
Nirmala Sitharaman: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी के बीच केंद्र सरकार अब आर्थिक मोर्चे पर पूरी तरह अलर्ट हो गई है। बताया जा रहा है की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने साफ कहा है कि मौजूदा वैश्विक संकट के दौर में सरकार का पूरा फोकस ‘3Fs’ यानी Fuel (ईंधन), Fertiliser (उर्वरक) और Forex (विदेशी मुद्रा) पर है।
जानकारी के लिए बता दें की मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान वित्त मंत्री ने कहा कि दुनिया भर में बढ़ रहे भू-राजनीतिक तनाव का असर भारत की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। खासतौर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार हर संभव कदम उठा रही है ताकि आम आदमी पर महंगाई का बोझ कम पड़े।
कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई टेंशन
भारत दुनिया के सबसे बड़े कच्चा तेल आयातक देशों में शामिल है। जिससे देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। ऐसे में खाड़ी क्षेत्र और खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव का सीधा असर भारतीय बाजार पर देखने को मिल रहा है। वहीं, बीते कुछ समय से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव हो रहा है। इसका असर पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है। तेल कंपनियां लगातार ईंधन दरों में संशोधन कर रही हैं, जिससे आम जनता की जेब पर असर बढ़ता जा रहा है।
पेट्रोल-डीजल महंगा होने से सिर्फ वाहन चलाने की लागत ही नहीं बढ़ती, बल्कि माल ढुलाई महंगी होने से खाने-पीने की चीजों समेत रोजमर्रा के सामानों के दाम भी बढ़ने लगते हैं। यही वजह है कि सरकार अब ईंधन की स्थिति पर सबसे ज्यादा ध्यान दे रही है।
आखिर क्या है सरकार का ‘3Fs’ फॉर्मूला?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जिस ‘3Fs’ फॉर्मूले की बात की, उसका मकसद देश को बाहरी आर्थिक झटकों से बचाना है।
- Fuel (ईंधन): सरकार की पहली चिंता ईंधन की कीमतों को लेकर है। कच्चे तेल के महंगा होने से देश में महंगाई बढ़ सकती है। इसलिए सरकार तेल आपूर्ति, रणनीतिक भंडारण और टैक्स प्रबंधन पर ध्यान दे रही है।
- Fertiliser (उर्वरक): भारत कृषि प्रधान देश है और खेती में उर्वरकों की बड़ी भूमिका होती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस और रसायनों की कीमतें बढ़ने से उर्वरक महंगे हो सकते हैं। इससे किसानों की लागत बढ़ने का खतरा है। सरकार चाहती है कि किसानों को कम कीमत पर खाद उपलब्ध होती रहे।
- Forex (विदेशी मुद्रा): विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश की आर्थिक ताकत का अहम हिस्सा होता है। अगर तेल आयात पर ज्यादा डॉलर खर्च होंगे तो विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ सकता है। यही कारण है कि सरकार डॉलर बचाने और गैर-जरूरी आयात कम करने पर जोर दे रही है।
पीएम मोदी की अपील का समर्थन
वित्त मंत्री ने प्रधानमंत्री Narendra Modi की उस अपील का भी समर्थन किया जिसमें विदेशी मुद्रा बचाने और सोने जैसे गैर-जरूरी आयातों को कम करने की बात कही गई थी। जिसमें सरकार का कहना है कि मौजूदा वैश्विक हालात में देश को अपने विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत बनाए रखना बेहद जरूरी है। यदि आयात लगातार बढ़ते रहे तो रुपया कमजोर हो सकता है और महंगाई और ज्यादा बढ़ सकती है।
एक्साइज ड्यूटी कटौती से सरकार पर दबाव
वित्त मंत्री ने माना कि आम जनता को राहत देने के लिए सरकार ने ईंधन पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती की है। लेकिन इसका असर सरकारी खजाने पर भी पड़ रहा है।
अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026-27 में सरकार को करीब 1 लाख करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। इससे राजकोषीय संतुलन बनाए रखना सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। हालांकि सरकार फिलहाल जनता को राहत देने और अर्थव्यवस्था को स्थिर रखने के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है।
MSME सेक्टर को लेकर बढ़ी चिंता
वित्त मंत्री ने देश के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम यानी MSME सेक्टर की हालत पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि छोटे उद्योगों के सामने इस समय सबसे बड़ी समस्या लिक्विडिटी की है।
सरकार के मुताबिक करीब 8.1 लाख करोड़ रुपये का भुगतान विभिन्न संस्थाओं और कंपनियों में अटका हुआ है। भुगतान में देरी के कारण छोटे कारोबारियों के पास वर्किंग कैपिटल की भारी कमी हो रही है। इसी को देखते हुए वित्त मंत्री ने सभी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों और सरकारी उपक्रमों को निर्देश दिया है कि वे MSME का बकाया भुगतान 45 दिनों के भीतर करें। सरकार का मानना है कि यदि MSME सेक्टर मजबूत रहेगा तो रोजगार और उत्पादन दोनों को गति मिलेगी।
डर फैलाने वालों को चेतावनी
निर्मला सीतारमण ने इस दौरान यह भी कहा कि वैश्विक संकट को लेकर देश में डर और घबराहट फैलाने वाली बयानबाजी से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था अभी भी मजबूत स्थिति में है और देश के पास चुनौतियों से निपटने की क्षमता मौजूद है। जरूरत सिर्फ सतर्कता और सही आर्थिक प्रबंधन की है।
वित्त मंत्री के अनुसार भारत ने पहले भी कई वैश्विक संकटों का सामना किया है और इस बार भी देश मजबूत रणनीति के साथ आगे बढ़ेगा।
आम आदमी पर क्या होगा असर?
अब अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं तो आने वाले महीनों में महंगाई बढ़ सकती है। पेट्रोल-डीजल महंगा होने से ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ेगा और इसका असर खाद्य पदार्थों से लेकर रोजमर्रा की चीजों तक पर पड़ सकता है। हालांकि सरकार फिलहाल टैक्स कटौती, विदेशी मुद्रा प्रबंधन और जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति बनाए रखने जैसे कदमों के जरिए हालात को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है।






