
Ujjain News: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने आज शुक्रवार को उज्जैन में आयोजित युवा धर्म संसद-2026 को संबोधित किया है। इस दौरान उन्होंने धर्म के अर्थ, उसके महत्व और धर्म व रिलीजन के बीच अंतर को लेकर विस्तार से अपनी बात रखी है।
वहीं, भागवत ने कहा कि धर्म केवल किसी पूजा-पद्धति या धार्मिक पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति के आचरण और जीवन को दिशा देने वाली व्यापक अवधारणा है। उन्होंने कहा कि धर्म हमारे DNA और आचरण में है।
धर्म और रिलीजन को एक मानना सही नहीं- भागवत
मोहन भागवत ने कहा कि आम तौर पर धर्म को अंग्रेजी के ‘Religion’ शब्द के समान माना जाता है, लेकिन दोनों का अर्थ एक नहीं है। उन्होंने कहा कि भारतीय संदर्भ में धर्म की अवधारणा काफी व्यापक है और अंग्रेजी में ऐसा कोई सटीक शब्द नहीं है, जो इसके पूरे अर्थ को व्यक्त कर सके। उनके मुताबिक, ‘रिलीजन’ किसी विशेष मत, पंथ या धार्मिक परंपरा से जुड़ा हो सकता है, जबकि धर्म का संबंध जीवन के व्यापक सिद्धांतों और आचरण से है।
भागवत ने अपने संबोधन में कहा कि रिलीजन शब्द जिस मूल शब्द से आया है, उसका अर्थ बांधने या अनुशासन में रखने से जुड़ा है। इसके विपरीत उन्होंने धर्म को मुक्त करने वाली अवधारणा बताया। उन्होंने कहा कि रिलीजन धर्म नहीं है और धर्म रिलीजन से ऊपर है।
‘धर्म बांधता नहीं, मुक्त करता है’
RSS प्रमुख ने कहा कि धर्म का उद्देश्य व्यक्ति को किसी बंधन में रखना नहीं, बल्कि उसे सही आचरण और जीवन की दिशा समझाना है। उन्होंने धर्म को सत्य, करुणा, पवित्रता और आत्म-अनुशासन जैसे मूल्यों से जोड़ते हुए कहा कि धर्म व्यक्ति के व्यवहार में दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि जब धार्मिक परंपराएं धर्म के मूल सिद्धांतों के अनुरूप चलती हैं, तो उनका उद्देश्य कल्याण और मुक्ति की ओर होता है। वहीं, धर्म से अलग होकर रिलीजन की संकीर्ण व्याख्या सामाजिक या सांप्रदायिक टकराव का कारण बन सकती है। यह बात उन्होंने धर्म और रिलीजन के अंतर को समझाते हुए कही।
‘धर्म हमारे DNA में है’
मोहन भागवत ने कहा कि जीवन में सुख और दुख आते-जाते रहते हैं। परिस्थितियां बदलती रहती हैं, लेकिन धर्म का स्वरूप शाश्वत है। उन्होंने कहा कि धर्म व्यक्ति के जीवन और उसके आचरण में मौजूद रहता है। उन्होंने धर्म को ‘धृ’ शब्द से जोड़ते हुए इसका अर्थ धारण करने वाला बताया। उनके अनुसार, धर्म वह है जो व्यक्ति और समाज को जोड़ता है, बिखरने से रोकता है और उन्नति की दिशा में आगे बढ़ाता है। उन्होंने कहा कि धर्म केवल किसी एक व्यक्ति या समुदाय के लिए नहीं, बल्कि सभी के कल्याण से जुड़ा है।
युवाओं से बोले- सिर्फ सफल नहीं, सार्थक भी बनें
युवा धर्म संसद में भागवत ने युवाओं की भूमिका पर भी बात की। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी धर्म जैसे विषयों पर चर्चा कर रही है, यह महत्वपूर्ण है। उन्होंने युवाओं से जीवन में सफलता के साथ उद्देश्यपूर्ण योगदान पर भी ध्यान देने की बात कही। उन्होंने कहा कि भारत के युवाओं को दुनिया में केवल यशस्वी बनने की कोशिश नहीं करनी चाहिए, बल्कि उनका जीवन सार्थक भी होना चाहिए। उनके मुताबिक, व्यक्ति को बलवान, वैभवशाली, धनवान और बुद्धिमान बनने के साथ अपने कर्तव्यों को भी समझना चाहिए।
करीब 1700 युवाओं ने लिया हिस्सा
उज्जैन में आयोजित युवा धर्म संसद-2026 तीन दिवसीय कार्यक्रम है। इसमें देश के अलग-अलग हिस्सों से करीब 1700 युवा, छात्र, शिक्षक, विद्वान और धर्म से जुड़े लोग शामिल हुए। कार्यक्रम में धर्म, समाज, राष्ट्र और युवाओं की भूमिका जैसे विषयों पर चर्चा और संवाद किया जा रहा है। इसका आयोजन सेवाज्ञ संस्थानम् की ओर से किया जा रहा है। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को भारतीय संस्कृति, धर्म और सामाजिक जिम्मेदारियों से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श का मंच देना है।
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अपर्णा पवांर, एक हिंदी कंटेंट राइटर है, जिन्होंने डिजिटल मीडिया में अपनी लेखनी से पहचान बनाई। आज वे “Khaber Aaj Ki” में हिंदी कंटेंट राइटर के पद पर काम करते हुए पत्रकारिता को अपना जुनून मानती हैं। उनके विचारों में खबरें केवल सूचनाएं नहीं, बल्कि लोगों तक सच्चाई पहुँचाने का माध्यम हैं।






