Skip to main content Scroll Top
Shiv Sena UBT: शिवसेना यूटीबी को बड़ा झटका! सांसद नागेश पाटील आष्टीकर शिंदे गुट में शामिल, बताई पार्टी छोड़ने की वजह
शिवसेना सांसद नागेश पाटील आष्टीकर ने उद्धव ठाकरे का साथ छोड़कर एकनाथ शिंदे की शिवसेना जॉइन की
शिवसेना सांसद नागेश पाटील आष्टीकर ने उद्धव ठाकरे का साथ छोड़कर एकनाथ शिंदे की शिवसेना जॉइन की

Shiv Sena UBT: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी हेरफेर देखने को मिल रहा है। दरअसल, शिवसेना (UBT) के हिंगोली लोकसभा सांसद नागेश पाटील आष्टीकर ने पार्टी को अलविदा कह दिया है और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का दामन थाम लिया है। उनका यह फैसला महाराष्ट्र की राजनीति (Politics of Maharashtra) में बड़ा झटका माना जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब राज्य में ‘ऑपरेशन टाइगर’ (Operation Tiger) को लेकर चर्चाएं तेज हैं।

जानकारी के लिए बता दें कि इस बात की आधिकारिक पुष्टि खुद रविवार को आष्टीकर ने की है। इस दौरान उन्होंने कहा है कि उनका यह कदम किसी व्यक्तिगत नाराजगी या राजनीतिक महत्वाकांक्षा का परिणाम नहीं है, बल्कि अपने संसदीय क्षेत्र के विकास और जनता की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए उठाया गया है।

उद्धव ठाकरे से कोई नाराजगी नहीं

नागेश पाटील आष्टीकर ने पार्टी छोड़ने के बाद साफ शब्दों में कहा कि उनकी उद्धव ठाकरे से कोई व्यक्तिगत नाराजगी नहीं है। उन्होंने कहा कि वे आज भी उद्धव ठाकरे का सम्मान करते हैं, लेकिन हाल के दिनों में पार्टी के कुछ नेताओं द्वारा अपनाई गई भाषा और रवैये ने उन्हें निराश किया।

वहीं, आष्टीकर ने कहा कि पार्टी प्रवक्ता संजय राउत सहित कुछ नेताओं द्वारा बागी सांसदों के खिलाफ लगातार अपमानजनक टिप्पणियां की जा रही थीं। इससे पार्टी के भीतर संवाद और सम्मान का माहौल खत्म होता नजर आया। उन्होंने कहा, “मैंने कोई नई विचारधारा नहीं अपनाई है। मैं सिर्फ एक शिवसेना से दूसरी शिवसेना में गया हूं। मतभेद हो सकते हैं, लेकिन भाषा की मर्यादा बनाए रखना जरूरी है।”

‘ऑपरेशन टाइगर’ के बीच लिया बड़ा फैसला

महाराष्ट्र में पिछले कुछ दिनों से ‘ऑपरेशन टाइगर’ की चर्चा जोरों पर थी। माना जा रहा था कि शिवसेना (UBT) के कई नेता और सांसद पार्टी छोड़ सकते हैं। इसी बीच नागेश पाटील आष्टीकर का शिंदे गुट में शामिल होना इन अटकलों को और मजबूत कर गया है।

आष्टीकर ने सोशल मीडिया पर जारी वीडियो संदेश में बताया कि 18 जून तक उन्होंने और उनके कुछ साथी सांसदों ने पार्टी छोड़ने का कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया था। लेकिन इसके बाद पार्टी नेतृत्व की ओर से आई तीखी प्रतिक्रियाओं और बयानबाजी ने स्थिति बदल दी। उनका कहना है कि पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं द्वारा सार्वजनिक मंचों पर जिस तरह की टिप्पणियां की गईं, उससे उन्हें महसूस हुआ कि अब पार्टी में सम्मानजनक तरीके से काम करना मुश्किल हो गया है।

