
Bangladesh Illegal Infiltration: भारत-बांग्लादेश सीमा से अवैध घुसपैठ को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। बताया जा रहा है की पश्चिम बंगाल में चल रही कार्रवाई के दौरान कई बांग्लादेशी घुसपैठियों ने ऐसे दावे किए हैं, जिन्होंने सुरक्षा एजेंसियों को भी चौंका दिया है। जिसमें घुसपैठियों का कहना है कि दलालों और सीमा पर सक्रिय नेटवर्क की मदद से वे महज 10 मिनट में भारत की सीमा में प्रवेश कर जाते थे। इसके बदले उनसे 7 हजार से लेकर 20 हजार रुपये तक वसूले जाते थे।
जानकारी के अनुसार, पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन और मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के सख्त रुख के बाद अवैध बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ अभियान तेज कर दिया गया है। सीमावर्ती जिलों में लगातार चेकिंग चल रही है और बड़ी संख्या में लोग वापस सीमा की ओर लौट रहे हैं। इसी दौरान कई घुसपैठियों ने भारत में प्रवेश के तरीके, फर्जी दस्तावेज और राजनीतिक संरक्षण को लेकर चौंकाने वाले दावे किए हैं।
10 मिनट में पार कर लेते थे सीमा
मिली जानकारी के अनुसार, घुसपैठियों ने बताया कि सीमा पार कराने का पूरा काम दलालों के जरिए होता था। जिसमें ये दलाल बीएसएफ की गश्त पर नजर रखते थे और जिस समय पेट्रोलिंग में गैप मिलता था, उसी दौरान लोगों को सीमा पार करवा दिया जाता था। एक बांग्लादेशी नागरिक ने बताया कि कई बार पूरी रात इंतजार करना पड़ता था, जबकि कभी-कभी सिर्फ 10 मिनट में सीमा पार करा दी जाती थी। घुसपैठ के लिए अलग-अलग लोगों से अलग रकम ली जाती थी। जिसमें कुछ लोगों ने 7 से 8 हजार रुपये दिए, जबकि कई लोगों से 20 हजार रुपये तक वसूले गए।
नदी के रास्ते कराया जाता था प्रवेश
ऐसे में घुसपैठियों ने खुलासा किया कि सीमा पार कराने के लिए नदी वाले इलाकों का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता था। जिसमें एक व्यक्ति का कहना है कि उसे और उसके भाई-बहनों को बांग्लादेश के कुश्तिया इलाके से आधी रात में नाव के जरिए नदी पार कर भारत लाया गया। वहीँ, दूसरे व्यक्ति ने दावा किया कि सीमा पर सुरक्षा बलों की मौजूदगी के बावजूद उसे सिर्फ 2 हजार रुपये में भारत पहुंचा दिया गया। इन दावों ने सीमा सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
भारत आने के बाद बनवाए जाते थे दस्तावेज
घुसपैठियों के दावों के अनुसार, भारत में प्रवेश करने के बाद सबसे पहले उनके लिए पहचान पत्र और सरकारी दस्तावेज तैयार करवाए जाते थे। रिपोर्ट में दावा किया गया कि स्थानीय स्तर पर कुछ राजनीतिक कार्यकर्ताओं की मदद से आधार कार्ड, राशन कार्ड और वोटर आईडी बनवाई जाती थी।
बेंगलुरु में रह रहे एक बांग्लादेशी नागरिक ने दावा किया कि भारत आने के कुछ समय बाद ही उसके लिए सभी जरूरी दस्तावेज तैयार कर दिए गए थे। इन दावों के सामने आने के बाद प्रशासन ने दस्तावेज बनाने वाले नेटवर्क की जांच भी तेज कर दी है।
सीमावर्ती जिलों में बढ़ाई गई निगरानी
पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती इलाकों में अब सुरक्षा एजेंसियों ने निगरानी और सख्त कर दी है। बीएसएफ और स्थानीय पुलिस संयुक्त अभियान चला रही है। बता दें की कई इलाकों में अतिरिक्त चेक पोस्ट बनाए गए हैं और संदिग्ध लोगों की पहचान की जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, सीमावर्ती गांवों में रहने वाले लोगों से भी पूछताछ की जा रही है ताकि अवैध घुसपैठ में शामिल नेटवर्क की जानकारी जुटाई जा सके। सुरक्षा एजेंसियां अब उन दलालों की तलाश में हैं, जो सीमा पार कराने का काम करते थे।
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी का सख्त संदेश
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने अवैध बांग्लादेशी घुसपैठ को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया है। जिसमें उन्होंने साफ कहा है कि राज्य में अवैध रूप से रह रहे किसी भी बांग्लादेशी नागरिक को शरण नहीं दी जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पकड़े गए घुसपैठियों को कोर्ट में पेश करने के बजाय सीधे बीएसएफ को सौंपा जाएगा ताकि उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया तेज हो सके। जिसमें उन्होंने प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि सीमा से जुड़े जिलों में विशेष अभियान लगातार जारी रखा जाए।
अमित शाह ने भी दिया बड़ा बयान
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी इस मुद्दे पर बड़ा बयान दिया है। जिसमें उन्होंने कहा कि जो लोग स्वेच्छा से वापस लौट रहे हैं, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी। हालांकि, अवैध तरीके से भारत में रह रहे लोगों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।
गृह मंत्रालय ने सीमा सुरक्षा एजेंसियों को चौकसी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा फर्जी दस्तावेज बनाने वाले गिरोहों पर भी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
राजनीतिक माहौल भी गरमाया
अवैध घुसपैठ का मुद्दा अब राजनीतिक बहस का बड़ा विषय बन गया है। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि वर्षों से सीमावर्ती इलाकों में घुसपैठ को नजरअंदाज किया गया। वहीं सत्ताधारी पक्ष का कहना है कि अब पहली बार बड़े स्तर पर कार्रवाई हो रही है।
राजनीतिक एक्सपर्ट्स का मानना है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में यह मुद्दा आने वाले समय में और बड़ा रूप ले सकता है। खासकर सीमावर्ती जिलों में इसका असर साफ दिखाई दे रहा है।
सुरक्षा एजेंसियों के सामने बड़ी चुनौती
भारत-बांग्लादेश सीमा करीब 4 हजार किलोमीटर लंबी है, जिसमें कई इलाके नदी, जंगल और ग्रामीण क्षेत्रों से होकर गुजरते हैं। ऐसे में हर समय पूरी निगरानी रखना चुनौतीपूर्ण माना जाता है। हालांकि, हाल के खुलासों के बाद सुरक्षा एजेंसियां अब टेक्नोलॉजी और स्थानीय इंटेलिजेंस की मदद से निगरानी मजबूत करने पर जोर दे रही हैं। ड्रोन कैमरे, नाइट विजन डिवाइस और अतिरिक्त पेट्रोलिंग की मदद से सीमा सुरक्षा बढ़ाई जा रही है।






