Skip to main content Scroll Top
Ram Mandir Donation Update: चढ़ावा चोरी के बाद बदली राम मंदिर की व्यवस्था, अब एक ही शिफ्ट में होगी दान की गिनती
Current image: राम मंदिर में चढ़ावे की गणना की नई व्यवस्था

Ram Mandir Donation Update: अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे की गणना की व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। हाल में सामने आए चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितता और व्यवस्था को अधिक पारदर्शी एवं व्यवस्थित बनाने की कोशिशों के बीच अब दान की गिनती दो शिफ्ट के बजाय एक ही शिफ्ट में की जा रही है। यह नई व्यवस्था फिलहाल पायलट (ट्रायल) आधार पर लागू की गई है और इसका उद्देश्य पूरी प्रक्रिया को बैंकिंग समय के भीतर पूरा करना है। मंदिर प्रशासन और संबंधित बैंक अधिकारियों का कहना है कि नई व्यवस्था से चढ़ावे की गिनती अधिक सुव्यवस्थित होगी और कार्यप्रणाली में बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सकेगा।

सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक होगी गिनती

नई व्यवस्था के तहत अब चढ़ावे की गणना सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक लगातार एक ही शिफ्ट में की जा रही है। पहले यह काम दो अलग-अलग पालियों में पूरा होता था। पहली पाली सुबह से दोपहर तक और दूसरी दोपहर से रात तक चलती थी। अब पूरे दिन की गिनती एक ही समय-सीमा के भीतर पूरी करने का प्रयास किया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि इससे बैंकिंग प्रक्रिया के साथ बेहतर तालमेल बैठाया जा सकेगा।

क्यों बदली गई व्यवस्था?

सूत्रों के अनुसार, हाल ही में मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष और बैंक अधिकारियों के बीच हुई बैठक में चढ़ावे की गिनती की मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा की गई। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि यदि पूरी प्रक्रिया बैंकिंग समय के भीतर पूरी हो जाए तो नकदी के प्रबंधन और जमा करने में आसानी होगी। इसी उद्देश्य से एकल शिफ्ट प्रणाली को परीक्षण के तौर पर शुरू किया गया है। हालांकि मंदिर ट्रस्ट ने इसे सुरक्षा और कार्यकुशलता बढ़ाने की दिशा में एक प्रशासनिक कदम बताया है।

पहले कैसे होती थी चढ़ावे की गिनती?

नई व्यवस्था लागू होने से पहले चढ़ावे की गिनती दो चरणों में होती थी।

  • पहली शिफ्ट: सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक
  • दूसरी शिफ्ट: दोपहर 2 बजे से रात 8 बजे तक

इस व्यवस्था में अलग-अलग कर्मचारियों की टीमें काम करती थीं। अब दोनों पालियों को मिलाकर पूरे काम को एक ही शिफ्ट में पूरा किया जा रहा है।

कम कर्मचारियों के साथ हो रहा काम

नई व्यवस्था लागू होने के बाद कम कर्मचारियों के साथ भी गिनती का काम जारी है। बैंक अधिकारियों का कहना है कि नई प्रणाली में उपलब्ध स्टाफ के साथ भी कार्य सुचारु रूप से चल रहा है और किसी प्रकार की बाधा नहीं आई है। प्रशासन का उद्देश्य प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना है, न कि केवल कर्मचारियों की संख्या कम करना।

कर्मचारियों की प्रतिक्रिया भी आई सामने

सूत्रों के अनुसार, नई व्यवस्था सभी कर्मचारियों को पसंद नहीं आई। बताया जा रहा है कि कुछ आउटसोर्स कर्मचारियों ने नई ड्यूटी टाइमिंग के कारण काम छोड़ने का निर्णय लिया। कर्मचारियों का कहना है कि पहले दो शिफ्ट होने के कारण उन्हें बाकी समय में अन्य काम करने का अवसर मिल जाता था, जिससे अतिरिक्त आय भी होती थी। अब पूरे दिन की ड्यूटी होने से उनके लिए दूसरी नौकरी करना संभव नहीं रह गया है। हालांकि, इस संबंध में कोई आधिकारिक सूची जारी नहीं की गई है।

बैंक ने क्या कहा?

बैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कर्मचारियों के सामूहिक इस्तीफे जैसी खबरों का खंडन किया है। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था फिलहाल परीक्षण के तौर पर लागू की गई है। अधिकारी के अनुसार, जो कर्मचारी नई समय-सारिणी के अनुसार काम करना चाहते हैं, वे अपनी सेवाएं दे रहे हैं और कार्य सामान्य रूप से चल रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बैंक की प्राथमिकता चढ़ावे की गिनती को बैंकिंग समय के भीतर पूरा करना है।

पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर

मंदिर प्रशासन का मानना है कि नई व्यवस्था से पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनेगी। चढ़ावे की गिनती और बैंक में जमा करने के बीच समय कम होने से नकदी प्रबंधन भी बेहतर होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े धार्मिक स्थलों पर आधुनिक और समयबद्ध व्यवस्था अपनाना प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होता है।

चढ़ावे की सुरक्षा पर विशेष ध्यान

हाल के दिनों में चढ़ावे से जुड़े विवादों के बाद मंदिर प्रशासन सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को भी मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है। हालांकि नई व्यवस्था को लेकर आधिकारिक बयान में चोरी की घटना को सीधे कारण नहीं बताया गया है, लेकिन प्रशासन का कहना है कि सभी प्रक्रियाओं को अधिक सुरक्षित और प्रभावी बनाने के लिए लगातार समीक्षा की जा रही है।

श्रद्धालुओं पर नहीं पड़ेगा असर

नई व्यवस्था का असर श्रद्धालुओं की पूजा या दर्शन व्यवस्था पर नहीं पड़ेगा। मंदिर में पहले की तरह श्रद्धालु दान-पात्र में चढ़ावा अर्पित कर सकेंगे। बदलाव केवल दान की गणना और उसके प्रशासनिक प्रबंधन से जुड़ा है।

आगे क्या होगा?

फिलहाल यह व्यवस्था ट्रायल आधार पर लागू है। यदि नई प्रणाली सफल रहती है, तो इसे स्थायी रूप से लागू किया जा सकता है। मंदिर ट्रस्ट और बैंक अधिकारी आने वाले दिनों में इसके परिणामों की समीक्षा करेंगे और आवश्यकता होने पर आगे के निर्णय लेंगे।

Read Related News: भारत-न्यूजीलैंड संबंधों को नई रफ्तार, पीएम मोदी और क्रिस्टोफर लक्सन की द्विपक्षीय वार्ता में कई अहम मुद्दों पर हुई चर्चा

Author

  • Sakshi Raj

    A passionate Content Writer with hand on experience in creating a SEO Friendly content. Turning a Complex topics into Simple articles that connect with readers.

Related Posts

लेटेस्ट ➤

Advertising Banner
305x250