
Bankipur Assembly By Election: बिहार की बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को बड़ा झटका लगा है। बता दें की पार्टी के घोषित उम्मीदवार अभिषेक कुमार सिन्हा (बंटी) ने नामांकन दाखिल करने के अगले ही दिन अपना नामांकन वापस लेने का फैसला किया है। जिसमें उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी को पत्र लिखकर चुनाव लड़ने में असमर्थता जताई और इसकी वजह पारिवारिक कारण बताई।
मिली जानकारी के अनुसार, अभिषेक सिन्हा के इस फैसले ने चुनावी माहौल को अचानक बदल दिया है। क्योंकि गुरुवार को उन्होंने पूरे NDA नेतृत्व की मौजूदगी में नामांकन दाखिल किया था और शुक्रवार को चुनाव मैदान से हटने का ऐलान कर दिया है। वहीं, अब इस सीट पर BJP की अगली रणनीति को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है।
पारिवारिक कारणों का दिया हवाला
अभिषेक कुमार सिन्हा ने अपने पत्र में कहा कि वह निजी और पारिवारिक परिस्थितियों के वजह से चुनाव नहीं लड़ सकते। जिसमें उन्होंने पार्टी नेतृत्व का आभार जताते हुए कहा कि बीजेपी ने उन पर भरोसा जताकर उन्हें एनडीए का उम्मीदवार बनाया, जिसके लिए वह हमेशा आभारी रहेंगे। उन्होंने कहा कि वह भले ही चुनाव नहीं लड़ पाएंगे, लेकिन एक समर्पित और निष्ठावान कार्यकर्ता के रूप में पहले की तरह संगठन की सेवा करते रहेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका फैसला पूरी तरह व्यक्तिगत कारणों से लिया गया है।
एक दिन पहले ही किया था नामांकन
गौरतलब है कि बीजेपी ने कुछ दिन पहले ही युवा नेता अभिषेक कुमार सिन्हा को बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के लिए अपना उम्मीदवार घोषित किया था। इसके बाद गुरुवार को उन्होंने अपना नामांकन दाखिल किया।
नामांकन के दौरान एनडीए के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। इनमें बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी, पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद, जेडीयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा और एलजेपी (रामविलास) की सांसद शांभवी चौधरी शामिल थीं। इससे साफ संकेत मिला था कि एनडीए इस सीट को लेकर पूरी ताकत झोंक रहा है। लेकिन अगले ही दिन नामांकन वापस लेने के फैसले ने सभी को चौंका दिया।
BJP की ओर से नहीं आया आधिकारिक बयान
अभिषेक सिन्हा के नामांकन वापस लेने के बाद बीजेपी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। जिसमें पार्टी ने यह भी स्पष्ट नहीं किया है कि अब बांकीपुर सीट से नया उम्मीदवार उतारा जाएगा या आगे की रणनीति क्या होगी।
राजनीतिक एक्सपर्ट्स का कहना है कि पार्टी जल्द ही नए उम्मीदवार के नाम का ऐलान कर सकती है, क्योंकि नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख अभी बाकी है।
क्यों हो रहा है बांकीपुर उपचुनाव?
बांकीपुर विधानसभा सीट बीजेपी के वरिष्ठ नेता नितिन नवीन के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। इसी कारण यहां उपचुनाव कराया जा रहा है।
भारत निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार—
- नामांकन की अंतिम तिथि – 13 जुलाई
- मतदान – 30 जुलाई
- मतगणना – 3 अगस्त
चुनावी मुकाबला इसलिए भी खास
दरअसल इस बार बांकीपुर उपचुनाव केवल BJP या NDA के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे बिहार की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि इस सीट से चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर (पीके) भी मैदान में हैं।
प्रशांत किशोर लंबे समय तक विभिन्न राजनीतिक दलों के चुनावी अभियान की रणनीति तैयार करते रहे हैं। अब वह खुद चुनावी मैदान में उतरकर जनता के बीच प्रचार कर रहे हैं। वह लगातार घर-घर जाकर लोगों से संपर्क कर रहे हैं और अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। उनकी मौजूदगी के कारण यह उपचुनाव राज्य ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी चर्चा का विषय बन गया है।
वीना मानवी भी आजमा रहीं किस्मत
बांकीपुर सीट पर सामाजिक कार्यकर्ता और पुरुष अधिकार संगठन की राष्ट्रीय अध्यक्ष वीना मानवी भी चुनाव लड़ रही हैं।
वीना मानवी को सामाजिक मुद्दों पर मुखर आवाज के रूप में जाना जाता है। इस बार वह तेज प्रताप यादव की पार्टी जनशक्ति जनता दल के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरी हैं। उनका चुनाव अभियान ओबीसी, दलित और अल्पसंख्यक मतदाताओं पर केंद्रित है। वह लगातार जनसंपर्क अभियान चला रही हैं और खुद को आम लोगों की आवाज बताकर समर्थन मांग रही हैं।
अभिषेक सिन्हा के फैसले से बदले समीकरण
राजनीतिक एक्सपर्ट्स का मानना है कि अभिषेक सिन्हा के चुनाव से हटने के बाद बांकीपुर का मुकाबला पहले से अधिक दिलचस्प हो गया है। यदि बीजेपी नया उम्मीदवार घोषित करती है तो उसे कम समय में चुनाव प्रचार करना होगा। दूसरी ओर विपक्षी दल इस घटनाक्रम को मुद्दा बनाकर जनता के बीच जा सकते हैं। हालांकि एनडीए का संगठन मजबूत माना जाता है और पार्टी नेतृत्व इस सीट को हर हाल में जीतने की कोशिश करेगा।
आखिर क्या होगा BJP का अगला कदम?
ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि बीजेपी किसे नया उम्मीदवार बनाएगी। पार्टी के पास नामांकन की अंतिम तारीख तक नया चेहरा उतारने का मौका है।
राजनीतिक एक्सपर्ट्स का मानना है कि बीजेपी स्थानीय संगठन और जातीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए ऐसा उम्मीदवार उतार सकती है जो कम समय में चुनावी माहौल बना सके। पार्टी की रणनीति पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
बांकीपुर सीट का राजनीतिक महत्व
बांकीपुर विधानसभा सीट लंबे समय से बिहार की प्रमुख राजनीतिक सीटों में गिनी जाती है। राजधानी पटना का हिस्सा होने के कारण यहां का चुनाव हमेशा चर्चा में रहता है। इस सीट के नतीजों को राज्य की राजनीतिक दिशा का संकेत भी माना जाता है। इसलिए सभी प्रमुख दल यहां पूरी ताकत के साथ चुनाव लड़ते हैं।
इस बार प्रशांत किशोर, वीना मानवी और बीजेपी के नए उम्मीदवार की संभावित एंट्री के कारण मुकाबला और भी रोचक हो सकता है।
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