
Calcutta High Court Mamata Banerjee: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भवानीपुर विधानसभा सीट के चुनाव परिणाम को चुनौती देते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। ममता बनर्जी ने चुनावी याचिका दायर कर भवानीपुर सीट से घोषित परिणामों पर सवाल उठाए हैं और चुनाव से जुड़े रिकॉर्ड तथा इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) को सुरक्षित रखने की मांग की है। यह मामला इसलिए भी राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि भवानीपुर सीट को लंबे समय से ममता बनर्जी का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। लेकिन 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता शुभेंदु अधिकारी ने इस सीट पर जीत दर्ज कर राज्य की राजनीति में बड़ा उलटफेर कर दिया।
भवानीपुर से मिली हार बनी चर्चा का विषय
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने राज्य की राजनीति को पूरी तरह बदल दिया। मतगणना के दौरान सामने आए परिणामों में भवानीपुर सीट पर ममता बनर्जी को हार का सामना करना पड़ा। चुनाव आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को 15,105 वोटों के अंतर से हराया। यह परिणाम केवल एक विधानसभा सीट का नतीजा नहीं था, बल्कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में सत्ता परिवर्तन का संकेत भी बन गया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भवानीपुर में मिली हार ने तृणमूल कांग्रेस के लिए एक बड़ा झटका पैदा किया।
हाईकोर्ट में क्या मांग की गई?
ममता बनर्जी द्वारा दायर याचिका में चुनाव प्रक्रिया से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए गए हैं। याचिका में भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र से संबंधित सभी चुनावी रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग की गई है। इसमें मतदान रजिस्टर, मतगणना से जुड़े दस्तावेज, फॉर्म, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और ईवीएम मशीनें शामिल हैं। ममता बनर्जी का कहना है कि जब तक मामले की सुनवाई पूरी नहीं हो जाती, तब तक इन सभी दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को सील कर सुरक्षित रखा जाए ताकि उनके साथ किसी प्रकार की छेड़छाड़ न हो सके।
रजिस्ट्री पहुंचीं ममता बनर्जी
टीएमसी सूत्रों के अनुसार याचिका दायर करने की प्रक्रिया के दौरान ममता बनर्जी स्वयं हाईकोर्ट की रजिस्ट्री भी पहुंचीं। बताया जा रहा है कि उन्होंने याचिका से जुड़ी औपचारिकताओं को पूरा किया और कानूनी प्रक्रिया की जानकारी ली। इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
शुभेंदु अधिकारी की जीत बनी ऐतिहासिक
भवानीपुर सीट पर मिली जीत शुभेंदु अधिकारी के राजनीतिक करियर की सबसे बड़ी सफलताओं में गिनी जा रही है। शुभेंदु अधिकारी पहले भी बंगाल की राजनीति में मजबूत नेता रहे हैं, लेकिन मुख्यमंत्री पद तक पहुंचने का रास्ता इसी चुनावी जीत के बाद खुला। विधानसभा चुनाव में भाजपा को बहुमत मिलने के बाद शुभेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल के पहले भाजपा मुख्यमंत्री बने। उनकी जीत को भाजपा ने राज्य में “परिवर्तन की राजनीति” का परिणाम बताया था।
दूसरी बार अदालत पहुंचीं ममता
यह पहला मौका नहीं है जब ममता बनर्जी ने चुनाव परिणाम को अदालत में चुनौती दी हो। इससे पहले वर्ष 2021 में नंदीग्राम विधानसभा सीट से मिली हार को लेकर भी उन्होंने चुनाव याचिका दायर की थी। नंदीग्राम में भी उन्हें शुभेंदु अधिकारी ने हराया था। उस चुनाव परिणाम को चुनौती देने वाली याचिका अभी भी न्यायिक प्रक्रिया के तहत विचाराधीन बताई जाती है। अब भवानीपुर मामले के अदालत पहुंचने के बाद एक बार फिर दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक और कानूनी मुकाबला शुरू हो गया है।
टीएमसी के सामने बढ़ी चुनौती
2026 के चुनाव परिणामों के बाद तृणमूल कांग्रेस के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। करीब 15 वर्षों तक पश्चिम बंगाल की सत्ता में रहने के बाद पार्टी को विपक्ष की भूमिका में बैठना पड़ा है। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि पार्टी नेतृत्व अब संगठन को फिर से मजबूत करने और अपने परंपरागत वोट बैंक को बनाए रखने की कोशिश में जुटा है। भवानीपुर जैसी प्रतिष्ठित सीट पर हार ने पार्टी कार्यकर्ताओं के मनोबल को भी प्रभावित किया है।
भाजपा ने क्या कहा?
भाजपा नेताओं का कहना है कि चुनाव पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न हुए थे। पार्टी का दावा है कि जनता ने बदलाव के पक्ष में मतदान किया और इसी कारण भाजपा को ऐतिहासिक जीत मिली। भाजपा नेताओं का यह भी कहना है कि अदालत में दायर याचिका का वे कानूनी तरीके से जवाब देंगे और उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। हालांकि पार्टी की ओर से आधिकारिक कानूनी प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है।
कानूनी विशेषज्ञ क्या मानते हैं?
चुनावी मामलों से जुड़े कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार चुनाव याचिका लोकतांत्रिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। यदि कोई उम्मीदवार चुनाव परिणाम पर सवाल उठाता है तो वह अदालत में याचिका दायर कर सकता है। अदालत पहले मामले की प्रारंभिक सुनवाई करेगी और उसके बाद यह तय करेगी कि याचिका में उठाए गए मुद्दों पर विस्तृत जांच या सुनवाई की आवश्यकता है या नहीं। ऐसे मामलों में चुनावी रिकॉर्ड और ईवीएम सुरक्षित रखने की मांग सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा मानी जाती है।
बंगाल की राजनीति पर पड़ेगा असर?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला केवल एक चुनावी याचिका नहीं है, बल्कि इसका असर राज्य की राजनीति पर भी पड़ सकता है। यदि अदालत इस मामले में सुनवाई आगे बढ़ाती है तो आने वाले महीनों में यह मुद्दा बंगाल की राजनीति में प्रमुख चर्चा का विषय बन सकता है। साथ ही यह मामला भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच जारी राजनीतिक संघर्ष को भी नया आयाम दे सकता है।
जनता की नजर अदालत पर
भवानीपुर सीट पश्चिम बंगाल की सबसे चर्चित विधानसभा सीटों में से एक मानी जाती है। इसी वजह से अब जनता की नजर अदालत की अगली सुनवाई पर टिकी हुई है। राजनीतिक कार्यकर्ताओं, कानूनी विशेषज्ञों और आम लोगों के बीच इस मामले को लेकर लगातार चर्चा हो रही है।
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