
Eknath Shinde Statement: महाराष्ट्र की राजनीति में इन दिनों ‘ऑपरेशन टाइगर’ को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। इस बीच महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख Eknath Shinde ने इन सभी अटकलों पर विराम लगाते हुए बड़ा बयान दिया है। जिसमें उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि उद्धव ठाकरे गुट के सांसदों के साथ किसी भी तरह की गुप्त बैठक नहीं हुई है और इस तरह की खबरें पूरी तरह से झूठी और भ्रामक हैं ।शिंदे ने अपील की कि बिना पुष्टि के इस तरह की सनसनीखेज खबरें न चलाई जाएं, क्योंकि इससे जनता में भ्रम फैलता है और राजनीतिक माहौल भी प्रभावित होता है।
क्या है ‘ऑपरेशन टाइगर’?
महाराष्ट्र की राजनीति में ‘ऑपरेशन टाइगर’ एक ऐसा शब्द बन गया है, जिसकी चर्चा पिछले कुछ महीनों से लगातार हो रही है। इस अभियान को लेकर यह दावा किया जा रहा था कि शिंदे गुट, Uddhav Thackeray के नेतृत्व वाले गुट के कुछ सांसदों और नेताओं को अपने साथ जोड़ने की रणनीति बना रहा है।
खबरों के अनुसार में यहां तक यह भी कहा गया कि करीब 8 सांसदों को पार्टी बदलने के लिए संपर्क किया गया है। हालांकि, अब खुद शिंदे ने इन सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया है।
गुप्त बैठक की खबरों पर शिंदे का जवाब
दरअसल हाल ही में कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि ठाणे में देर रात उद्धव गुट के कुछ सांसदों और शिंदे के बीच गुप्त बैठक हुई थी। इन खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए Eknath Shinde ने कहा कि “यूबीटी गुट के सांसदों के साथ किसी भी बैठक की खबर पूरी तरह गलत है। ऐसा कोई घटनाक्रम नहीं हुआ है। पिछले डेढ़ साल से इस तरह की अफवाहें फैलाई जा रही हैं, लेकिन इनमें कोई सच्चाई नहीं है।” जिसमें उन्होंने आगे कहा कि रिपोर्ट को जिम्मेदारी के साथ खबरें दिखानी चाहिए और केवल सनसनी फैलाने के लिए गलत सूचनाओं का प्रसार नहीं करना चाहिए।
उद्धव गुट के नेताओं ने भी किया खंडन
जानकारी के अनुसार सिर्फ शिंदे ही नहीं, बल्कि Uddhav Thackeray गुट के नेताओं ने भी इन खबरों को पूरी तरह खारिज किया है। जिसमें सांसद Arvind Sawant और Omraje Nimbalkar ने कहा कि इस तरह की खबरों में कोई सच्चाई नहीं है और ये सिर्फ राजनीतिक अफवाहें हैं। उनका कहना है कि पार्टी पूरी तरह एकजुट है और किसी भी सांसद के पार्टी छोड़ने की कोई संभावना नहीं है।
श्रीकांत शिंदे के बयान से बढ़ी थी चर्चा
‘ऑपरेशन टाइगर’ को लेकर चर्चाएं उस समय और तेज हो गई थीं, जब कल्याण से सांसद और शिंदे के बेटे Shrikant Shinde ने एक बयान दिया था। जिसमें उन्होंने कहा था कि ‘ऑपरेशन टाइगर’ पार्टी की एक बड़ी रणनीति का हिस्सा है और यह आगे भी जारी रहेगा। वहीं इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में कयास लगाए जाने लगे कि विपक्षी दलों के कई नेता शिंदे गुट में शामिल हो सकते हैं। हालांकि, अब ताजा बयान में एकनाथ शिंदे ने स्थिति स्पष्ट कर दी है।
पहले भी उठ चुका है यह मुद्दा
फरवरी 2026 में भी ‘ऑपरेशन टाइगर’ को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल मची थी। उस समय भी ऐसी खबरें सामने आई थीं कि Uddhav Thackeray गुट और कांग्रेस के कुछ नेता शिंदे की शिवसेना में शामिल हो सकते हैं।हालांकि, उस समय भी इन दावों की कोई ऑफिशियल पुष्टि नहीं हुई थी और मामला धीरे-धीरे शांत हो गया था।
संगठन मजबूत करने पर जोर
इन तमाम राजनीतिक अटकलों के बीच Eknath Shinde ने अपनी पार्टी के नेताओं को स्पष्ट संदेश दिया है कि अब ध्यान केवल संगठन को मजबूत करने और जनता के मुद्दों पर काम करने पर होना चाहिए। शिवसेना की हालिया समीक्षा बैठक में उन्होंने कहा कि चुनावों के बाद अब जमीनी स्तर पर काम तेज करना जरूरी है। उन्होंने नेताओं को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय रहें और जनता की समस्याओं का समाधान करें।
‘काम नहीं, तो पद नहीं’ की सख्त नीति
बैठक में शिंदे ने साफ चेतावनी दी कि पार्टी में ‘काम नहीं, तो पद नहीं’ का सिद्धांत सख्ती से लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जो नेता और कार्यकर्ता सक्रिय नहीं रहेंगे, उन्हें जिम्मेदारी से हटाया जा सकता है। यह बयान साफ तौर पर यह संकेत देता है कि शिंदे अब संगठन में अनुशासन और प्रदर्शन को लेकर सख्त रुख अपनाने जा रहे हैं।
चुनाव की तैयारी तेज करने के निर्देश
आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए Eknath Shinde ने पार्टी नेताओं को कई अहम निर्देश भी दिए हैं। उन्होंने कहा है कि
- मतदाता सूची की गहन समीक्षा की जाए।
- हर बूथ पर बूथ लेवल एजेंट (BLA) की नियुक्ति सुनिश्चित की जाए।
- चुनाव आयोग के विशेष पुनरीक्षण अभियान में सक्रिय भागीदारी हो।
राजनीतिक माहौल पर असर
महाराष्ट्र की राजनीति में ‘ऑपरेशन टाइगर’ जैसे मुद्दे अक्सर सियासी तापमान बढ़ा देते हैं। हालांकि, ताजा बयान के बाद यह साफ हो गया है कि फिलहाल ऐसी कोई हलचल नहीं है, जैसा कि रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा था।
राजनीतिक एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस तरह की खबरें अक्सर रणनीतिक रूप से भी फैलती हैं, ताकि विपक्ष पर दबाव बनाया जा सके या माहौल तैयार किया जा सके।
ये भी पढ़ें: Ola Electric Shares: ओला इलेक्ट्रिक के शेयरों में जबरदस्त उछाल, अप्रैल में 72% चढ़ा भाव, जानें तेजी की बड़ी वजहें






