
Bihar Politics: बिहार की राजनीति में एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के वरिष्ठ नेता और लंबे समय तक पार्टी का प्रमुख ब्राह्मण चेहरा रहे मृत्युंजय तिवारी अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने जा रहे हैं। करीब दो दशक तक आरजेडी से जुड़े रहने के बाद उनका यह फैसला राज्य की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे रहा है। जानकारी के अनुसार, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी पार्टी कार्यालय में उन्हें औपचारिक रूप से सदस्यता दिलाएंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम आगामी राजनीतिक समीकरणों पर असर डाल सकता है।
16 जुलाई को दिया था इस्तीफा
मृत्युंजय तिवारी ने 16 जुलाई को राष्ट्रीय जनता दल से अपना इस्तीफा दे दिया था। हालांकि, पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मंगनीलाल मंडल ने कहा था कि नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के विदेश दौरे से लौटने तक उनका इस्तीफा रोका जाएगा और बातचीत की कोशिश की जाएगी। लेकिन मृत्युंजय तिवारी ने स्पष्ट कर दिया कि अब उनके फैसले में बदलाव की कोई संभावना नहीं है।
क्यों छोड़ी RJD?
इस्तीफा देते समय मृत्युंजय तिवारी ने पार्टी नेतृत्व और संगठन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी में ऐसे लोग प्रभावी हो गए हैं जो संगठन को भीतर से कमजोर कर रहे हैं। उनका कहना था कि लंबे समय तक समर्पण के साथ काम करने के बावजूद उन्हें लगातार नजरअंदाज किया गया और सम्मान नहीं मिला। उन्होंने कहा कि आत्मसम्मान से समझौता कर राजनीति करना संभव नहीं है।
तेजस्वी यादव पर भी साधा निशाना
मृत्युंजय तिवारी ने अपने बयान में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव के आसपास ऐसे लोग हैं जो उन्हें सही सलाह नहीं दे रहे और संगठन को नुकसान पहुंचा रहे हैं। हालांकि, RJD की ओर से इन आरोपों पर अलग-अलग नेताओं ने प्रतिक्रिया देते हुए पार्टी की एकजुटता पर भरोसा जताया है।
लालू यादव के भरोसेमंद नेताओं में थे शामिल
मृत्युंजय तिवारी को लंबे समय तक लालू प्रसाद यादव का भरोसेमंद नेता माना जाता रहा। साल 2014 में जब पार्टी कठिन दौर से गुजर रही थी, तब उन्हें पार्टी का मीडिया प्रभारी और प्रवक्ता बनाया गया था। उस समय उन्होंने टीवी बहसों, प्रेस कॉन्फ्रेंस और राजनीतिक कार्यक्रमों में लगातार पार्टी का पक्ष मजबूती से रखा।
RJD का प्रमुख ब्राह्मण चेहरा
बिहार की राजनीति में मृत्युंजय तिवारी को आरजेडी के प्रमुख सवर्ण नेताओं में गिना जाता था। RJD का पारंपरिक सामाजिक समीकरण मुस्लिम-यादव (MY) वर्ग पर आधारित माना जाता है। ऐसे में तिवारी पार्टी के उन नेताओं में शामिल थे जिनकी अन्य सामाजिक वर्गों में भी पहचान और पहुंच थी। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि उनका पार्टी छोड़ना प्रतीकात्मक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बीजेपी में शामिल होने की अटकलें पहले से थीं
RJD से इस्तीफा देने के तुरंत बाद ही उनके भाजपा में शामिल होने की चर्चा शुरू हो गई थी। इस्तीफे के अगले दिन भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के साथ उनकी तस्वीर सामने आने के बाद इन अटकलों को और बल मिला। इसके बाद भाजपा नेताओं ने भी सार्वजनिक रूप से उनका स्वागत करने की बात कही थी।
भाजपा ने किया स्वागत
भाजपा के कई नेताओं ने मृत्युंजय तिवारी के फैसले का स्वागत किया। पार्टी नेताओं का कहना है कि अनुभव रखने वाले नेताओं के आने से संगठन को मजबूती मिलेगी और बिहार में भाजपा का जनाधार और बढ़ेगा। अब उनकी औपचारिक सदस्यता के बाद पार्टी उन्हें कौन-सी जिम्मेदारी देती है, इस पर भी सभी की नजर रहेगी।
RJD के लिए कितना बड़ा झटका?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मृत्युंजय तिवारी का जाना RJD के लिए राजनीतिक और संगठनात्मक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण माना जा सकता है। हालांकि किसी एक नेता के जाने से पार्टी की पूरी रणनीति नहीं बदलती, लेकिन लंबे समय तक पार्टी का चेहरा रहे नेता का अलग होना विपक्षी दलों को राजनीतिक संदेश देने का अवसर जरूर देता है। दूसरी ओर, RJD नेतृत्व इस घटनाक्रम के प्रभाव को सीमित रखने की कोशिश करेगा।
बिहार की राजनीति में बढ़ी हलचल
बिहार में आगामी चुनावी तैयारियों के बीच नेताओं का दल बदलना राजनीतिक गतिविधियों को और तेज कर रहा है। विभिन्न दल लगातार अपने संगठन को मजबूत करने में जुटे हैं। ऐसे समय में मृत्युंजय तिवारी का भाजपा में जाना राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में इसका असर राज्य की राजनीति और चुनावी रणनीतियों पर किस तरह पड़ता है।
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