
JPSC-JSSC Protest: झारखंड में JPSC-JSSC अभ्यर्थियों का आंदोलन लगातार चर्चा में बना हुआ है। भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और परीक्षा प्रक्रिया को लेकर शुरू हुआ छात्रों का प्रदर्शन अब राजनीतिक रंग भी लेता दिखाई दे रहा है। राजधानी रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में धरने पर बैठे छात्रों के बीच देर रात बीजेपी के कई नेता पहुंच गए। नेताओं के पहुंचने के बाद मौके पर राजनीतिक हलचल तेज हो गई। बीजेपी नेताओं का दावा है कि उन्हें सूचना मिली थी कि प्रशासन रात के समय प्रदर्शन कर रहे छात्रों को धरना स्थल से हटाने की तैयारी कर रहा है। इसी सूचना के बाद वे स्टेडियम पहुंचे। हालांकि, बीजेपी नेताओं ने साफ किया कि उनका उद्देश्य आंदोलन में शामिल होना नहीं, बल्कि छात्रों को नैतिक समर्थन देना था। दूसरी तरफ, पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रात में हटाने की तैयारी के आरोपों को खारिज किया है। पुलिस का कहना है कि उसका उद्देश्य किसी भी छात्र को जबरन हिरासत में लेना नहीं था। ऐसे में छात्रों, बीजेपी नेताओं और प्रशासन के अलग-अलग दावों के बीच यह पूरा मामला अब सियासी बहस का मुद्दा बन गया है।
आधी रात धरना स्थल पहुंचे बीजेपी नेता
जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में काफी समय से छात्र अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठे हैं। इसी बीच देर रात बीजेपी के प्रदेश उपाध्यक्ष भानु प्रताप शाही, विधायक राज सिन्हा और पार्टी नेता प्रतुल सहदेव समेत कई नेता धरना स्थल पर पहुंचे। बीजेपी नेताओं ने कहा कि उन्हें जानकारी मिली थी कि प्रशासन रात के अंधेरे में छात्रों को हटाने की तैयारी कर रहा है। इसके बाद वे मौके पर पहुंचे ताकि छात्रों के साथ किसी तरह की ज्यादती न हो। भानु प्रताप शाही ने कहा कि उन्हें छात्रों के समर्थन में जानकारी मिली थी, जिसके बाद वह धरना स्थल पहुंचे। उन्होंने कहा कि JPSC-JSSC का आंदोलन अब केवल झारखंड तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देशभर के युवाओं से जुड़ा मुद्दा बन गया है। उनके मुताबिक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले बड़ी संख्या में युवाओं की उम्मीदें इस आंदोलन से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि छात्रों के खिलाफ किसी भी तरह की कार्रवाई तय नियमों और कानून के दायरे में रहकर की जाए।
बीजेपी ने पुलिस प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप
बीजेपी विधायक राज सिन्हा ने आरोप लगाया कि उन्हें जानकारी मिली थी कि प्रशासन के कुछ वरिष्ठ अधिकारी रात में छात्रों को डराने के लिए धरना स्थल पर पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि अगर प्रशासन को कोई कार्रवाई करनी है तो उसे खुले तौर पर करना चाहिए। उन्होंने रात में पुलिस बल की मौजूदगी और कार्रवाई की आशंका पर सवाल उठाया। राज सिन्हा ने दावा किया कि मौके पर पुलिस बल के साथ लाठी, हथियार और आंसू गैस जैसे संसाधन मौजूद थे। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। उन्होंने पहले की घटनाओं का भी जिक्र किया और आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों और पत्रकारों के साथ कथित तौर पर मारपीट की गई थी। बीजेपी नेता ने सवाल उठाया कि अगर प्रशासन को छात्रों से बातचीत करनी है तो देर रात ही धरना स्थल पर पहुंचने की जरूरत क्यों पड़ी। वहीं, बीजेपी नेता प्रतुल सहदेव ने भी दावा किया कि छात्रों को हटाए जाने की आशंका की सूचना मिलने के बाद वह मौके पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि करीब 12:30 बजे उपायुक्त और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी को लेकर छात्रों में चिंता पैदा हुई। उन्होंने यह भी दावा किया कि धरना स्थल के आसपास बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे और छात्रों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी। बीजेपी नेताओं ने कहा कि छात्र अपने अधिकारों और परीक्षा में पारदर्शिता की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। उनका कहना था कि पार्टी छात्रों की आवाज को दबाने के बजाय उनकी बात सरकार तक पहुंचाने का प्रयास करेगी।
छात्रों ने भी लगाए आंदोलन कमजोर करने के आरोप
धरना स्थल पर मौजूद छात्रों ने भी पुलिस और प्रशासन पर कई आरोप लगाए हैं। प्रदर्शनकारी छात्र प्रेम नायक ने कहा कि भूख हड़ताल का नौवां दिन चल रहा है। उनका आरोप है कि देर रात पुलिस धरना स्थल पर पहुंची और छात्रों से पूछताछ की गई। छात्रों से आधार कार्ड मांगे गए और उनसे यह पूछा गया कि वे धरने में क्यों बैठे हैं। प्रेम नायक ने दावा किया कि अलग-अलग तरीकों से आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि छात्रों के बीच विभाजन पैदा करने का प्रयास भी किया जा रहा है। छात्र नेता का कहना है कि उनका आंदोलन संवैधानिक तरीके से चल रहा है और वे अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने वाले नहीं हैं। उन्होंने यहां तक कहा कि अगर छात्रों को गिरफ्तार भी किया जाता है तो वे जेल में भी भूख हड़ताल जारी रखेंगे।
आखिर क्या है JPSC-JSSC विवाद?
