी होने के कारण उनके समर्थकों में चिंता भी बढ़ गई है। सोशल मीडिया पर लगातार लोग उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं। बता दें की कई सामाजिक संगठनों ने भी अपील की है कि उनकी स्वास्थ्य सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए और आंदोलन से जुड़े मामलों का समाधान बातचीत के जरिए निकाला जाए।
अब आगे क्या होगा?
ऐसे में अब सबकी नजर अस्पताल प्रशासन के फैसले पर टिकी हुई है। यदि मेडिकल टीम उन्हें पूरी तरह स्वस्थ मानती है तो उन्हें डिस्चार्ज किया जा सकता है। दूसरी ओर, यदि डॉक्टरों को स्वास्थ्य संबंधी कोई जोखिम दिखाई देता है तो उन्हें कुछ और दिन अस्पताल में निगरानी में रखा जा सकता है।
सोनम वांगचुक का संसद मार्च में शामिल होना फिलहाल अस्पताल के निर्णय और उनकी मेडिकल स्थिति पर निर्भर करेगा। इस पूरे घटनाक्रम पर राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की भी नजर बनी हुई है।






