
India Temples: भारत में कुछ मंदिर ऐसे भी हैं जहां मिठाई की जगह भगवान को शराब चढ़ाई जाती है। साथ ही, यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। आइए जानते हैं यहां उन 9 मंदिरों के बारे में, जहां शराब चढ़ाई जाती है।
India Temples: भारत को मंदिरों का देश कहा जाता है। यहां पूजा-पाठ, आरती, फूल, धूप और मिठाइयों की परंपरा सदियों से चली आ रही है। वहीं, आम तौर पर यह माना जाता है कि पूजा के समय शराब या मांस का सेवन करना बहुत गलत होता है। लेकिन भारत की लोक आस्थाएं और क्षेत्रीय परंपराएं इससे कहीं ज्यादा विविध और रोचक भी हैं। वहीं, देश में कुछ ऐसे मंदिर भी हैं, जहां भगवान को मिठाइयों की जगह शराब चढ़ाई जाती है और इसे पूरी श्रद्धा के साथ पूजा का हिस्सा माना जाता है।बता दें कि, ये परंपराएं तांत्रिक विधियों, लोकदेवताओं, आदिवासी संस्कृति और सामाजिक विश्वासों से जुड़ी हुई हैं,जो पीढ़ियों से चली आ रही हैं।
ऐसे में आइए जानते हैं। भारत के उन मंदिरों के बारे में, जहां शराब अर्पित करना एक मान्य और जरूरी परंपरा है।
काल भैरव मंदिर, उज्जैन
दरअसल, मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित काल भैरव मंदिर देश के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में गिना जाता है। साथ ही, काल भैरव को उज्जैन नगर का रक्षक भी माना जाता है। यहां तांत्रिक परंपरा के अनुसार, भगवान को शराब का भोग लगाया जाता है। जिसमें मान्यता है कि ऐसा करने से भय, नकारात्मक शक्तियां और बाधाएं दूर होती हैं। वहीं, भक्त बोतल से शराब भगवान के मुख के पास चढ़ाते हैं, जिसे पुजारी विधिपूर्वक अर्पित करते हैं।
खबीस बाबा मंदिर, सीतापुर
उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में स्थित खबीस बाबा की मजार भी अपनी अलग पहचान रखती है। जिसमें खबीस बाबा को चमत्कारी फकीर माना जाता है और कहा जाता है कि उन्हें शराब बहुत ही प्रिय थी। वहीं, आज भी श्रद्धालु उनकी समाधि पर शराब चढ़ाते हैं। यह परंपरा सूफी आस्था और लोक विश्वास का अनोखा मेल मानी जाती है।
परसिनिक्कडवू मंदिर, कन्नूर
केरल के कन्नूर जिले में स्थित परसिनिक्कडवू मंदिर लोकदेवता मुथप्पन को समर्पित है। यहां पूजा के दौरान थय्यम नृत्य किया जाता है। वहीं इस मंदिर में मछली, मांस और ताड़ी चढ़ाना आम बात है। साथ ही, स्थानीय लोग मानते हैं कि देवता भी आम जनजीवन की तरह रहते हैं, इसलिए उन्हें वही भोग अर्पित किया जाता है।
उत्तरेश्वरी मंदिर, जगतसिंहपुर
ओडिशा के जगतसिंहपुर जिले में माता उत्तरेश्वरी का मंदिर स्थित है। यहां देवी को वाइन और मछली अर्पित की जाती है। साथ ही, स्थानीय लोगों की मान्यता है कि इस भोग से मिर्गी जैसी बीमारियों में लाभ मिलता है। भोग के बाद इसे जरूरतमंदों में प्रसाद के रूप में बांट दिया जाता है।
काशी के कोतवाल काल भैरव, वाराणसी
वाराणसी में काल भैरव को ‘काशी का कोतवाल’ कहा जाता है। जिसमें मान्यता है कि उनके दर्शन के बिना कोई भी धार्मिक कार्य पूरे नहीं होता। यहां भक्त शराब, मांस और अन्य भोग चढ़ाते हैं। यह परंपरा काशी की सुरक्षा और न्याय व्यवस्था से जुड़ी मानी जाती है।
काल भैरव मंदिर, दिल्ली
दिल्ली के पुराने किले के पास स्थित काल भैरव मंदिर में भी शराब भोग के रूप में चढ़ाई जाती है। यहां अलग-अलग उम्र और वर्ग के श्रद्धालु इस परंपरा का पालन करते हैं। वहीं, राजधानी में स्थित यह मंदिर लोक आस्था का एक खास केंद्र माना जाता है।
जीवा मामा मंदिर, वडोदरा
गुजरात के वडोदरा जिले में स्थित जीवा मामा मंदिर एक लोकनायक की स्मृति में बना है। कहा जाता है कि जीवा मामा ने गांव को डाकुओं से बचाते हुए अपनी जान दे दी थी। उन्हें शराब और सिगरेट पसंद थी, इसलिए आज भी यहां वही भोग चढ़ाया जाता है। यह मंदिर सामाजिक बलिदान और वीरता की कहानी सुनाता है।
भंवाल माता मंदिर, मेरता
राजस्थान के मेरता में स्थित भंवाल माता मंदिर अपनी अनोखी मान्यता के लिए जाना जाता है। मान्यता है कि माता केवल ढाई प्याला शराब ही स्वीकार करती हैं। पुजारी विशेष विधि से भोग चढ़ाता है। इसे माता के चमत्कार से जोड़कर देखा जाता है।
भद्रकाली मंदिर, अमृतसर
पंजाब के अमृतसर में स्थित भद्रकाली मंदिर में हर साल मई महीने में मेला लगता है। इस दौरान माता को मांस और शराब का भोग लगाया जाता है। बाद में इसे प्रसाद के रूप में श्रद्धालुओं में बांटा जाता है। यह परंपरा स्थानीय संस्कृति और सामूहिक आस्था का प्रतीक मानी जाती है।
आस्था के कई रंग
इन मंदिरों की परंपराएं यह दिखाती हैं कि भारत में आस्था का स्वरूप एक जैसा नहीं है। यहां हर क्षेत्र, समाज और संस्कृति की अपनी मान्यताएं हैं। शराब का भोग धार्मिक नियमों से ज्यादा लोक विश्वास और परंपरा का हिस्सा है, जिसे लोग आज भी पूरी श्रद्धा के साथ निभा रहे हैं।






