
Amit Shah Border Visit: देश की सीमा सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) आने वाले दिनों में कई संवेदनशील सीमावर्ती इलाकों का दौरा करने जा रहे हैं। बताया जा रहा है की राजस्थान से लेकर गुजरात, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल तक गृह मंत्री का यह दौरा सुरक्षा एजेंसियों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। जिसमें पाकिस्तान और बांग्लादेश सीमा पर बढ़ती घुसपैठ, ड्रोन एक्टिविटी, तस्करी और सुरक्षा चुनौतियों के बीच केंद्र सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड में दिखाई दे रही है।
गृह मंत्रालय के अनुसार, अमित शाह 25 मई की यानी आज रात राजस्थान के बीकानेर पहुंचेंगे। इसके बाद 26 मई की सुबह वे बीएसएफ की सीमा चौकी सांचू का दौरा करेंगे। इस दौरान वे सीमा पर तैनात जवानों से मुलाकात करेंगे और उनकी तैयारियों का जायजा लेंगे। गृह मंत्री सीमा सुरक्षा बल के जवानों के लिए कई कल्याणकारी योजनाओं का उद्घाटन भी करेंगे। माना जा रहा है कि सरकार जवानों के मनोबल को मजबूत करने और सीमा क्षेत्रों में सुविधाओं को बेहतर बनाने पर विशेष फोकस कर रही है।
बीकानेर में होगी हाई लेवल सिक्योरिटी मीटिंग
राजस्थान दौरे के दौरान दोपहर 2 बजे बीकानेर में एक हाई लेवल सिक्योरिटी रिव्यू मीटिंग आयोजित की जाएगी। बता दें की इस बैठक में गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, राजस्थान सरकार के प्रतिनिधि, बीएसएफ अधिकारी और सीमावर्ती जिलों के प्रशासनिक अधिकारी शामिल होंगे। बैठक में सीमा सुरक्षा को लेकर कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।
जानकारी के मुताबिक इस बैठक में पाकिस्तान सीमा पर ड्रोन गतिविधियों, हथियार और नशे की तस्करी, घुसपैठ रोकने की रणनीति और बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर फोकस रहेगा। हाल के महीनों में राजस्थान और पंजाब बॉर्डर पर ड्रोन मूवमेंट के कई मामले सामने आए हैं, जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियां लगातार सतर्क हैं।
गुजरात के हरामी नाला क्षेत्र का करेंगे निरीक्षण
गृह मंत्री 29 मई को गुजरात के भुज दौरे पर भी जाएंगे। यहां वे बीएसएफ की सीमा चौकियों का निरीक्षण करेंगे और रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील माने जाने वाले हरामी नाला क्षेत्र का दौरा करेंगे। पाकिस्तान सीमा से सटा यह इलाका सुरक्षा एजेंसियों के लिए हमेशा चुनौती बना रहता है।
हरामी नाला क्षेत्र समुद्री और दलदली इलाकों से घिरा हुआ है, जहां घुसपैठ और अवैध गतिविधियों की आशंका बनी रहती है। यही वजह है कि इस क्षेत्र में बीएसएफ और अन्य सुरक्षा एजेंसियां लगातार निगरानी रखती हैं। अमित शाह का यह दौरा सुरक्षा तैयारियों की समीक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
त्रिपुरा और बंगाल बॉर्डर पर भी फोकस
गृह मंत्री 5 जून को त्रिपुरा के सीमावर्ती क्षेत्रों का दौरा करेंगे। यहां वे बांग्लादेश सीमा से जुड़े सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा करेंगे। त्रिपुरा में अवैध घुसपैठ और सीमा पार तस्करी लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय रही है। इसके बाद जून के मध्य में अमित शाह पश्चिम बंगाल सीमा क्षेत्र का भी दौरा करेंगे। पश्चिम बंगाल में बांग्लादेश सीमा से जुड़े इलाकों में घुसपैठ, पशु तस्करी और नकली नोटों के नेटवर्क को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में गृह मंत्री का दौरा राजनीतिक और सुरक्षा दोनों दृष्टि से अहम माना जा रहा है।
‘जीरो टॉलरेंस पॉलिसी’ पर सरकार का जोर
केंद्र सरकार सीमा सुरक्षा को लेकर ‘ज़ीरो टॉलरेंस पॉलिसी’ के तहत काम कर रही है। सरकार का साफ संदेश है कि देश की सीमाओं की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। यही कारण है कि गृह मंत्री लगातार सीमावर्ती इलाकों का दौरा कर सुरक्षा एजेंसियों को सीधे फीडबैक दे रहे हैं।
सरकार केवल सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने पर ही नहीं, बल्कि सीमा क्षेत्रों में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट पर भी तेजी से काम कर रही है। बॉर्डर रोड, फेंसिंग, आधुनिक निगरानी सिस्टम और हाईटेक ड्रोन मॉनिटरिंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ाया जा रहा है।
जवानों के मनोबल को मजबूत करने की कोशिश
अमित शाह के इन दौरों का एक बड़ा उद्देश्य सीमा पर तैनात जवानों का मनोबल बढ़ाना भी माना जा रहा है। बीएसएफ और अन्य सुरक्षा बलों के जवान कठिन परिस्थितियों में देश की सीमाओं की रक्षा करते हैं। ऐसे में सरकार उनके लिए बेहतर सुविधाएं, आवास, मेडिकल सपोर्ट और तकनीकी संसाधन उपलब्ध कराने पर जोर दे रही है।
बीएसएफ जवानों के लिए शुरू की जा रही कल्याणकारी योजनाओं को भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। सरकार चाहती है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात जवानों को हर संभव सुविधा मिले ताकि वे पूरी मजबूती के साथ अपनी जिम्मेदारी निभा सकें।
राजनीतिक और रणनीतिक रूप से अहम दौरा
राजनीतिक एक्सपर्ट्स का कहना है कि अमित शाह के लगातार सीमा दौरों के जरिए केंद्र सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा को अपनी सबसे बड़ी प्राथमिकता के रूप में पेश करना चाहती है। आने वाले समय में सीमा सुरक्षा और अवैध घुसपैठ जैसे मुद्दे राजनीतिक रूप से भी अहम रहने वाले हैं।
मोदी सरकार पहले ही साफ कर चुकी है कि राष्ट्रीय सुरक्षा, सीमा प्रबंधन और आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई उसकी प्राथमिकताओं में शामिल हैं। ऐसे में गृह मंत्री के ये दौरे सुरक्षा एजेंसियों के लिए दिशा तय करने वाले साबित हो सकते हैं।
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