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सोशल मीडिया पोस्ट पर बढ़ा विवाद, प्रधानमंत्री मोदी पर कथित अभद्र टिप्पणी पड़ी भारी, युवती के खिलाफ FIR दर्ज
Noida Police has registered Zero FIR against Ruchika Singh
Noida Police has registered Zero FIR against Ruchika Singh

PM Modi Remark Row: दिल्ली के जंतर-मंतर पर हाल ही में हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित अभद्र टिप्पणी का मामला अब कानूनी मोड़ ले चुका है। इस मामले में नोएडा पुलिस ने एक युवती के खिलाफ ज़ीरो एफआईआर (Zero FIR) दर्ज की है। चूंकि कथित घटना दिल्ली में हुई थी, इसलिए मामले को आगे की जांच के लिए दिल्ली पुलिस को स्थानांतरित कर दिया गया है। इस पूरे घटनाक्रम ने सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक नई बहस छेड़ दी है। एक ओर शिकायतकर्ता का कहना है कि प्रधानमंत्री जैसे संवैधानिक पद के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया, वहीं दूसरी ओर यह मामला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कानून की सीमाओं को लेकर भी चर्चा का विषय बन गया है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और अभी किसी अदालत ने आरोपों पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है।

क्या है पूरा मामला?

बताया जा रहा है कि हाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर पर परीक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर छात्रों का प्रदर्शन आयोजित किया गया था। प्रदर्शन के दौरान एक युवती का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें उस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित तौर पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया गया। वीडियो सामने आने के बाद इस पर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं आने लगीं। इसके बाद गाजियाबाद की रहने वाली अधिवक्ता स्मृति सिंह ने इस संबंध में पुलिस से शिकायत की। शिकायत में आरोप लगाया गया कि वीडियो में प्रधानमंत्री के खिलाफ सार्वजनिक रूप से अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया गया, जिससे संवैधानिक पद की गरिमा प्रभावित हुई और सार्वजनिक शांति भंग होने की आशंका पैदा हुई।

नोएडा पुलिस ने दर्ज की ज़ीरो FIR

शिकायत मिलने के बाद नोएडा के एक्सप्रेसवे थाना पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत ज़ीरो FIR दर्ज की। पुलिस के अनुसार, चूंकि कथित घटना दिल्ली में हुई थी, इसलिए स्थानीय स्तर पर केवल प्रारंभिक कार्रवाई की गई और मामला आगे की जांच के लिए दिल्ली पुलिस को भेज दिया गया। एक्सप्रेसवे थाना प्रभारी ने पुष्टि की कि कानूनी प्रक्रिया के तहत केस संबंधित क्षेत्राधिकार वाली पुलिस को स्थानांतरित कर दिया गया है। अब आगे की कार्रवाई दिल्ली पुलिस करेगी।

ज़ीरो FIR क्या होती है?

ज़ीरो FIR ऐसी व्यवस्था है जिसके तहत कोई भी पुलिस थाना किसी भी संज्ञेय अपराध की शिकायत दर्ज कर सकता है, भले ही घटना उसके अधिकार क्षेत्र में न हुई हो।इसके बाद मामला संबंधित क्षेत्र के पुलिस स्टेशन को भेज दिया जाता है, जहां विस्तृत जांच की जाती है। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शिकायत दर्ज कराने में क्षेत्राधिकार की वजह से देरी न हो और शुरुआती कानूनी प्रक्रिया तुरंत शुरू हो सके।

शिकायत में क्या कहा गया?

शिकायतकर्ता का आरोप है कि 23 जुलाई को उनके संज्ञान में सोशल मीडिया के माध्यम से एक वीडियो आया, जिसमें जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान एक युवती प्रधानमंत्री के खिलाफ कथित रूप से अभद्र भाषा का इस्तेमाल करती दिखाई दे रही है। शिकायत के अनुसार, इस प्रकार की टिप्पणी न केवल प्रधानमंत्री के पद की गरिमा को प्रभावित करती है, बल्कि समाज में तनाव और सार्वजनिक शांति भंग होने की आशंका भी पैदा कर सकती है। इन्हीं आरोपों के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज किया है। हालांकि, इन आरोपों की सत्यता की जांच अभी जारी है।

युवती की पहचान को लेकर क्या जानकारी सामने आई?

पुलिस के अनुसार, शिकायत में युवती की पहचान नोएडा के सेक्टर-168 स्थित एक आवासीय सोसाइटी में रहने वाली रुचिका सिंह के रूप में की गई है। पुलिस का कहना है कि वह मूल रूप से हरियाणा के फरीदाबाद जिले के ऊंचागांव क्षेत्र की रहने वाली बताई गई है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक वह ब्यूटी एवं सैलून से जुड़ा व्यवसाय करती हैं और हाल ही में नोएडा में फ्लैट खरीदा था। हालांकि, पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच जारी है और सभी तथ्यों का सत्यापन किया जाएगा।

दिल्ली पुलिस करेगी आगे की जांच

अब यह पूरा मामला दिल्ली पुलिस के पास पहुंच चुका है। अधिकारियों के अनुसार सबसे पहले ज़ीरो FIR की सामग्री और शिकायत का परीक्षण किया जाएगा। इसके बाद उपलब्ध वीडियो, डिजिटल साक्ष्य, गवाहों के बयान और अन्य तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। दिल्ली पुलिस ने अभी तक इस मामले में किसी गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। जांच के बाद ही आगे का निर्णय लिया जाएगा।

सोशल मीडिया पर तेज हुई बहस

यह मामला सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने संवैधानिक पदों के प्रति सम्मान बनाए रखने की बात कही, जबकि कुछ ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और आपराधिक कार्रवाई के दायरे को लेकर सवाल उठाए। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और अदालत की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही निकलता है। इसलिए फिलहाल सभी आरोपों को आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

पहले भी सुर्खियों में रहा जंतर-मंतर आंदोलन

हाल के दिनों में जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन को लेकर कई घटनाएं चर्चा में रही हैं। संसद मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुई थीं, जिनके बाद कई एफआईआर दर्ज की गईं और विभिन्न वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए। इसी दौरान सोशल मीडिया पर प्रसारित सामग्री की निगरानी भी बढ़ाई गई थी और पुलिस ने कुछ पोस्ट हटाने के लिए भी कार्रवाई की थी।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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Author

  • Sakshi Raj

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