Skip to main content Scroll Top
TMC Crisis: तृणमूल कांग्रेस में मची हलचल, 50 विधायकों के अलग होने की चर्चा से ममता पर बढ़ा दबाव
Current image: TMC Crisis: तृणमूल कांग्रेस में मची हलचल

TMC Crisis: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर से बड़ा भूचाल आने की संभावना दिखाई दे रही है। बताया जा रहा है की विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) अब अपने सबसे बड़े आंतरिक संकट से जूझती नजर आ रही है। ऐसे में पार्टी के निलंबित राष्ट्रीय प्रवक्ता रिजू दत्ता ने दावा किया है कि करीब 50 विधायक ममता बनर्जी के नेतृत्व से नाराज हैं और अलग गुट बनाने की तैयारी कर रहे हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी कहा कि यह गुट TMC के चुनाव चिह्न ‘दो फूल’ पर भी दावा ठोक सकता है। ऐसे में आइए जानते हैं यहां पूरी खबर

क्या टूट सकती है ममता बनर्जी की पार्टी?

दरअसल करीब तीन दशक पहले ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की थी। जिसमें लंबे समय तक बंगाल की राजनीति में मजबूत पकड़ बनाए रखने वाली यह पार्टी अब अंदरूनी कलह का सामना कर रही है। वहीं, हाल के दिनों में कई घटनाओं ने संकेत दिए हैं कि पार्टी के भीतर असंतोष लगातार बढ़ रहा है।

रिजू दत्ता के अनुसार, कई विधायक मौजूदा नेतृत्व से खुश नहीं हैं और वे खुद को “असली तृणमूल कांग्रेस” बताने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। हालांकि इन दावों की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

गुप्त बैठक ने बढ़ाई सियासी हलचल

राजनीतिक गलियारों में उस समय हलचल तेज हो गई जब खबर सामने आई कि कोलकाता के एक होटल में करीब 60 विधायकों की गुप्त बैठक हुई। जिससे इस बैठक में कई असंतुष्ट विधायक शामिल बताए गए।

TMC नेता कुणाल घोष ने आरोप लगाया कि विधायक ऋतब्रत बनर्जी और संदीप साहा ने यह बैठक आयोजित की थी। हालांकि दोनों नेताओं ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है। ऋतब्रत बनर्जी का कहना है कि पार्टी तोड़ने या नया गुट बनाने की किसी योजना से उनका कोई संबंध नहीं है।

ममता के विरोध प्रदर्शन में कम दिखे विधायक

बता दें की आज मंगलवार को कोलकाता के रानी रासमणि एवेन्यू में आयोजित ममता बनर्जी के विरोध प्रदर्शन में केवल कुछ ही विधायक और सांसद दिखाई दिए। राजनीतिक एक्सपर्ट्स का मानना है कि बड़ी संख्या में नेताओं की अनुपस्थिति ने पार्टी में बढ़ती नाराजगी की चर्चाओं को और बल दिया है। धरना स्थल पर मौजूद प्रमुख नेताओं में शोभनदेव चट्टोपाध्याय, मदन मित्रा, नैना बंद्योपाध्याय, अशोक देब, असीमा पात्रा, डोला सेन और कल्याण बनर्जी शामिल थे। लेकिन कई बड़े चेहरे नदारद रहे।

नेता विपक्ष को लेकर शुरू हुआ विवाद

TMC के भीतर मौजूदा संकट की शुरुआत नेता विपक्ष (LoP) की नियुक्ति को लेकर हुए विवाद से मानी जा रही है। आरोप है कि इस नियुक्ति प्रक्रिया में विधायकों के जाली हस्ताक्षरों का इस्तेमाल किया गया। इस विवाद के बाद ऋतब्रत बनर्जी और संदीप साहा को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। इसके बाद से कई विधायकों और नेताओं में असंतोष बढ़ने की खबरें सामने आने लगीं।

रिजू दत्ता का दावा है कि पार्टी के कई विधायक चाहते थे कि ऋतब्रत बनर्जी को नेता विपक्ष बनाया जाए, लेकिन शीर्ष नेतृत्व ने शोभनदेव चट्टोपाध्याय के नाम को आगे बढ़ा दिया, जिससे नाराजगी और बढ़ गई।

ममता बनर्जी ने लगाया दबाव बनाने का आरोप

पार्टी में बढ़ती असहमति के बीच ममता बनर्जी ने भी पहली बार सार्वजनिक रूप से इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी। फेसबुक लाइव के दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि TMC विधायकों पर दबाव बनाया जा रहा है।

