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Israel-Iran War : ट्रंप की खुली चेतावनी ‘असली हमला अभी बाकी’, 4-5 हफ्ते लंबी जंग के संकेत
Current image: US military commander

Israel-Iran War: पश्चिम एशिया में तनाव अपने चरम पर है. इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच जारी जंग का आज तीसरा दिन है. हालात तेजी से बदल रहे हैं और दोनों पक्षों के बीच हमले और जवाबी हमले जारी हैं.अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने व्हाइट हाउस में बयान देते हुए साफ कहा है कि यह जंग 4-5 हफ्ते तक चल सकती है. उन्होंने यह भी जोड़ा कि अमेरिका के पास इससे भी ज्यादा समय तक सैन्य कार्रवाई करने की क्षमता है.

“सबसे बड़ा हमला अभी बाकी”

ट्रंप ने CNN को दिए इंटरव्यू में कहा कि अमेरिका ने अभी पूरी ताकत से हमला शुरू नहीं किया है.उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, “ईरान पर अभी सबसे बड़ा हमला बाकी है.” व्हाइट हाउस में दिए बयान में उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना ईरान में बड़े स्तर पर सैन्य कार्रवाई कर रही है और दुनिया की सबसे बड़ी सेना होने के नाते अमेरिका अपनी पूरी क्षमता का इस्तेमाल कर सकता है. यह बयान ऐसे समय आया है जब क्षेत्र में लगातार बमबारी और मिसाइल हमलों की खबरें आ रही हैं.

तेहरान समेत कई इलाकों में धमाके

तीसरे दिन भी ईरान की राजधानी तेहरान समेत पश्चिम एशिया के कई हिस्सों में जोरदार धमाके सुने गए. हवाई हमलों के कारण कई इलाकों में धुआं और मलबा देखा गया. अल-जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और इजराइल ने मिलकर अब तक ईरान के 1000 से ज्यादा ठिकानों पर हमले किए हैं. शुरुआती 30 घंटों में 2000 से ज्यादा बम गिराए गए.
इन हमलों में अब तक 555 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 700 से अधिक लोग घायल हुए हैं.अस्पतालों में घायलों की संख्या लगातार बढ़ रही है.

ईरान का पलटवार

ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई की है.अमेरिकी सेंट्रल फोर्सेस के अनुसार, ईरानी हमलों में अब तक 6 अमेरिकी सैनिक मारे जा चुके हैं. ईरानी मिसाइलें इजरायली ठिकानों और अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बना रही हैं. इससे पूरे क्षेत्र में हाई अलर्ट की स्थिति बनी हुई है.

28 फरवरी को शुरू हुई इस जंग के पहले दिन की बमबारी में ईरानी सुप्रीम लीडर Ali Khamenei के मारे जाने की खबर सामने आई थी. हालांकि इस खबर को लेकर आधिकारिक पुष्टि और विरोधाभासी बयान भी सामने आए हैं. लेकिन अगर यह सच साबित होता है, तो इसका क्षेत्रीय और वैश्विक राजनीति पर गहरा असर पड़ सकता है.

खामेनेई की मौत की खबर पर संशय

28 फरवरी को शुरू हुई इस जंग के पहले दिन की बमबारी में ईरान के सुप्रीम लीडर Ali Khamenei के मारे जाने की खबर सामने आई थी. हालांकि इस खबर को लेकर विरोधाभासी दावे भी किए जा रहे हैं. यदि यह पुष्टि होती है, तो ईरान की आंतरिक राजनीति और क्षेत्रीय समीकरणों पर गहरा असर पड़ सकता है.

अमेरिकी रक्षा मंत्री का बयान

अमेरिकी रक्षा मंत्री Pete Hegseth ने कहा है कि यह युद्ध “अंतहीन नहीं” है.उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका का उद्देश्य स्पष्ट और सीमित है. हालांकि ट्रंप के बयान और सैन्य गतिविधियों की तीव्रता को देखते हुए विश्लेषकों का मानना है कि संघर्ष लंबा खिंच सकता है.

इजराइल की रणनीति और सुरक्षा

इजराइल की सरकार का कहना है कि यह कार्रवाई “राष्ट्रीय सुरक्षा” के तहत की जा रही है. तेल अवीव और अन्य शहरों में सायरन बजने की घटनाएं बढ़ी हैं. नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी जा रही है. इजराइली सेना ने कहा है कि वह “हर खतरे का मुंहतोड़ जवाब” देगी.

क्षेत्रीय देशों की भूमिका

मध्य पूर्व के कई देश इस संघर्ष को लेकर चिंतित है. बहरीन, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्षेत्रीय नेताओं से बातचीत कर शांति की अपील की है. भारत के लिए यह इलाका ऊर्जा और व्यापार के लिहाज से बेहद अहम है.

भारत की कूटनीतिक सक्रियता

संघर्ष से उपजे चिंताजनक हालात के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बहरीन और सऊदी अरब के शीर्ष नेतृत्व से चर्चा की है.भारत के लिए मिडिल ईस्ट रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है. यहां लाखों भारतीय काम करते हैं और भारत की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आता है. ऐसे में भारत लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और क्षेत्र में शांति की अपील कर रहा है.

इस युद्ध का असर केवल क्षेत्र तक सीमित नहीं है. बल्कि कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, शेयर बाजारों में अस्थिरता, अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर असर और वैश्विक व्यापार मार्गों में चिंता पर भी पड़ा. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जंग 4-5 हफ्तों तक चली, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है.

क्या संकेत मिल रहे हैं?

ट्रंप के बयान से साफ है कि अमेरिका अभी पीछे हटने के मूड में नहीं है.“असली हमला बाकी” जैसी चेतावनी इस संघर्ष को और गंभीर बना सकती है. दूसरी ओर, ईरान भी पीछे हटता नहीं दिख रहा. पलटवार जारी है और क्षेत्रीय सहयोगी देशों की भूमिका भी अहम होती जा रही है.

अब सबकी नजरें आने वाले दिनों पर हैं. क्या कूटनीतिक प्रयास तेज होंगे? क्या संयुक्त राष्ट्र या अन्य वैश्विक शक्तियां हस्तक्षेप करेंगी? या फिर यह जंग और व्यापक रूप लेगी? फिलहाल की स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है.

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