झारखंड में JPSC और JSSC की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर अभ्यर्थी लंबे समय से सवाल उठा रहे हैं। छात्रों का आरोप है कि कई परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियां और अनियमितताएं हुई हैं। इसी को लेकर परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जा रही है। आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगों में विवादित परीक्षाओं की जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई शामिल है। छात्र चाहते हैं कि परीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो, ताकि मेहनत करने वाले उम्मीदवारों के साथ अन्याय न हो। छात्रों का कहना है कि सरकारी नौकरी की तैयारी में युवा कई वर्षों तक मेहनत करते हैं। अगर परीक्षा प्रक्रिया पर ही सवाल खड़े हो जाएं तो इसका सीधा असर अभ्यर्थियों के भविष्य पर पड़ता है।
सरकार और छात्रों के बीच बातचीत का भी दौर
इस आंदोलन के दौरान सरकार और छात्रों के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत भी हुई है। हालांकि, कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच अभी पूरी सहमति नहीं बन पाई है। छात्र लगातार यह मांग उठा रहे हैं कि विवादित परीक्षाओं की निष्पक्ष जांच हो। आंदोलनकारी अभ्यर्थियों का एक वर्ग केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI से जांच कराने की मांग पर भी जोर दे रहा है। वहीं सरकार की ओर से जांच और कार्रवाई को लेकर अलग-अलग स्तर पर कदम उठाए जाने की बात कही गई है। लेकिन छात्रों का कहना है कि उन्हें केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई चाहिए। यही वजह है कि बातचीत के बावजूद आंदोलन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
रात में पुलिस की मौजूदगी से क्यों बढ़ी चिंता?
धरना स्थल पर रात के समय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी के बाद छात्रों के बीच यह आशंका बढ़ गई कि उन्हें जबरन हटाया जा सकता है। इसी सूचना के बाद बीजेपी नेता भी मौके पर पहुंचे। हालांकि, पुलिस की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि किसी प्रदर्शनकारी को जबरन हिरासत में लेने का उद्देश्य नहीं था। ऐसे में पुलिस और छात्रों के दावों में अंतर दिखाई दे रहा है। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता कानून-व्यवस्था बनाए रखना बताई जा रही है, जबकि छात्र अपनी मांगों को लेकर धरना जारी रखने पर अड़े हैं।
राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा है छात्रों का आंदोलन
JPSC-JSSC अभ्यर्थियों का आंदोलन अब केवल परीक्षा से जुड़े विवाद तक सीमित नहीं रह गया है। बीजेपी नेताओं के धरना स्थल पहुंचने के बाद यह झारखंड की राजनीति में भी चर्चा का विषय बन गया है। विपक्षी दल सरकार पर छात्रों की मांगों को गंभीरता से नहीं लेने का आरोप लगा रहे हैं। वहीं सरकार और प्रशासन की ओर से कानून-व्यवस्था बनाए रखने की बात कही जा रही है। आने वाले दिनों में सरकार और छात्रों के बीच बातचीत इस आंदोलन की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। अगर दोनों पक्ष किसी समाधान तक पहुंचते हैं तो आंदोलन समाप्त हो सकता है। लेकिन अगर छात्रों की प्रमुख मांगों पर सहमति नहीं बनती है, तो प्रदर्शन और तेज होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में छात्रों का धरना जारी है और राजनीतिक दलों की नजर भी इस आंदोलन पर बनी हुई है। छात्रों की मांगें, सरकार का रुख और प्रशासन की अगली कार्रवाई, इन तीनों पर अब सबकी निगाहें टिकी हैं।
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