
Rabri Devi: बिहार की राजनीति में एक बार फिर सरकारी आवास को लेकर सियासी विवाद गहरा गया है. पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की वरिष्ठ नेता राबड़ी देवी ने पटना स्थित अपने लंबे समय से आवंटित सरकारी आवास 10 सर्कुलर रोड को खाली करने से साफ इनकार कर दिया है. भवन निर्माण विभाग की ओर से तीसरा नोटिस जारी किए जाने के बाद राबड़ी देवी ने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि सरकार आवास खाली कराना चाहती है तो फोर्स बुलाकर खाली करवा ले. राबड़ी देवी के इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है. सत्ता पक्ष इसे नियमों का पालन कराने की प्रक्रिया बता रहा है, जबकि विपक्ष इसे राजनीतिक प्रतिशोध और दबाव की राजनीति करार दे रहा है.
क्या है पूरा मामला?
पटना के वीवीआईपी इलाके में स्थित 10 सर्कुलर रोड बिहार की राजनीति का एक चर्चित पता रहा है. वर्ष 2005 में मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद भी राबड़ी देवी और लालू प्रसाद यादव का परिवार लंबे समय से इसी आवास में रह रहा है. भवन निर्माण विभाग के अनुसार नवंबर 2025 में विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष होने के नाते राबड़ी देवी को 39 हार्डिंग रोड स्थित नया सरकारी आवास आवंटित कर दिया गया था. विभाग का कहना है कि नया आवास मिलने के बाद पुराने आवास को खाली करना नियमों के तहत आवश्यक है. लेकिन विभाग के कई नोटिसों के बावजूद 10 सर्कुलर रोड स्थित बंगला अब तक खाली नहीं किया गया है.
राबड़ी देवी का सख्त रुख
दिल्ली से पटना लौटने के बाद मीडिया से बातचीत में राबड़ी देवी ने स्पष्ट कहा कि वह किसी भी हालत में 10 सर्कुलर रोड आवास नहीं छोड़ेंगी. उन्होंने कहा कि सरकार को जो करना है करे. यदि प्रशासन को बंगला खाली कराना है तो फोर्स भेज दे, लेकिन वह स्वयं इसे खाली नहीं करेंगी. राबड़ी देवी के इस बयान को राजनीतिक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है. उनका कहना है कि यह केवल आवास का मुद्दा नहीं बल्कि राजनीतिक सम्मान और अधिकारों से जुड़ा मामला भी है.
तीसरा नोटिस जारी
भवन निर्माण विभाग ने शुक्रवार को राबड़ी देवी को तीसरा नोटिस जारी किया. नोटिस में कहा गया है कि 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी आवास अब पशुपालन मंत्री नंदकिशोर राम को आवंटित किया जा चुका है. विभाग ने आवास खाली करने के लिए निर्धारित समय सीमा का हवाला देते हुए जल्द कब्जा सौंपने की मांग की है. अधिकारियों का कहना है कि सरकारी आवासों का आवंटन नियमों के तहत किया जाता है और किसी भी व्यक्ति को निर्धारित अवधि से अधिक समय तक आवास रखने की अनुमति नहीं दी जा सकती.
39 हार्डिंग रोड पहले ही हो चुका है आवंटित
सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार नेता प्रतिपक्ष के तौर पर राबड़ी देवी को 39 हार्डिंग रोड स्थित आवास आवंटित किया जा चुका है. यह बंगला विशेष रूप से नेता प्रतिपक्ष के लिए निर्धारित श्रेणी में आता है. विभाग का दावा है कि पिछले छह महीनों से लगातार आग्रह किया जा रहा है कि वे नए आवास में स्थानांतरित हो जाएं, लेकिन अभी तक प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है. सरकारी अधिकारियों के अनुसार आवास आवंटन व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखने के लिए पुराने आवास को खाली कराना जरूरी है.
