
Uddhav Thackeray Crisis: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर से बड़ा सियासी भूचाल आने की चर्चा है। बताया जा रहा है की शिवसेना (UBT) के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 सांसद पार्टी नेतृत्व से नाराज चल रहे हैं और वे अलग रास्ता अपनाने की तैयारी में हैं। अब यदि ऐसा होता है तो यह पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के लिए बड़ा राजनीतिक झटका साबित हो सकता है।
मिली जानकारी के मुताबिक, बगावत की तैयारी कर रहे सांसद जल्द ही अलग समूह बना सकते हैं। इसके बाद उनके उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि अभी तक इस संबंध में कोई ऑफिसियल नोटिफिकेशन जारी नहीं की गई है। ऐसे में आइए जानते हैं यहां पूरा मामला
दिल्ली में बढ़ी हलचल
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि दो सांसद पहले ही दिल्ली पहुंच चुके हैं, जबकि अन्य चार सांसदों के भी दिल्ली पहुंचने की खबर है। इन बैठकों को महाराष्ट्र की बदलती राजनीति के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है।
दरअसल संभावित टूट को रोकने के लिए उद्धव ठाकरे खेमे ने भी अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। जिससे पार्टी के वरिष्ठ नेता अनिल देसाई और संजय राउत दिल्ली पहुंचे हैं और लगातार संपर्क साधने की कोशिश कर रहे हैं। माना जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व नाराज सांसदों को मनाने में जुटा हुआ है।
स्थापना दिवस से पहले लग सकता है झटका
जानकारी के अनुसार, शिवसेना का 60वां स्थापना दिवस 19 जून को मनाया जाना है। ऐसे समय में पार्टी के भीतर टूट की अटकलों ने राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है। माना जा रहा है कि अगर बागी सांसद कोई बड़ा फैसला लेते हैं तो स्थापना दिवस से पहले ही उद्धव ठाकरे की राजनीतिक चुनौती और बढ़ सकती है।
पिछले कुछ सालों में शिवसेना पहले ही बड़े विभाजन का सामना कर चुकी है। एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में हुए विद्रोह के बाद पार्टी दो हिस्सों में बंट गई थी। अब एक बार फिर सांसदों के असंतोष की खबरों ने UBT खेमे की चिंता बढ़ा दी है।
‘ऑपरेशन टाइगर’ की चर्चा फिर तेज
महाराष्ट्र की राजनीति में इन दिनों ‘ऑपरेशन टाइगर’ को लेकर चर्चाएं तेज हैं। जिससे माना जा रहा है कि इस रणनीति के तहत कुछ सांसदों और नेताओं को उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) से अलग कर एकनाथ शिंदे गुट में शामिल कराने की कोशिश हो सकती है। हालांकि, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने ऐसे सभी दावों को खारिज करते हुए कहा है कि चुनाव समाप्त हो चुके हैं और अब किसी भी तरह के ‘नंबर गेम’ की जरूरत नहीं है। इसके बावजूद राजनीतिक गलियारों में अटकलों का दौर जारी है और सभी की नजर संभावित राजनीतिक घटनाक्रम पर बनी हुई है।
संसद में क्या होगा असर?
यदि शिवसेना (UBT) के 6 सांसद अलग गुट बनाकर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होते हैं, तो इसका सीधा असर संसद में पार्टी की ताकत और राजनीतिक समीकरणों पर पड़ सकता है। इससे शिंदे गुट की स्थिति और भी ज्यादा मजबूत होगी, जो पहले से ही केंद्र सरकार में बीजेपी (BJP) का एक महत्वपूर्ण सहयोगी माना जाता है। वहीं, उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) के लिए यह बड़ा राजनीतिक झटका साबित हो सकता है। सांसदों की संख्या घटने से पार्टी की संसद में आवाज और राजनीतिक प्रभाव दोनों कमजोर पड़ सकते हैं, जिसका असर भविष्य की रणनीति और गठबंधन की राजनीति पर भी देखने को मिल सकता है।
महाराष्ट्र की राजनीति पर सबकी नजर
महाराष्ट्र की राजनीति इस समय बेहद दिलचस्प मोड़ पर खड़ी है। ऐसे में सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि शिवसेना (UBT) के नाराज सांसद आखिर क्या फैसला लेते हैं और पार्टी नेतृत्व इस संकट से कैसे निपटता है। यदि बगावत की खबरें सच साबित होती हैं, तो यह केवल उद्धव ठाकरे के लिए ही नहीं बल्कि पूरे महाराष्ट्र के राजनीतिक समीकरणों के लिए बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। स्थापना दिवस से पहले बढ़ी यह सियासी हलचल आने वाले दिनों में नई राजनीतिक रणनीतियों और गठबंधनों की दिशा तय कर सकती है।
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