Skip to main content Scroll Top
CJI Surya Kant on Cockroach Janta Party: कॉकरोच जनता पार्टी विवाद पर चीफ जस्टिस का नया बयान, जानिए अब क्या बोले सीजेआई सूर्यकान्त
Current image: CJI Surya Kant on Cockroach Janta Party: कॉकरोच जनता पार्टी विवाद पर चीफ जस्टिस का नया बयान

CJI Surya Kant on Cockroach Janta Party: जैसे की आप जानते हैं सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ यानी (CJP) विवाद को लेकर एक बार फिर से भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत (Surya Kant) का बड़ा बयान सामने आया है। बताया जा रहा है की सुप्रीम कोर्ट में इस मामले से जुड़ी याचिका पर सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता से कहा की, “इसे इतना सेंटिमेंटली मत लें।” इसके साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल इस मामले में कोई बड़ी आपात स्थिति नहीं है और अदालत पूरे मामले को विस्तार से देखेगी।

आपकी जानकारी के लिए बता दें की यह मामला पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर लगातार चर्चा में बना हुआ है। खासतौर पर इंस्टाग्राम और अन्य प्लेटफॉर्म पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ नाम से वायरल ट्रेंड ने करोड़ों लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। ऐसे में दावा किया जा रहा है कि CJP से जुड़े पेजों और कंटेंट को अब तक 20 मिलियन से ज्यादा लोग फॉलो कर चुके हैं। आइए जानते हैं यहां पूरा मामला

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, विवाद की शुरुआत 16 मई को हुई थी, जब CJI सूर्यकांत ने कोर्ट में सुनवाई के दौरान फर्जी कानून की डिग्रियों को लेकर टिप्पणी की थी। इसके बाद सोशल मीडिया पर उनकी टिप्पणी को अलग संदर्भ में वायरल किया गया और ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ नाम से कई मीम्स, वीडियो और पोस्ट शेयर होने लगे।

हालांकि बाद में CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट किया था कि उनका निशाना युवाओं पर नहीं था, बल्कि उन लोगों पर था जो फेक और नकली डिग्रियों के जरिए कानूनी पेशे में प्रवेश कर रहे हैं। साथ ही, उन्होंने मीडिया रिपोर्टिंग के कुछ हिस्सों पर भी नाराजगी जताई थी और कहा था कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया।

सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे कथित भ्रामक नैरेटिव पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। वकील ने कहा कि कोर्ट की मौखिक टिप्पणियों को चुनिंदा तरीके से वायरल कर न्यायपालिका की छवि प्रभावित की जा रही है। इस पर Surya Kant ने कहा, “कोई इतनी बड़ी आपात स्थिति नहीं है, हम इसे देखेंगे।” कोर्ट ने मामले की विस्तृत जांच के संकेत दिए।

फर्जी कानून डिग्रियों का मुद्दा भी उठा

इस याचिका में एक और गंभीर मुद्दा उठाया गया है। इसमें बार काउंसिल ऑफ इंडिया की चेयरपर्सन द्वारा कथित तौर पर दिए गए उस बयान का भी जिक्र किया गया, जिसमें कहा गया था कि देश में 35 से 40 प्रतिशत तक कानून की डिग्रियां फर्जी हो सकती हैं।

याचिकाकर्ता ने इस मामले की सीबीआई जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि यह दावा सही है तो यह न्यायिक व्यवस्था और कानूनी शिक्षा दोनों के लिए बेहद गंभीर खतरा है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस मांग पर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है। कोर्ट ने कहा कि सभी तथ्यों की विस्तार से जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

सोशल मीडिया पर क्यों ट्रेंड कर रहा CJP?

‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (Cockroach Janata Party) नाम का ट्रेंड सोशल मीडिया पर मीम कल्चर और राजनीतिक व्यंग्य के कारण तेजी से वायरल हुआ। कई यूजर्स ने इसे मजाकिया अंदाज में इस्तेमाल किया, जबकि कुछ लोगों ने इसे न्यायपालिका की गरिमा से जोड़कर गंभीर चिंता जताई।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि सोशल मीडिया पर कोर्ट की मौखिक टिप्पणियों को संदर्भ से हटाकर वायरल करना एक नई चुनौती बनती जा रही है। इससे कई बार न्यायिक प्रक्रियाओं की गलत व्याख्या होती है और लोगों के बीच भ्रम पैदा होता है।

CJI सूर्यकांत ने पहले क्या कहा था?

16 मई की सुनवाई के बाद CJI सूर्यकांत ने साफ किया था कि उनका बयान युवाओं के खिलाफ नहीं था। उन्होंने कहा था कि उनका उद्देश्य केवल उन लोगों पर चिंता जताना था जो फर्जी डिग्रियों के सहारे वकालत जैसे पेशे में प्रवेश कर रहे हैं।जिसमें उन्होंने यह भी कहा था कि मीडिया और सोशल मीडिया पर उनके शब्दों को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया, जिससे गलत संदेश गया।

न्यायपालिका और सोशल मीडिया के बीच बढ़ती चुनौती

दरअसल बीते कुछ सालों में सोशल मीडिया का प्रभाव तेजी से बढ़ा है। कोर्ट की कार्यवाही से जुड़े छोटे वीडियो क्लिप और बयान कुछ ही मिनटों में वायरल हो जाते हैं। ऐसे में अदालतों के सामने यह चुनौती खड़ी हो रही है कि न्यायिक टिप्पणियों को गलत संदर्भ में पेश होने से कैसे रोका जाए।

कानूनी एक्सपर्ट्स का कहना है कि कोर्टरूम की मौखिक टिप्पणियां हमेशा अंतिम आदेश नहीं होतीं, लेकिन सोशल मीडिया पर उन्हें कई बार अंतिम निर्णय की तरह प्रस्तुत किया जाता है। इससे लोगों की सोच और धारणा प्रभावित होती है।

आगे क्या हो सकता है?

बता दें की फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में जल्दबाजी से बचने के संकेत दिए हैं। अदालत पहले सभी तथ्यों की जांच करेगी और फिर तय करेगी कि सोशल मीडिया पर न्यायिक टिप्पणियों के इस्तेमाल को लेकर कोई दिशा निर्देश जारी करने की जरूरत है या नहीं। इस बीच ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ विवाद सोशल मीडिया और कानूनी हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। आने वाले दिनों में इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट का रुख काफी अहम माना जा रहा है।

ये भी पढ़ें: ‘I Love Modi’ ट्रंप ने पीएम मोदी की खुलकर तारीफ की, बोले- वो बहुत अच्छे इंसान और मेरे दोस्त हैं

Author

  • Aparna Panwar

    अपर्णा पवांर, एक हिंदी कंटेंट राइटर है, जिन्होंने डिजिटल मीडिया में अपनी लेखनी से पहचान बनाई। आज वे “Khaber Aaj Ki” में हिंदी कंटेंट राइटर के पद पर काम करते हुए पत्रकारिता को अपना जुनून मानती हैं। उनके विचारों में खबरें केवल सूचनाएं नहीं, बल्कि लोगों तक सच्चाई पहुँचाने का माध्यम हैं।

Related Posts

लेटेस्ट ➤

Advertising Banner
305x250