बयानबाजी बनी बड़ा कारण

नागेश पाटील आष्टीकर ने दावा किया कि उनके खिलाफ दिए गए बयानों ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया। उन्होंने कहा कि नेताओं की भाषा और व्यवहार ने यह संकेत दे दिया था कि पार्टी में उनकी भूमिका और योगदान को महत्व नहीं दिया जा रहा है।

उन्होंने कहा, “गुरुवार के बाद जिस तरह की प्रतिक्रिया सामने आई, उससे हमें महसूस हुआ कि अब इस पार्टी में बने रहने का कोई अर्थ नहीं रह गया है। परिस्थितियां ऐसी बन गई थीं कि हमारे पास दूसरा रास्ता नहीं बचा था।” उनके इस बयान को राजनीतिक गलियारों में काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि यह पार्टी के अंदरूनी मतभेदों की ओर भी इशारा करता है।

विकास कार्यों के लिए फंड नहीं मिलने की शिकायत

अपने फैसले के पीछे सबसे बड़ी वजह बताते हुए सांसद ने कहा कि विपक्ष में रहने के कारण उनके संसदीय क्षेत्र के विकास कार्य प्रभावित हो रहे थे। उन्होंने कहा कि जनता ने उन्हें बड़ी उम्मीदों के साथ संसद भेजा था, लेकिन पर्याप्त सरकारी सहयोग और फंड नहीं मिलने से विकास योजनाएं आगे नहीं बढ़ पा रही थीं।

आष्टीकर ने कहा कि पिछले दो वर्षों में उन्होंने अपने क्षेत्र के लिए कई बार फंड और परियोजनाओं की मांग की, लेकिन विपक्षी सांसद होने के कारण उन्हें अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। उन्होंने कहा कि सांसद निधि के रूप में मिलने वाले 5 करोड़ रुपये बड़े स्तर के विकास कार्यों के लिए पर्याप्त नहीं हैं। क्षेत्र की सड़कें, सिंचाई, शिक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी परियोजनाओं के लिए अतिरिक्त संसाधनों की जरूरत होती है।

जनता के हित में लिया फैसला

सांसद का कहना है कि उन्होंने यह फैसला अपने राजनीतिक भविष्य के लिए नहीं, बल्कि जनता के हितों को ध्यान में रखकर लिया है। उनका मानना है कि सत्ता पक्ष के साथ रहने पर वे अपने क्षेत्र के लिए अधिक विकास कार्य करा सकेंगे और लोगों की समस्याओं का समाधान तेजी से कर पाएंगे।

उन्होंने कहा कि जनता ने उन्हें विकास के लिए चुना है और उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी क्षेत्र की प्रगति सुनिश्चित करना है। इसी उद्देश्य से उन्होंने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने का निर्णय लिया।

महाराष्ट्र की राजनीति में बढ़ी हलचल

नागेश पाटील आष्टीकर के इस कदम के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल और बढ़ गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में शिवसेना (UBT) को और झटके लग सकते हैं। वहीं शिंदे गुट इस घटनाक्रम को अपनी राजनीतिक मजबूती के रूप में देख रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि क्या अन्य सांसद और नेता भी आष्टीकर की राह पर चलेंगे या शिवसेना (UBT) नेतृत्व इस नुकसान की भरपाई करने में सफल होगा। फिलहाल, महाराष्ट्र की सियासत में यह घटनाक्रम चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है।

ये भी पढ़ें: बिना टिकट ट्रेन यात्रा पर रेलवे सख्त! जुर्माना हुआ दोगुना या होगी जेल, पढ़ें ट्रेन के नए नियम

Author

  • Aparna Panwar

    अपर्णा पवांर, एक हिंदी कंटेंट राइटर है, जिन्होंने डिजिटल मीडिया में अपनी लेखनी से पहचान बनाई। आज वे “Khaber Aaj Ki” में हिंदी कंटेंट राइटर के पद पर काम करते हुए पत्रकारिता को अपना जुनून मानती हैं। उनके विचारों में खबरें केवल सूचनाएं नहीं, बल्कि लोगों तक सच्चाई पहुँचाने का माध्यम हैं।

Related Posts

लेटेस्ट ➤

Advertising Banner
305x250