ममता ने कहा कि कुछ विधायकों को पुलिस और अन्य माध्यमों से डराने-धमकाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें कुछ विशेष लोगों के संपर्क में रहने के लिए मजबूर किया जा रहा है। दूसरी ओर, कुणाल घोष ने भी भावुक अपील करते हुए विधायकों से पार्टी न छोड़ने की गुजारिश की। उन्होंने कहा कि सभी नेता और विधायक जनता के बीच ममता बनर्जी की छवि और पार्टी के समर्थन के कारण पहुंचे हैं।

50 विधायकों का आंकड़ा क्यों है महत्वपूर्ण?

राजनीतिक एक्सपर्ट्स के अनुसार, TMC के भीतर बगावत की खबरों में 50 विधायकों का आंकड़ा बेहद महत्वपूर्ण है। पश्चिम बंगाल विधानसभा में TMC के पास करीब 80 विधायक हैं। दलबदल विरोधी कानून के तहत यदि किसी गुट को अलग होकर मान्यता प्राप्त करनी है, तो उसे विधायक दल के लगभग दो-तिहाई सदस्यों का समर्थन चाहिए। यह संख्या लगभग 53 विधायकों के आसपास बैठती है। यही कारण है कि यदि किसी गुट के पास 50 या उससे अधिक विधायक जुट जाते हैं, तो वह पार्टी नेतृत्व को बड़ी चुनौती दे सकता है और चुनाव चिह्न पर दावा करने की कोशिश कर सकता है।

क्या सच में खतरे में है TMC का चुनाव चिह्न?

जानकारी के अनुसार, फिलहाल चुनाव आयोग के सामने TMC के चुनाव चिह्न को लेकर कोई औपचारिक दावा पेश नहीं किया गया है। न ही किसी विधायक ने सार्वजनिक रूप से रिजू दत्ता के दावे का समर्थन किया है। फिर भी राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि बड़ी संख्या में विधायक एकजुट होकर अलग गुट बनाते हैं, तो भविष्य में चुनाव चिह्न और पार्टी की मान्यता को लेकर कानूनी लड़ाई देखने को मिल सकती है।

विशेषज्ञों ने जताई चिंता

कोलकाता के सेंट जेवियर्स कॉलेज के प्रोफेसर सयंतन घोष का कहना है कि पार्टी के भीतर असंतोष लगातार बढ़ रहा है। उनके अनुसार, यदि यह स्थिति जारी रहती है तो आने वाले बजट सत्र तक TMC के भीतर बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिल सकता है। जिसमें उन्होंने सोशल मीडिया पर भी लिखा कि पार्टी के कई विधायक नेतृत्व से नाराज हैं और हालात सामान्य नहीं हैं।

आगे क्या होगा?

फिलहाल TMC नेतृत्व लगातार नुकसान को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहा है। पार्टी नेताओं द्वारा विधायकों से बातचीत की जा रही है और संगठन को एकजुट रखने के प्रयास जारी हैं।

हालांकि दूसरी ओर, बगावत और गुप्त बैठकों की खबरों ने ममता बनर्जी के लिए चिंता बढ़ा दी है। यदि आने वाले दिनों में असंतुष्ट विधायक खुलकर सामने आते हैं, तो यह TMC के इतिहास का सबसे बड़ा राजनीतिक संकट साबित हो सकता है। ऐसे में अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि ममता बनर्जी अपने विधायकों को एकजुट रखने में सफल होती हैं या फिर बंगाल की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू होने वाला है।

ये भी पढ़ें: सीबीएसई OSM विवाद: CBSE चेयरमैन और सेक्रेटरी हटाए गए, जांच के लिए बनी विशेष कमेटी

Author

  • Aparna Panwar

    अपर्णा पवांर, एक हिंदी कंटेंट राइटर है, जिन्होंने डिजिटल मीडिया में अपनी लेखनी से पहचान बनाई। आज वे “Khaber Aaj Ki” में हिंदी कंटेंट राइटर के पद पर काम करते हुए पत्रकारिता को अपना जुनून मानती हैं। उनके विचारों में खबरें केवल सूचनाएं नहीं, बल्कि लोगों तक सच्चाई पहुँचाने का माध्यम हैं।

Related Posts

लेटेस्ट ➤

Advertising Banner
305x250