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Israel Iran War: जंग के हालात में भारत की पहल, PM मोदी ने इजरायल के पीएम नेतन्याहू से की सीधी बात
Current image: PM मोदी ने की बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बातचीत

Israel Iran War: मिडिल ईस्ट में हालात तेजी से बिगड़ते जा रहे हैं. अमेरिका और इजरायल के हमलों के जवाब में ईरान ने पूरे क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल हमले शुरू कर दिए हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरानी मिसाइलें इजरायल के कई हिस्सों को निशाना बना रही हैं. ऐसे तनावपूर्ण माहौल में भारत ने सक्रिय कूटनीतिक पहल करते हुए शांति और स्थिरता की अपील की है. प्रधानमंत्री Narendra Modi ने इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu से फोन पर बात कर मौजूदा स्थिति की जानकारी ली और भारत की चिंताओं से अवगत कराया.

पीएम मोदी की सीधी बातचीत,नागरिकों की सुरक्षा पर किया जोर

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए बताया कि उन्होंने नेतन्याहू से क्षेत्र के हालात पर चर्चा की. उन्होंने कहा कि भारत आम नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता मानता है. पीएम मोदी ने लिखा,
“क्षेत्र के मौजूदा हालात पर बात करने के लिए प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बात की. हाल के घटनाक्रमों पर भारत की चिंताएं बताईं और इस बात पर जोर दिया कि नागरिकों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता है. भारत दुश्मनी को जल्द खत्म करने की जरूरत पर फिर से जोर देता है.”
यह बयान ऐसे समय आया है जब क्षेत्र में लगातार रॉकेट और मिसाइल हमलों की खबरें सामने आ रही हैं.

UAE के राष्ट्रपति से भी बातचीत

इजरायल के प्रधानमंत्री से बात करने के अलावा, पीएम मोदी ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति Mohamed bin Zayed Al Nahyan से भी फोन पर चर्चा की. प्रधानमंत्री ने UAE पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की और जानमाल के नुकसान पर दुख जताया.उन्होंने कहा कि भारत इस मुश्किल समय में UAE के साथ एकजुटता में खड़ा है. अपने X पोस्ट में पीएम मोदी ने लिखा कि उन्होंने
“मेरे भाई शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से बात की और UAE में रहने वाले भारतीय समुदाय का ख्याल रखने के लिए उनका धन्यवाद किया.”
यह संदेश केवल कूटनीतिक शिष्टाचार नहीं, बल्कि भारत की व्यापक क्षेत्रीय नीति का हिस्सा माना जा रहा है.

क्यों अहम है भारत की यह पहल?

मिडिल ईस्ट भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है. यहां लाखों भारतीय काम करते हैं और भारत की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से पूरा होता है. इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर तेल की कीमतों, व्यापार मार्गों और क्षेत्रीय स्थिरता पर पड़ सकता है. ऐसे में भारत का संतुलित और सक्रिय रुख बेहद अहम माना जा रहा है.
वहीं,विशेषज्ञों का कहना है कि भारत ने हमेशा से “संवाद और शांति” की नीति अपनाई है. वर्तमान संकट में भी भारत न तो किसी पक्ष का खुलकर समर्थन कर रहा है और न ही किसी के खिलाफ बयान दे रहा है, बल्कि तनाव कम करने और नागरिकों की सुरक्षा पर जोर दे रहा है.

क्षेत्र में क्या हो रहा है?

हालिया घटनाक्रम के अनुसार, अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान से जुड़े ठिकानों पर हमले किए गए. इसके जवाब में ईरान ने अमेरिकी सैन्य अड्डों और इजरायल के ठिकानों को निशाना बनाना शुरू किया. मिसाइल हमलों और एयर डिफेंस सिस्टम के सक्रिय होने से पूरे क्षेत्र में हाई अलर्ट की स्थिति है.वहीं,कई देशों ने अपने नागरिकों के लिए ट्रैवल एडवाइजरी जारी की है.

भारतीय समुदाय की सुरक्षा

UAE, इजरायल और खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक रहते हैं. ऐसे में भारत सरकार का पहला फोकस वहां रह रहे भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है. विदेश मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, भारतीय दूतावास हालात पर नजर रखे हुए हैं और जरूरत पड़ने पर सहायता उपलब्ध कराई जाएगी. प्रधानमंत्री द्वारा UAE नेतृत्व को धन्यवाद देना इस बात का संकेत है कि भारत अपने प्रवासी नागरिकों की सुरक्षा को लेकर सजग है.

वैश्विक प्रतिक्रिया

संयुक्त राष्ट्र और कई अन्य देशों ने भी दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है. अमेरिका, यूरोप और एशियाई देशों की सरकारें हालात पर करीबी नजर रखे हुए हैं. विश्लेषकों का मानना है कि अगर तनाव लंबा खिंचता है, तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार पर पड़ेगा.

भारत की संतुलित विदेश नीति

भारत ने पिछले कुछ वर्षों में इजरायल, UAE और अन्य खाड़ी देशों के साथ अपने संबंध मजबूत किए हैं. साथ ही, ईरान के साथ भी भारत के ऐतिहासिक और रणनीतिक संबंध रहे हैं. ऐसे में भारत की कोशिश है कि वह सभी पक्षों के साथ संवाद बनाए रखे और किसी भी तरह के व्यापक क्षेत्रीय युद्ध को रोकने के प्रयासों में सकारात्मक भूमिका निभाए.

तेल बाजार और शेयर बाजार पर असर

मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है. निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं. भारतीय शेयर बाजार भी वैश्विक संकेतों से प्रभावित हो सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि यदि हालात जल्दी सामान्य नहीं होते, तो महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है.

आगे क्या?

मौजूदा हालात बेहद संवेदनशील हैं. आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि क्या कूटनीतिक प्रयास तनाव को कम कर पाएंगे या क्षेत्र में संघर्ष और बढ़ेगा. फिलहाल, प्रधानमंत्री मोदी की पहल को एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो यह दर्शाता है कि भारत क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के पक्ष में खड़ा है.

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Author

  • Sakshi Raj

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