
तमिलनाडु की राजनीति में नई सरकार के गठन से पहले बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है. अभिनेता से नेता बने टीवीके प्रमुख विजय और राज्यपाल के बीच हुई मुलाकात के बाद सियासी माहौल गरमा गया है. इस पूरे मामले में वरिष्ठ वकील और पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल की एंट्री ने विवाद को और बढ़ा दिया है. कपिल सिब्बल ने राज्यपालों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कई राज्यपाल संविधान के बजाय राजनीतिक एजेंडा चला रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि राज्यपाल भाजपा के हितों को ध्यान में रखकर फैसले लेते हैं और संवैधानिक पद का दुरुपयोग किया जा रहा है.
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों के बाद यह पूरा मामला शुरू हुआ. विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम यानी TVK ने पहली बार चुनाव लड़ते हुए शानदार प्रदर्शन किया और राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी.
पहली बार चुनाव लड़कर सबसे बड़ी पार्टी बनी TVK
तमिलनाडु विधानसभा की कुल 234 सीटों में से TVK ने 108 सीटों पर जीत हासिल की. यह प्रदर्शन इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि विजय की पार्टी ने पहली बार चुनावी मैदान में कदम रखा था. चुनाव नतीजों ने तमिलनाडु की राजनीति को पूरी तरह बदल दिया. लंबे समय से राज्य की राजनीति पर हावी पारंपरिक दलों को इस बार बड़ा झटका लगा. हालांकि TVK बहुमत के आंकड़े 118 से 10 सीट पीछे रह गई. इसके बाद सरकार गठन को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गईं.
राज्यपाल से मिले विजय
गुरुवार 7 मई 2026 को TVK प्रमुख विजय ने तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर से मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने सरकार बनाने का दावा पेश किया. बताया जा रहा है कि विजय ने राज्यपाल को समर्थन देने वाले विधायकों की जानकारी भी सौंपी. उन्होंने भरोसा दिलाया कि अगर उन्हें सरकार बनाने का मौका दिया जाता है तो वे विधानसभा में बहुमत साबित कर देंगे. सूत्रों के अनुसार, विजय ने राज्यपाल से कहा कि उनकी सरकार स्थिर होगी और उन्हें पर्याप्त समर्थन प्राप्त है. मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गईं कि क्या राज्यपाल विजय को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करेंगे या नहीं.
कपिल सिब्बल ने उठाए सवाल
इस पूरे घटनाक्रम के बीच कपिल सिब्बल का बयान सामने आया, जिसने विवाद को और तेज कर दिया. सिब्बल ने कहा कि सबसे बड़ी पार्टी के नेता होने के नाते विजय को सरकार बनाने के लिए बुलाया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र और संविधान की यही मांग है. उन्होंने राज्यपालों पर निशाना साधते हुए कहा कि कई बार संवैधानिक प्रक्रिया की अनदेखी की जाती है और राजनीतिक दबाव में फैसले लिए जाते हैं.
कपिल सिब्बल ने सरकारिया आयोग का जिक्र करते हुए कहा कि अगर किसी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता, तो सबसे बड़ी पार्टी को पहले सरकार बनाने का मौका मिलना चाहिए. उन्होंने कहा कि विधानसभा में बहुमत साबित करना सदन का काम है, न कि राजभवन का. सिब्बल ने तंज भरे अंदाज में कहा कि “कौन सुनता है”, जिससे साफ था कि वे राज्यपाल के रवैये से नाराज हैं.
राज्यपाल पर लगे राजनीतिक आरोप
कपिल सिब्बल ने राज्यपालों को भाजपा का एजेंट तक बता दिया. उन्होंने आरोप लगाया कि कई राज्यपाल संवैधानिक निष्पक्षता के बजाय राजनीतिक हितों को प्राथमिकता देते हैं. हालांकि भाजपा की तरफ से इन आरोपों पर अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि राज्यपाल की भूमिका को लेकर देश में पहले भी कई बार विवाद हो चुके हैं. कई राज्यों में सरकार गठन के समय यह सवाल उठता रहा है कि सबसे पहले किसे बुलाया जाना चाहिए. तमिलनाडु में भी अब यही बहस तेज हो गई है.
क्या कहते हैं संवैधानिक नियम?
संविधान विशेषज्ञों के मुताबिक जब किसी विधानसभा चुनाव में कोई भी पार्टी स्पष्ट बहुमत हासिल नहीं करती, तो राज्यपाल की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है. आमतौर पर सबसे बड़ी पार्टी को पहले सरकार बनाने का मौका दिया जाता है. अगर वह बहुमत साबित नहीं कर पाती, तो अन्य दलों को मौका दिया जाता है. सरकारिया आयोग और कई सुप्रीम कोर्ट के फैसलों में भी यही बात कही गई है कि बहुमत का परीक्षण विधानसभा के भीतर होना चाहिए. यही वजह है कि विपक्षी दल और कई विशेषज्ञ विजय को पहले मौका दिए जाने की बात कर रहे हैं.
विजय की राजनीति का नया दौर
तमिल फिल्म इंडस्ट्री के सुपरस्टार विजय ने जब राजनीति में कदम रखा था, तब कई लोगों को लगा था कि उन्हें जमीन पर मजबूत होने में समय लगेगा. लेकिन पहली ही चुनावी लड़ाई में उनकी पार्टी का प्रदर्शन बेहद शानदार रहा. युवा वोटरों और शहरी इलाकों में विजय को जबरदस्त समर्थन मिला. उनकी सभाओं में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे और सोशल मीडिया पर भी उन्हें काफी समर्थन मिला. अब अगर विजय सरकार बनाने में सफल होते हैं, तो यह तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव माना जाएगा.
राज्य में बढ़ी राजनीतिक हलचल
TVK के प्रदर्शन के बाद तमिलनाडु की राजनीति में हलचल बढ़ गई है. विभिन्न दल लगातार बैठकों और रणनीति बनाने में जुटे हैं. राजनीतिक जानकारों का कहना है कि आने वाले कुछ दिन बेहद अहम रहने वाले हैं. यह तय करेगा कि तमिलनाडु में अगली सरकार किसकी बनेगी. अगर विजय को सरकार बनाने का मौका मिलता है, तो उन्हें विधानसभा में बहुमत साबित करना होगा. वहीं अगर कोई दूसरा गठबंधन आगे आता है, तो राज्य की राजनीति और ज्यादा दिलचस्प हो सकती है.
अब सबकी नजर राज्यपाल के अगले कदम पर
फिलहाल तमिलनाडु की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल यही है कि राज्यपाल अगला कदम क्या उठाते हैं. क्या विजय को औपचारिक रूप से सरकार बनाने का न्योता दिया जाएगा. क्या विधानसभा में फ्लोर टेस्ट होगा, या फिर कोई नया राजनीतिक समीकरण सामने आएगा. इन सभी सवालों के जवाब आने वाले दिनों में साफ हो जाएंगे.
Read Related News: पूर्व वायुसेना कर्मी से BJP के भरोसेमंद चेहरे तक, कौन थे चंद्रनाथ रथ जिनकी गोली मारकर हत्या हुई?






