
TMC Crisis: पश्चिम बंगाल की राजनीति में विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद बड़ा भूचाल देखने को मिल रहा है। जिससे राज्य में सत्ता का समीकरण बदलते ही तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर भगदड़ जैसी स्थिति बन गई है। बता दें एक तरफ पार्टी नेताओं पर लगातार FIR, गिरफ्तारियां और छापेमारी हो रही है, वहीं दूसरी तरफ कई नेता और पार्षद पार्टी छोड़ते नजर आ रहे हैं। जिसमें बीजेपी इसे “शुभेंदु राज” की शुरुआत बता रही है, जबकि TMC इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई करार दे रही है। ऐसे में आइए जानते हैं यहां पूरी खबर
127 पार्षदों के इस्तीफे से बढ़ी TMC की मुश्किल
जानकारी के लिए बता दें की राज्य के अलग-अलग नगरपालिका, नगर निगम और ग्राम पंचायतों से अब तक करीब 127 TMC पार्षद और नेता इस्तीफा दे चुके हैं। इन इस्तीफों ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। कई इलाकों में स्थानीय स्तर पर TMC संगठन कमजोर पड़ता दिखाई दे रहा है।
ऐसे में राजनीतिक एक्सपर्ट्स का मानना है कि लगातार कार्रवाई और बढ़ते दबाव के कारण कई नेता भविष्य की राजनीति को देखते हुए नई राह तलाश रहे हैं। बीजेपी लगातार दावा कर रही है कि आने वाले दिनों में और बड़े नेता पार्टी छोड़ सकते हैं।
काकोली घोष और कल्याण बनर्जी विवाद ने बढ़ाई अंदरूनी लड़ाई
TMC सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा देकर सियासी हलचल तेज कर दी है। जिसमें उन्होंने लोकसभा स्पीकर को चिट्ठी लिखकर TMC के लोकसभा चीफ व्हीप कल्याण बनर्जी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
साथ ही, काकोली घोष का आरोप है कि संसद के अंदर उनके साथ कई बार दुर्व्यवहार किया गया। हालांकि कल्याण बनर्जी ने इन आरोपों को झूठा बताया है। उनका कहना है कि अगर ऐसा कुछ हुआ था तो शिकायत पहले क्यों नहीं की गई। उन्होंने यह भी दावा किया कि नारदा स्टिंग केस में जांच एजेंसियों की कार्रवाई से बचने के लिए इस तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं। इस विवाद ने TMC के अंदर मौजूद गुटबाजी को खुलकर सामने ला दिया है।
शांतनु सेन का इस्तीफा और भ्रष्टाचार के आरोप
TMC प्रवक्ता शांतनु सेन ने भी पार्टी के पदों से इस्तीफा देते हुए बड़ा बयान दिया है। जिसमें उन्होंने कहा कि राज्य में भ्रष्टाचार के मुद्दों ने पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाया है और उनका अंतर्मन अब ऐसे मामलों का समर्थन नहीं कर सकता। उन्होंने नौकरी घोटाला, आरजी कर मामला और अभया केस जैसे मुद्दों का जिक्र करते हुए कहा कि जनता ने इन मुद्दों पर वोट दिया है। उनके बयान से साफ है कि पार्टी के अंदर कई नेता मौजूदा हालात से असहज महसूस कर रहे हैं।
बंगाल में लगातार हो रही गिरफ्तारियां
चुनाव नतीजों के बाद बंगाल में कई TMC नेताओं पर कार्रवाई तेज हो गई है। अलग-अलग जिलों में पुलिस और जांच एजेंसियों ने छापेमारी कर कई नेताओं को गिरफ्तार किया है।
