
Sanjeev Sanyal: पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों अर्थशास्त्री संजीव सान्याल का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है। ऐसे में माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आर्थिक सलाहकार रहे संजीव सान्याल को बंगाल सरकार में बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। जिसमें उन्हें राज्य का नया वित्त मंत्री बनाया जा सकता है और नंदीग्राम सीट से चुनाव भी लड़ाया जा सकता है। बंगाल की कमजोर होती आर्थिक स्थिति और बढ़ते कर्ज के बीच भाजपा ऐसे चेहरे की तलाश में है जो अर्थव्यवस्था की गहरी समझ रखता हो। ऐसे में संजीव सान्याल अपने वैश्विक अनुभव और बंगाल से मजबूत जुड़ाव के कारण इस दौड़ में सबसे आगे बताए जा रहे हैं।
नंदीग्राम सीट छोड़ने के बाद बढ़ी चर्चा
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari ने नंदीग्राम सीट से इस्तीफा देकर भवानीपुर सीट अपने पास रखी है। इसके बाद सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा हुआ है कि नंदीग्राम से भाजपा किसे मैदान में उतारेगी। इसी बीच संजीव सान्याल का नाम सामने आने लगा। माना जा रहा है कि भाजपा नंदीग्राम जैसी महत्वपूर्ण सीट पर ऐसा उम्मीदवार उतारना चाहती है जिसकी साफ छवि हो और जो राज्य की आर्थिक बदहाली को बड़ा चुनावी मुद्दा बना सके। संजीव सान्याल इस रणनीति में फिट बैठते नजर आ रहे हैं।
कौन हैं संजीव सान्याल?
संजीव सान्याल देश के जाने-माने अर्थशास्त्री, लेखक और नीति विशेषज्ञ हैं। उनका जन्म 27 अगस्त 1970 को कोलकाता में हुआ था। वे क्रांतिकारी स्वतंत्रता सेनानी Sachindra Nath Sanyal के परिवार से संबंध रखते हैं। सचिंद्र नाथ सान्याल को भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद जैसे क्रांतिकारियों का मार्गदर्शक माना जाता है। संजीव सान्याल का पारिवारिक और सांस्कृतिक जुड़ाव बंगाल से काफी मजबूत माना जाता है। यही वजह है कि भाजपा उन्हें बंगाल की राजनीति में बड़ा चेहरा बनाने पर विचार कर सकती है।
पढ़ाई-लिखाई में भी आगे
संजीव सान्याल की शुरुआती पढ़ाई कोलकाता के प्रतिष्ठित सेंट जेम्स स्कूल और सेंट जेवियर्स स्कूल से हुई। इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के Shri Ram College of Commerce से अर्थशास्त्र में ग्रेजुएशन किया। बाद में उन्होंने दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित स्कॉलरशिप में से एक रोड्स स्कॉलरशिप हासिल की और University of Oxford से अर्थशास्त्र में मास्टर डिग्री पूरी की। उनकी शिक्षा और वैश्विक अनुभव उन्हें देश के सबसे चर्चित आर्थिक विशेषज्ञों में शामिल करता है।
बैंकिंग से सरकार तक का सफर
सरकारी जिम्मेदारियों से पहले संजीव सान्याल ने अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग सेक्टर में लंबा अनुभव हासिल किया। वे Deutsche Bank में ग्लोबल स्ट्रैटेजिस्ट और मैनेजिंग डायरेक्टर जैसे पदों पर काम कर चुके हैं। इसके बाद उन्होंने भारत सरकार के साथ काम शुरू किया। वे भारत सरकार के प्रधान आर्थिक सलाहकार के रूप में भी कार्य कर चुके हैं और कई आर्थिक सर्वेक्षण तैयार करने में उनकी अहम भूमिका रही। वर्तमान में वे प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद यानी EAC-PM के सदस्य हैं। यह परिषद प्रधानमंत्री को आर्थिक और नीतिगत मामलों पर सलाह देती है।
भाजपा क्यों मान रही मजबूत विकल्प?
पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार बनने के बाद सबसे बड़ी चुनौती राज्य की आर्थिक स्थिति को सुधारना माना जा रहा है। फिलहाल मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी खुद वित्त मंत्रालय संभाल रहे हैं। उनके पास गृह, शिक्षा, स्वास्थ्य और उद्योग जैसे कई बड़े विभाग भी हैं। ऐसे में भाजपा ऐसे विशेषज्ञ की तलाश में है जो सिर्फ राजनीति ही नहीं बल्कि अर्थव्यवस्था की भी गहरी समझ रखता हो। संजीव सान्याल को इसी वजह से मजबूत विकल्प माना जा रहा है। भाजपा इससे पहले भी विशेषज्ञ चेहरों को राजनीति में ला चुकी है। S. Jaishankar और Hardeep Singh Puri इसके बड़े उदाहरण हैं। दोनों पहले अपने-अपने क्षेत्रों के विशेषज्ञ थे और बाद में राजनीति में आए।
बंगाल की अर्थव्यवस्था पर लगातार बोलते रहे हैं सान्याल
संजीव सान्याल पिछले कुछ समय से बंगाल की आर्थिक स्थिति पर खुलकर बोलते रहे हैं। उन्होंने कई इंटरव्यू और लेखों में कहा कि बंगाल का आर्थिक पतन चिंताजनक है और राज्य को नई आर्थिक नीति की जरूरत है। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि “कोलकाता खुद नहीं मरा, उसकी हत्या की गई है और मैं इसका गवाह हूं।”उन्होंने यह भी कहा कि अगर पूर्वी भारत को दोबारा मजबूत बनाना है तो कोलकाता को फिर से आर्थिक केंद्र बनाना होगा। उनके अनुसार कोलकाता के पास ऐतिहासिक ताकत, उद्योगिक ढांचा और सांस्कृतिक क्षमता आज भी मौजूद है।
बंगाल के सामने आर्थिक चुनौतियां
पश्चिम बंगाल की आर्थिक स्थिति पिछले कुछ वर्षों में लगातार कमजोर हुई है। रिपोर्ट्स के अनुसार देश की GDP में बंगाल की हिस्सेदारी लगातार कम होती जा रही है। कभी देश की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल बंगाल अब पिछड़ता दिखाई दे रहा है। राज्य पर बढ़ता कर्ज भी सरकार के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। बताया जा रहा है कि राज्य का कर्ज 7 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा पहुंच चुका है। इसके अलावा बेरोजगारी, उद्योगों का पलायन और निवेश की कमी भी बड़ी समस्याएं हैं। ऐसे में भाजपा आर्थिक सुधारों के लिए विशेषज्ञ चेहरे पर दांव खेल सकती है।
शपथ ग्रहण में भी दिखे थे सक्रिय
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के शपथ ग्रहण समारोह में संजीव सान्याल पारंपरिक बंगाली पहनावे में नजर आए थे। उनकी पत्नी स्मिता बरुआ भी उनके साथ मौजूद थीं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा बंगाल में स्थानीय और बौद्धिक चेहरे को आगे बढ़ाकर अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है।
लेखक के रूप में भी मशहूर
संजीव सान्याल सिर्फ अर्थशास्त्री ही नहीं बल्कि चर्चित लेखक भी हैं। उनकी किताबें Land of the Seven Rivers और Revolutionaries काफी लोकप्रिय रही हैं। उनकी किताबों में भारत के इतिहास, अर्थव्यवस्था और सभ्यता पर गहरी चर्चा देखने को मिलती है।
क्या सच में बनेंगे वित्त मंत्री?
ऐसे में भाजपा की तरफ से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन राजनीतिक चर्चाओं और जानकारी के मुताबिक संजीव सान्याल का नाम सबसे आगे माना जा रहा है। अब अगर ऐसा होता है तो यह भाजपा का एक बड़ा रणनीतिक फैसला माना जाएगा। इससे पार्टी बंगाल में आर्थिक सुधार, प्रशासनिक अनुभव और बौद्धिक नेतृत्व का संदेश देने की कोशिश करेगी। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या संजीव सान्याल सच में बंगाल की राजनीति में एंट्री करेंगे और क्या उन्हें राज्य की आर्थिक कमान सौंपी जाएगी।
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