बिहार की राजनीति का प्रतीक रहा है 10 सर्कुलर रोड
10 सर्कुलर रोड सिर्फ एक सरकारी बंगला नहीं बल्कि बिहार की राजनीति का महत्वपूर्ण केंद्र भी रहा है. लालू प्रसाद यादव के मुख्यमंत्री काल से लेकर राबड़ी देवी के शासन और उसके बाद भी यह पता राष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का विषय बना रहा. करीब दो दशकों से अधिक समय से यह आवास लालू परिवार की राजनीतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा है. कई महत्वपूर्ण राजनीतिक बैठकें, रणनीतियां और चुनावी फैसले इसी परिसर से जुड़े रहे हैं. यही वजह है कि यह मामला केवल प्रशासनिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं रह गया बल्कि राजनीतिक महत्व भी हासिल कर चुका है.
पहले भी भेजा गया था नोटिस
यह पहली बार नहीं है जब विभाग ने राबड़ी देवी को नोटिस जारी किया हो. लगभग एक महीने पहले भी उन्हें आवास खाली करने के लिए आधिकारिक पत्र भेजा गया था. उस समय भी विभाग ने स्पष्ट किया था कि 39 हार्डिंग रोड का बंगला उन्हें उपलब्ध कराया जा चुका है और 10 सर्कुलर रोड को खाली करना अनिवार्य है. हालांकि उस नोटिस के बाद भी स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया.
क्या सामान शिफ्ट किया जा रहा है?
सूत्रों के मुताबिक पिछले कुछ महीनों से बंगले का कुछ सामान चरणबद्ध तरीके से अन्य स्थानों पर स्थानांतरित किया जा रहा है. हालांकि आधिकारिक तौर पर परिवार की ओर से आवास खाली करने को लेकर कोई सहमति नहीं दिखाई गई है. राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कुछ हिस्सों का उपयोग कम किया जा रहा है, लेकिन पूरा आवास अभी भी परिवार के कब्जे में है.
सत्ता पक्ष का क्या कहना है?
राज्य सरकार और भवन निर्माण विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह पूरी तरह प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया है. इसमें किसी भी तरह का राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं है. अधिकारियों के अनुसार सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों, मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों के लिए आवास आवंटन के स्पष्ट नियम हैं. यदि किसी को नया आवास आवंटित किया जाता है तो पुराने आवास को निर्धारित समय के भीतर खाली करना अनिवार्य होता है. सरकार का दावा है कि नियम सभी के लिए समान हैं और किसी को विशेष छूट नहीं दी जा सकती.
विपक्ष ने उठाए सवाल
दूसरी ओर आरजेडी और विपक्षी दलों ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं. पार्टी नेताओं का कहना है कि सरकार जानबूझकर इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रही है. कुछ नेताओं का आरोप है कि विपक्ष के वरिष्ठ नेताओं पर दबाव बनाने के लिए प्रशासनिक कार्रवाई का सहारा लिया जा रहा है. हालांकि सरकार इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे नियमित प्रक्रिया बता रही है.
कानूनी पहलू क्या कहते हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार सरकारी आवास का आवंटन और खाली कराने की प्रक्रिया स्पष्ट नियमों के तहत संचालित होती है. यदि कोई व्यक्ति निर्धारित समय सीमा के बाद भी आवास खाली नहीं करता तो विभाग प्रशासनिक कार्रवाई कर सकता है. ऐसे मामलों में अंतिम विकल्प के रूप में बेदखली की कानूनी प्रक्रिया भी अपनाई जा सकती है. हालांकि आमतौर पर प्रशासन पहले नोटिस, संवाद और वैकल्पिक व्यवस्था के माध्यम से समाधान निकालने का प्रयास करता है.
सम्राट चौधरी की भूमिका पर चर्चा
राबड़ी देवी ने अपने बयान में उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि यदि सरकार बंगला खाली कराना चाहती है तो फोर्स बुलाकर कार्रवाई कर सकती है. उनके इस बयान के बाद राजनीतिक बहस तेज हो गई है। विपक्ष इसे राजनीतिक टकराव का संकेत मान रहा है जबकि सत्ता पक्ष इसे अनावश्यक बयानबाजी बता रहा है.
आने वाले दिनों में क्या होगा?
अब सबकी नजरें भवन निर्माण विभाग और राज्य सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं. यदि आवास खाली नहीं किया जाता है तो विभाग आगे की कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई कर सकता है. वहीं राबड़ी देवी के सख्त रुख को देखते हुए यह मामला आने वाले दिनों में और अधिक राजनीतिक रंग ले सकता है.
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