टीएमसी विधायक दिलीप मंडल को ओडिशा के पुरी से गिरफ्तार किया गया। बशीरहाट में नगरपालिका चेयरमैन के खेतों से नकदी और सोना मिलने का दावा किया गया। कूचबिहार में शुभेंदु अधिकारी के काफिले पर हमले के मामले में भी TMC नेताओं की गिरफ्तारी हुई। इसके अलावा उत्तर 24 परगना, हुगली, हावड़ा, बर्धमान और दक्षिण दमदम जैसे इलाकों में भी कार्रवाई जारी है। पुलिस ने कई जगहों से हथियार, नकदी, शराब और दस्तावेज बरामद करने का दावा किया है।
181 FIR से बढ़ा दबाव
राज्य के कई जिलों में TMC नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ 181 से ज्यादा FIR दर्ज की जा चुकी हैं। इनमें भ्रष्टाचार, हिंसा, अवैध कब्जा और हमले जैसे आरोप शामिल हैं। नादिया, मुर्शिदाबाद और कूचबिहार जैसे जिलों में कार्रवाई सबसे ज्यादा देखने को मिली है। बीजेपी का कहना है कि कानून अब निष्पक्ष तरीके से काम कर रहा है, जबकि TMC इसे विपक्षी नेताओं को डराने की कोशिश बता रही है।
शुभेंदु अधिकारी की बढ़ती ताकत
बंगाल में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी लगातार सक्रिय नजर आ रहे हैं। कई नाराज TMC विधायक और नेता उनकी बैठकों में शामिल हो रहे हैं। इससे बीजेपी का मनोबल बढ़ा है।
खबरों के मुताबिक छह TMC विधायक हाल ही में शुभेंदु अधिकारी की बैठकों में दिखाई दिए। वहीं उत्तर बंगाल के कई नेता केंद्रीय मंत्री निशीथ प्रमाणिक के संपर्क में बताए जा रहे हैं। बीजेपी नेताओं का दावा है कि आने वाले समय में बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
बीजेपी का बड़ा दावा
बीजेपी सांसद सौमित्र खान ने दावा किया है कि करीब 20 TMC सांसद बीजेपी में शामिल होने के लिए तैयार बैठे हैं। उन्होंने कहा कि सिर्फ पार्टी नेतृत्व की मंजूरी का इंतजार है। बीजेपी का यह भी दावा है कि 50 से ज्यादा विधायक और कई जिला स्तर के नेता संपर्क में हैं। अगर ऐसा होता है तो TMC के लिए यह बड़ा झटका साबित हो सकता है। हालांकि TMC इन दावों को राजनीतिक प्रचार बता रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि बीजेपी दबाव और एजेंसियों के जरिए माहौल बनाने की कोशिश कर रही है।
क्या TMC अपने सबसे मुश्किल दौर में?
15 साल तक बंगाल की राजनीति में मजबूत पकड़ रखने वाली TMC अब कई मोर्चों पर घिरी दिखाई दे रही है। भ्रष्टाचार के आरोप, अंदरूनी गुटबाजी, नेताओं के इस्तीफे और जांच एजेंसियों की कार्रवाई ने पार्टी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
राजनीतिक एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर पार्टी जल्द हालात नहीं संभालती तो आने वाले समय में उसे और नुकसान उठाना पड़ सकता है। दूसरी तरफ बीजेपी इस मौके को बंगाल में अपनी पकड़ मजबूत करने के रूप में देख रही है।
बंगाल की राजनीति में आगे क्या?
बंगाल में मौजूदा हालात आने वाले दिनों में और दिलचस्प हो सकते हैं। अगर नेताओं का पार्टी छोड़ने का सिलसिला जारी रहा तो राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव संभव है। फिलहाल TMC अपने संगठन को बचाने और कार्यकर्ताओं का मनोबल बनाए रखने की कोशिश कर रही है। वहीं बीजेपी “शुभेंदु राज” के नारे के साथ राज्य में नई राजनीतिक जमीन तैयार करने में जुटी हुई है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह सिर्फ अस्थायी राजनीतिक संकट है या फिर बंगाल में सचमुच सत्ता और संगठन का बड़ा बदलाव शुरू हो चुका है।






