
India First Highway Airstrip: भारत की रक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 14 फरवरी को असम के डिब्रूगढ़ में देश की पहली इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF) का उद्घाटन किया। बता दें कि नेशनल हाईवे पर बनाई गई यह अहम सुविधा संकट के समय भारतीय वायुसेना के विमानों के लिए वैकल्पिक रनवे का काम करेगी।
पूर्वोत्तर में बढ़ी सामरिक ताकत
यह इमरजेंसी लैंडिंग स्ट्रिप असम के अपर क्षेत्र में विकसित की गई है, जो अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के करीब स्थित एक बेहद संवेदनशील रणनीतिक इलाका माना जाता है। वहीं, इस सुविधा के शुरू होने से पूर्वोत्तर भारत में तैनात सशस्त्र बलों को अतिरिक्त सुरक्षा और संचालन क्षमता मिलेगी। किसी भी आपात स्थिति में, जब पारंपरिक एयरबेस क्षतिग्रस्त हो जाएं या उपयोग में न आ सकें, तब यह हाईवे स्ट्रिप विमानों के संचालन को जारी रखने में मदद करेगी।
बड़े रक्षा नेटवर्क का हिस्सा
डिब्रूगढ़ की यह इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी देशभर में एयरफील्ड और वैकल्पिक लैंडिंग ग्राउंड को अपग्रेड करने की व्यापक योजना का हिस्सा है। भारतीय वायुसेना के एडवांस्ड लैंडिंग ग्राउंड्स को आधुनिक बनाया जा चुका है और अब राष्ट्रीय राजमार्गों पर भी आपातकालीन लैंडिंग स्ट्रिप तैयार की जा रही हैं। इससे युद्ध या प्राकृतिक आपदा जैसी परिस्थितियों में वायुसेना की कार्रवाई बाधित नहीं होगी।
भौगोलिक स्थिति से बढ़ी अहमियत
दरअसल, इस लैंडिंग स्ट्रिप की रणनीतिक ताकत इसकी लोकेशन से और बढ़ जाती है। यह क्षेत्र भारत-चीन सीमा के अपेक्षाकृत नजदीक है, जिससे पूर्वी सेक्टर में वायु अभियानों को गहराई और तेजी मिल सकती है। किसी भी संभावित संघर्ष की स्थिति में यहां से तेज प्रतिक्रिया देना संभव होगा। यही कारण है कि इस परियोजना को देश की सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आधुनिक लड़ाकू और ट्रांसपोर्ट विमान उतरे
इस हाईवे स्ट्रिप पर कई अत्याधुनिक विमानों ने सफलतापूर्वक लैंडिंग और टेकऑफ कर अपनी क्षमता साबित की है। इनमें राफेल और सुखोई‑30 एमकेआई जैसे लड़ाकू विमान शामिल हैं। इसके अलावा सी‑130जे सुपर हरक्यूलिस तथा डोर्नियर विमानों ने भी यहां सफल संचालन किया। साथ ही, ड्रिल के दौरान ‘टच एंड गो’ मैन्यूवर, कॉम्बैट फॉर्मेशन लैंडिंग और त्वरित टेकऑफ जैसे अभ्यास किए गए, जिससे यह साबित हुआ कि यह स्ट्रिप वास्तविक आपात स्थिति में पूरी तरह उपयोगी है।
मानवीय मिशनों में भी होगी मदद
जानकारी के लिए बता दें कि, यह केवल युद्ध ही नहीं, बल्कि प्राकृतिक आपदा या राहत कार्यों में भी यह सुविधा अहम भूमिका निभाएगी। जिसमें एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टरों के जरिए कैजुअल्टी इवैक्यूएशन ड्रिल्स की गईं, जिससे घायलों को तुरंत सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने की क्षमता प्रदर्शित हुई। इससे साफ है कि यह इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी सैन्य और मानवीय—दोनों तरह के मिशनों में उपयोगी साबित होगी।
क्यों कहा जा रहा ब्रह्मास्त्र
रक्षा एक्सपर्ट्स का कहना है कि, हाईवे पर बनी ऐसी लैंडिंग स्ट्रिप दुश्मन के लिए अप्रत्याशित चुनौती पैदा करती है। पारंपरिक एयरबेस पर हमला होने की स्थिति में भी वायुसेना अपने ऑपरेशन जारी रख सकती है। यही वजह है कि इसे युद्ध के समय भारत का ‘ब्रह्मास्त्र’ कहा जा रहा है।
आत्मनिर्भर रक्षा ढांचे की दिशा में कदम
दरअसल, यह परियोजना भारत के आत्मनिर्भर और मजबूत रक्षा ढांचे की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। सरकार का लक्ष्य है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में ऐसी सुविधाएं विकसित की जाएं, ताकि किसी भी आपात परिस्थिति में सेना की प्रतिक्रिया तेज और प्रभावी हो सके। साथ ही, डिब्रूगढ़ की यह इमरजेंसी लैंडिंग स्ट्रिप न केवल पूर्वोत्तर भारत की सुरक्षा को मजबूत करती है, बल्कि पूरे देश की सामरिक तैयारी को नई ऊंचाई देती है। आने वाले समय में इस तरह की और परियोजनाएं भारत की रक्षा क्षमता को और अधिक सशक्त बनाएंगी।
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