
West Bengal Re-Polling: पश्चिम बंगाल में एक बार फिर चुनावी माहौल गर्म हो गया है. राज्य की चर्चित फलता विधानसभा सीट पर आज दोबारा मतदान कराया जा रहा है. पिछले महीने हुए मतदान के दौरान कई गंभीर शिकायतें सामने आने के बाद चुनाव आयोग ने वोटिंग रद्द कर दी थी. अब कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और अतिरिक्त निगरानी के बीच दोबारा वोट डाले जा रहे हैं. फलता विधानसभा सीट पर सुबह से ही मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं. प्रशासन ने इस बार किसी भी तरह की गड़बड़ी रोकने के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं. चुनाव आयोग ने सुरक्षा बलों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ ड्रोन निगरानी और क्विक रिस्पॉन्स टीमों को भी तैनात किया है.
क्यों रद्द हुआ था पहले का चुनाव?
फलता सीट पर 29 अप्रैल को मतदान हुआ था, लेकिन वोटिंग के बाद कई राजनीतिक दलों और स्थानीय लोगों ने चुनाव आयोग से शिकायत की थी. आरोप लगाए गए कि कई मतदान केंद्रों पर मतदाताओं को बूथ तक पहुंचने से रोका गया. कुछ जगहों पर ईवीएम से छेड़छाड़ और उम्मीदवारों के नाम के आगे टेप लगाने जैसे वीडियो भी सामने आए थे. इन शिकायतों को गंभीर मानते हुए चुनाव आयोग ने जांच कराई और 2 मई को मतदान रद्द करने का फैसला लिया. इसके बाद दोबारा मतदान कराने की घोषणा की गई.
आज कैसी है सुरक्षा व्यवस्था?
इस बार चुनाव आयोग ने सुरक्षा को लेकर कोई ढिलाई नहीं बरती है. सभी 285 मतदान केंद्रों पर भारी पुलिस बल और केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है. हर बूथ पर पैरामिलिट्री फोर्स के करीब 8 जवान तैनात किए गए हैं, जबकि पिछले मतदान के दौरान यह संख्या आधी थी. इसके अलावा पूरे इलाके में ड्रोन कैमरों से निगरानी की जा रही है. चुनाव आयोग ने 30 क्विक रिस्पॉन्स टीमों का भी गठन किया है ताकि किसी भी शिकायत पर तुरंत कार्रवाई की जा सके. अधिकारियों का कहना है कि निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान कराना उनकी प्राथमिकता है.
कितने मतदाता करेंगे फैसला?
फलता विधानसभा सीट पर कुल 2 लाख 36 हजार से ज्यादा मतदाता हैं. इनमें लगभग 1.21 लाख पुरुष और 1.15 लाख महिला वोटर शामिल हैं. मतदाताओं के लिए कुल 285 मतदान केंद्र बनाए गए हैं. सुबह से ही कई बूथों पर अच्छी वोटिंग देखने को मिली. चुनाव अधिकारियों के मुताबिक ग्रामीण इलाकों में भी मतदान को लेकर उत्साह बना हुआ है.
किन उम्मीदवारों के बीच है मुकाबला?
फलता सीट पर कुल 6 उम्मीदवार मैदान में हैं, लेकिन मुख्य मुकाबला चार प्रमुख दलों के बीच माना जा रहा है. भारतीय जनता पार्टी ने देवांशु पांडा को मैदान में उतारा है. वहीं तृणमूल कांग्रेस की ओर से जहांगीर खान उम्मीदवार हैं. हालांकि उन्होंने चुनाव मैदान छोड़ने का ऐलान किया था, लेकिन चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के कारण ईवीएम में उनका नाम मौजूद है. कांग्रेस ने अब्दुल रजाक मोल्ला को उम्मीदवार बनाया है, जबकि माकपा की ओर से शंभू नाथ कुर्मी चुनाव लड़ रहे हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस सीट पर मुकाबला काफी दिलचस्प हो गया है क्योंकि दोबारा मतदान के कारण सभी दलों ने पूरी ताकत झोंक दी है.
राजनीतिक दलों ने तेज किया प्रचार
री-पोलिंग से पहले सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए जोरदार प्रचार अभियान चलाया. भाजपा ने चुनाव में कानून व्यवस्था और चुनावी हिंसा को बड़ा मुद्दा बनाया. वहीं तृणमूल कांग्रेस ने विपक्ष पर माहौल खराब करने का आरोप लगाया. कांग्रेस और वाम दलों ने भी निष्पक्ष चुनाव की मांग करते हुए चुनाव आयोग से कड़ी कार्रवाई की अपील की थी.
ग्रामीण इलाकों में ज्यादा सतर्कता
पिछली बार ग्रामीण इलाकों से सबसे ज्यादा शिकायतें सामने आई थीं. इसी वजह से इस बार गांवों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं. चुनाव आयोग ने स्थानीय प्रशासन को निर्देश दिया है कि कोई भी मतदाता मतदान से वंचित न रहे. बूथों तक पहुंचने वाले रास्तों पर भी सुरक्षा बढ़ाई गई है.
ईवीएम पर विशेष नजर
पिछले मतदान में ईवीएम के साथ कथित छेड़छाड़ के आरोपों के बाद इस बार मशीनों की निगरानी के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं. हर मतदान केंद्र पर वीडियोग्राफी कराई जा रही है. मतदान खत्म होने के बाद ईवीएम को कड़ी सुरक्षा में स्ट्रॉन्ग रूम में रखा जाएगा. अधिकारियों का कहना है कि पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को भी प्रक्रिया की जानकारी दी जा रही है.
बंगाल की राजनीति में क्यों अहम है फलता सीट?
फलता विधानसभा सीट दक्षिण 24 परगना जिले में आती है और इसे राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जाता है. यहां पर अल्पसंख्यक और ग्रामीण वोटरों की संख्या काफी ज्यादा है. पिछले चुनावों में यहां तृणमूल कांग्रेस का प्रभाव रहा है, लेकिन भाजपा ने हाल के वर्षों में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश की है. कांग्रेस और वाम दल भी इस सीट पर अपना प्रभाव बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रहे हैं.
कब आएंगे नतीजे?
पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों में से 293 सीटों के नतीजे पहले ही घोषित किए जा चुके हैं. फलता सीट पर मतदान रद्द होने के कारण यहां परिणाम रोक दिए गए थे. अब दोबारा मतदान होने के बाद 24 मई को मतगणना होगी और इसी दिन इस सीट का परिणाम भी घोषित किया जाएगा. राजनीतिक दलों की नजर अब इस सीट के नतीजों पर टिकी हुई है क्योंकि यह परिणाम राज्य की राजनीति में बड़ा संदेश दे सकता है.
चुनाव आयोग की साख पर भी नजर
फलता सीट पर दोबारा मतदान चुनाव आयोग के लिए भी एक बड़ी परीक्षा माना जा रहा है. आयोग पर निष्पक्ष चुनाव कराने का दबाव है. अगर मतदान शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न होता है तो यह आयोग के लिए बड़ी राहत होगी. वहीं किसी भी गड़बड़ी की स्थिति में विपक्षी दल फिर से सवाल उठा सकते हैं.
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