
NASA Artemis II: अंतरिक्ष की दुनिया में एक बार फिर से इंसान नई ऊँचाइयों को छूने जा रहा है। जिसमें अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA अपने बहुप्रतीक्षित मिशन Artemis II को अप्रैल 2026 में लॉन्च करने की तैयारी कर रही है। साथ ही यह मिशन मानव इतिहास में बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि करीब 50 साल बाद इंसान फिर से चंद्रमा के सबसे करीब पहुंचने जा रहा है। बता दें कि पिछली बार ऐसा 1972 में हुआ था, जब अपोलो मिशन के जरिए इंसान ने चंद्रमा का सफर किया था। Artemis II मिशन न केवल विज्ञान और तकनीक के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह मानव सभ्यता के भविष्य के लिए नए रास्ते भी खोलने वाला है।
जानकारी के लिए बता दें कि इस मिशन में चार अनुभवी अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं, जो ‘ओरियन’ कैप्सूल में सवार होकर चंद्रमा के चारों ओर चक्कर लगाएंगे और फिर सुरक्षित पृथ्वी पर लौटेंगे। इस दौरान वे अंतरिक्ष में अब तक की सबसे लंबी दूरी तय करेंगे और कई नई तकनीकों का परीक्षण करेंगे। मिशन का मुख्य उद्देश्य यह जांचना है कि ओरियन अंतरिक्ष यान मानव के लिए सुरक्षित और भरोसेमंद है या नहीं। Artemis II मिशन भविष्य के बड़े मिशनों की तैयारी भी है। इसके बाद नासा Artemis III के जरिए चांद पर पहली बार इंसान उतारेगा और आगे चलकर मंगल ग्रह तक इंसानों को पहुंचाने की राह तैयार होगी। इस मिशन की सफलता न सिर्फ अमेरिका, बल्कि पूरी दुनिया के अंतरिक्ष कार्यक्रमों और भारत के भविष्य के स्पेस प्रोजेक्ट्स के लिए भी मार्गदर्शक साबित होगी।
क्या है Artemis II मिशन?
Artemis II, NASA के आर्टेमिस प्रोग्राम का दूसरा बड़ा मिशन है। यह एक “क्रूड फ्लाईबाय” मिशन होगा, यानी इसमें अंतरिक्ष यात्री चांद पर उतरेंगे नहीं, बल्कि उसके चारों ओर चक्कर लगाकर वापस लौटेंगे। 1972 में Apollo 17 के बाद यह पहला मौका होगा जब इंसान चंद्रमा के इतने करीब जाएगा। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य ‘ओरियन’ स्पेसक्राफ्ट की सुरक्षा और क्षमता को जांचना है।
कब और कैसे होगा लॉन्च?
Artemis II को अप्रैल 2026 में लॉन्च किया जाएगा। इसके लिए दुनिया के सबसे शक्तिशाली रॉकेट Space Launch System (SLS) का इस्तेमाल होगा।यह रॉकेट अमेरिका के फ्लोरिडा स्थित Kennedy Space Center से उड़ान भरेगा। इसके साथ ही Orion कैप्सूल में चारों अंतरिक्ष यात्री सवार होंगे।
कौन हैं वो 4 जांबाज?
इस मिशन में शामिल चार अंतरिक्ष यात्री दुनिया के सबसे अनुभवी लोगों में से हैं।
- Reid Wiseman – मिशन कमांडर
- Victor Glover – पायलट (चांद के पास जाने वाले पहले अश्वेत व्यक्ति)
- Christina Koch – मिशन स्पेशलिस्ट (चांद के करीब जाने वाली पहली महिला)
- Jeremy Hansen – मिशन स्पेशलिस्ट (पहले गैर-अमेरिकी सदस्य)
कैसा होगा 10 दिनों का सफर?
जानकारी के लिए बता दें यह मिशन करीब 10 दिन तक चलेगा। इसकी यात्रा कुछ इस तरह होगी।
- लॉन्च के बाद पहला दिन पृथ्वी की कक्षा में सिस्टम टेस्ट।
- इसके बाद चंद्रमा की ओर यात्रा।
- चांद के पीछे से फ्लाईबाय (करीब 4 लाख किमी दूरी)
- फिर गुरुत्वाकर्षण की मदद से वापसी।
टेक्नोलॉजी में क्या है खास?
Artemis II कई नई तकनीकों से लैस है।
- लेजर कम्युनिकेशन से HD वीडियो ट्रांसमिशन।
- एडवांस लाइफ सपोर्ट सिस्टम।
- हाई-टेक हीट शील्ड।
- ऑटोमैटिक नेविगेशन सिस्टम।
सबसे बड़ी चुनौतियां क्या हैं?
इस मिशन में कई जोखिम भी हैं।
- वापसी के समय 40,000 किमी/घंटा की रफ्तार।
- 3000°C तक तापमान।
- अंतरिक्ष रेडिएशन का खतरा।
भारत का क्या है रोल?
भारत भी इस मिशन से जुड़ा हुआ है। ISRO ने Artemis Accords पर साइन किया है। इस मिशन की सफलता से भारत के चंद्रयान मिशनों और भविष्य के स्पेस स्टेशन प्रोजेक्ट को भी फायदा मिलेगा।
मंगल की ओर पहला कदम
Artemis II सिर्फ एक मिशन नहीं है, बल्कि भविष्य की तैयारी है। इसके बाद Artemis III में इंसान चांद के दक्षिणी ध्रुव पर कदम रखेगा। नासा का अंतिम लक्ष्य Mars पर इंसानों को भेजना है। चांद पर बेस बनाकर मंगल मिशन को आसान बनाया जाएगा।
नई अंतरिक्ष दौड़ अमेरिका vs चीन
बता दें कि आज अंतरिक्ष एक नई प्रतिस्पर्धा का मैदान बन चुका है। एक तरफ NASA है, तो दूसरी तरफ CNSA तेजी से आगे बढ़ रहा है। जिसमें दोनों देशों की नजर चांद के दक्षिणी ध्रुव पर है, जहां पानी (Water Ice) मिलने की संभावना है। यह भविष्य में अंतरिक्ष मिशनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण संसाधन साबित हो सकता है।
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