
West Bengal Politics: पश्चिम बंगाल की राजनीति में विधानसभा चुनाव 2026 के बाद बड़ा सियासी उथल-पुथल देखने को मिल रहा है। चुनाव में करारी हार के बाद अब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के अंदरूनी विवाद खुलकर सामने आने लगे हैं। जिसमें पार्टी के 100 से ज्यादा पार्षदों के इस्तीफे और वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी ने ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। वहीं, इस बीच बारासात से सांसद Kakoli Ghosh Dastidar समेत छह TMC विधायक भाजपा सरकार की प्रशासनिक समीक्षा बैठक में पहुंचे, जिससे बंगाल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
100 से ज्यादा पार्षदों के इस्तीफे से बढ़ा संकट
जानकारी के लिए बता दें की चुनाव हार के बाद TMC में लगातार असंतोष बढ़ता जा रहा है। नगर निकायों में पार्टी नेताओं के बीच खींचतान और गुटबाजी अब खुलकर सामने आ रही है। जिसमें कई जिलों में संगठन कमजोर पड़ता दिखाई दे रहा है। इसी नाराजगी के बीच 100 से ज्यादा पार्षदों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया, जिससे पार्टी नेतृत्व पर दबाव बढ़ गया है।
राजनीतिक एक्सपर्ट्स का कहना है कि चुनावी हार के बाद पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर सवाल उठने लगे हैं। जिसमें कई स्थानीय नेता संगठन में उपेक्षा और निर्णय प्रक्रिया में शामिल न किए जाने से नाराज बताए जा रहे हैं।
काकोली घोष ने खोला मोर्चा
बारासात सांसद Kakoli Ghosh Dastidar ने भी पार्टी नेतृत्व के खिलाफ खुलकर नाराजगी जाहिर की है। दरअसल हाल ही में उन्हें संसदीय दल के मुख्य सचेतक पद से हटाया गया था, जिसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी व्यक्त की। जिसमें उन्होंने लिखा कि चार दशक तक पार्टी के प्रति वफादार रहने के बावजूद उन्हें ऐसा व्यवहार मिला, जिसकी उन्होंने उम्मीद नहीं की थी। इसके बाद उन्होंने जिला अध्यक्ष पद से भी इस्तीफा दे दिया। काकोली घोष की नाराजगी को TMC के भीतर बढ़ते असंतोष का बड़ा संकेत माना जा रहा है।
BJP की प्रशासनिक बैठक में पहुंचे TMC विधायक
बता दें की आज मंगलवार को सबसे ज्यादा चर्चा उस समय हुई जब TMC के छह विधायक भाजपा सरकार की प्रशासनिक समीक्षा बैठक में शामिल हुए। यह बैठक पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari की मौजूदगी में आयोजित की गई थी।
बैठक में उत्तर 24 परगना, नदिया और हुगली जिलों के अधिकारी और जनप्रतिनिधि शामिल हुए। इसमें देगंगा से अनीसुर रहमान बिस्वास, स्वरूपनगर से बीना मंडल, हरोआ से मोहम्मद अब्दुल मतीन और बसीरहाट क्षेत्र के अन्य विधायक भी पहुंचे। TMC विधायकों की इस बैठक में मौजूदगी को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। विपक्ष इसे पार्टी के भीतर टूट का संकेत बता रहा है, जबकि TMC इसे विकास कार्यों से जुड़ा सामान्य प्रशासनिक कार्यक्रम बता रही है।
विकास के मुद्दे पर दिया जवाब
बैठक में शामिल विधायकों ने अपने इस कदम को पूरी तरह विकास कार्यों से जुड़ा बताया है। विधायक बीना मंडल ने कहा कि वह अपने क्षेत्र के विकास के लिए बैठक में शामिल हुई थीं। उनके मुताबिक जनता के हित में काम करना उनकी प्राथमिकता है।
वहीं मोहम्मद अब्दुल मतीन ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से निमंत्रण मिलने पर वह विधायक के रूप में बैठक में शामिल हुए। उन्होंने किसी भी राजनीतिक अटकल को खारिज करते हुए कहा कि उनका उद्देश्य केवल विकास योजनाओं की समीक्षा करना था।
शुभेंदु अधिकारी ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari ने इस पूरे घटनाक्रम को पश्चिम बंगाल की नई राजनीतिक संस्कृति बताया। उन्होंने कहा कि जब भाजपा विपक्ष में थी, तब उन्हें कभी प्रशासनिक बैठकों में नहीं बुलाया जाता था। लेकिन अब सरकार ने फैसला किया है कि विकास कार्यों के लिए सभी दलों के विधायकों को बुलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि जनता के हित में राजनीति से ऊपर उठकर काम करना जरूरी है। हालांकि राजनीतिक विशेषज्ञ इसे भाजपा की नई रणनीति के तौर पर भी देख रहे हैं, जिसके जरिए विपक्षी दलों के नेताओं को अपने करीब लाने की कोशिश की जा रही है।
ममता बनर्जी के लिए बढ़ी चुनौती
विधानसभा चुनाव में हार के बाद TMC पहले से दबाव में है। अब नेताओं की नाराजगी और इस्तीफों ने पार्टी नेतृत्व की चिंता और बढ़ा दी है। खासकर वरिष्ठ नेताओं का असंतोष आने वाले समय में पार्टी के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
राजनीतिक एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि पार्टी जल्द संगठनात्मक बदलाव नहीं करती, तो कई और नेता खुलकर विरोध कर सकते हैं। वहीं भाजपा इस स्थिति का फायदा उठाने की कोशिश में जुटी हुई है।
बंगाल की राजनीति में बदलते संकेत
TMC विधायकों का भाजपा सरकार की बैठक में शामिल होना बंगाल की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है। इससे यह संदेश गया है कि चुनावी हार के बाद पार्टी के भीतर असंतोष गहराता जा रहा है। हालांकि अभी किसी बड़े नेता ने पार्टी छोड़ने का ऐलान नहीं किया है, लेकिन लगातार बढ़ रही नाराजगी ने राजनीतिक माहौल गर्म कर दिया है। आने वाले दिनों में TMC संगठन में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
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