
Blue Sparrow Missile: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच एक बार फिर से इजरायल की एक खास मिसाइल चर्चा में है। बता दें कि 28 फरवरी 2025 को ईरान की राजधानी तेहरान में हुए हमले में इजरायल ने जिस अत्याधुनिक मिसाइल का इस्तेमाल किया है, उसका नाम ब्लू स्पैरो (Blue Sparrow) है। बताया जा रहा है कि इस हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर Ali Khamenei और कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों की मौत हो गई है।
सैन्य एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह कोई साधारण मिसाइल नहीं है,बल्कि बेहद आधुनिक तकनीक से लैस हथियार है, जो पहले अंतरिक्ष के किनारे तक जाता है और फिर बेहद तेज रफ्तार से लक्ष्य पर गिरकर उसे तबाह कर देता है। इसी वजह से इसे कई एक्सपर्ट्स “मिसाइल फ्रॉम स्पेस” भी कहते हैं।
तेहरान हमले की पूरी कहानी
जानकारी के मुताबिक 28 फरवरी की सुबह इजरायल के लड़ाकू विमानों ने गुप्त मिशन शुरू किया था। जिसमें इस ऑपरेशन में इजरायली एयरफोर्स के शक्तिशाली फाइटर जेट F-15 Eagle का इस्तेमाल किया गया। वहीं, सुबह करीब 7:30 बजे (ईरान के स्थानीय समय के अनुसार) फाइटर जेट्स ने उड़ान भरी और करीब दो घंटे बाद तेहरान के पाश्चर स्ट्रीट इलाके में मौजूद खामेनेई के कंपाउंड को निशाना बनाया। बताया जाता है कि इस हमले में 30 से ज्यादा मिसाइलें दागी गईं। बता दें कि यह हमला इतना शक्तिशाली था कि कंपाउंड के अंदर मौजूद बंकर भी सुरक्षित नहीं रह पाए। इस वजह से इस हमले में ईरान के कई शीर्ष सैन्य अधिकारी भी मारे गए, जिनमें रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के कमांडर Mohammad Pakpour का नाम भी शामिल बताया जा रहा है।
‘ब्लू स्पैरो’ मिसाइल क्या है
जानकारी के लिए बता दें कि ब्लू स्पैरो इजरायल की एक अत्याधुनिक बैलिस्टिक श्रेणी की मिसाइल है। इसे इजरायल की प्रसिद्ध रक्षा कंपनी Rafael Advanced Defense Systems ने विकसित किया है।
बता दें कि इसे शुरुआत में मिसाइल को एक अलग उद्देश्य से बनाया गया था। इसे सोवियत संघ की स्कड मिसाइलों की नकल करने के लिए डिजाइन किया गया था ताकि इजरायल अपने मिसाइल डिफेंस सिस्टम की टेस्टिंग कर सके। बाद में इसमें कई तकनीकी बदलाव किए गए और इसे एक शक्तिशाली हमलावर मिसाइल में बदल दिया गया। वहीं, आज यह मिसाइल लंबी दूरी तक हमला करने और भूमिगत बंकरों को नष्ट करने में सक्षम मानी जाती है।
ब्लू स्पैरो मिसाइल की 10 बड़ी खासियतें
अंतरिक्ष की सीमा तक पहुंच
दरअसल, यह मिसाइल पहले पृथ्वी के वायुमंडल के ऊपरी हिस्से तक पहुंचती है और फिर वहां से तेज रफ्तार से नीचे गिरती है। इसी कारण इसे “स्पेस अटैक मिसाइल” भी कहा जाता है।
हवा से लॉन्च
ब्लू स्पैरो जमीन से नहीं बल्कि फाइटर जेट से लॉन्च की जाती है। खास तौर पर F-15 Eagle जैसे शक्तिशाली जेट इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।
बेहद तेज रफ्तार
बता दें कि जब यह मिसाइल लक्ष्य की ओर वापस गिरती है तो इसकी गति बहुत ज्यादा हो जाती है। इतनी तेज कि कई बार एयर डिफेंस सिस्टम को प्रतिक्रिया देने का समय भी नहीं मिलता।
लंबी दूरी तक हमला
इस मिसाइल की रेंज करीब 2000 किलोमीटर तक बताई जाती है, जिससे यह दुश्मन के दूरस्थ ठिकानों को भी निशाना बना सकती है।
क्वासी-बैलिस्टिक ट्रैजेक्टरी
ब्लू स्पैरो सीधी बैलिस्टिक लाइन में नहीं चलती। यह Quasi-ballistic यानी बदलते रास्ते से उड़ती है, जिससे दुश्मन के रडार को इसकी दिशा समझना मुश्किल हो जाता है।
बंकर भेदने की क्षमता
यह मिसाइल विशेष रूप से उन ठिकानों को नष्ट करने के लिए बनाई गई है जो जमीन के नीचे गहराई में बने होते हैं।
भारी वजन और ताकत
ब्लू स्पैरो करीब 6.5 मीटर लंबी और लगभग 1.9 टन वजनी होती है, जो इसे बेहद शक्तिशाली बनाती है।
इजरायली इंजीनियरिंग
इस मिसाइल को बनाने में इजरायल की रक्षा कंपनी Rafael Advanced Defense Systems की बड़ी भूमिका रही है।
अनोखी शुरुआत
शुरुआत में इसे केवल मिसाइल डिफेंस सिस्टम की टेस्टिंग के लिए बनाया गया था, लेकिन बाद में इसे एक घातक हथियार के रूप में विकसित किया गया।
सटीक निशाना
दरअसल, जब इस मिसाइल को खुफिया एजेंसियों जैसे Central Intelligence Agency और Mossad से मिली सटीक लोकेशन जानकारी के साथ इस्तेमाल किया जाता है, तो यह बेहद सटीक हमला करती है।
ब्लू स्पैरो मिसाइल कैसे काम करती है
जानकारी के लिए बता दें कि सबसे पहले इसे फाइटर जेट से बहुत ऊंचाई पर लॉन्च किया जाता है। इसके बाद इसका बूस्टर रॉकेट इसे तेजी से ऊपर की ओर धकेलता है। कुछ ही समय में यह वायुमंडल के ऊपरी हिस्से तक पहुंच जाती है। जिसके बाद यह गुरुत्वाकर्षण और अपनी गति का इस्तेमाल करते हुए लक्ष्य की ओर वापस गिरने लगती है। वहीं, मिसाइल के सामने लगा एक खास हिस्सा, जिसे री-एंट्री व्हीकल कहा जाता है, लक्ष्य की दिशा में मुड़ जाता है। इसके बाद यह अत्यधिक तेज गति से नीचे गिरती है और टकराते ही बड़े से बड़े बंकर या इमारत को तबाह कर देती है।
खामेनेई पर हमले की प्लानिंग कैसे हुई
जानकारी के अनुसार, यह हमला अचानक नहीं बल्कि महीनों की तैयारी के बाद किया गया था।
जिसमें इजरायल की खुफिया एजेंसी Mossad ने तेहरान के पाश्चर स्ट्रीट इलाके में मौजूद कंपाउंड पर लंबे समय तक नजर रखी। जिसके बाद सुरक्षा व्यवस्था, CCTV कैमरे, गार्डों की गतिविधि और आने-जाने वाले लोगों की जानकारी इकट्ठा की गई। बताया जाता है कि इस दौरान इजरायल ने यह दिखावा भी किया कि सेना सप्ताहांत यानी ‘शब्बत’ की छुट्टी की तैयारी कर रही है, ताकि ईरानी सुरक्षा एजेंसियां सतर्क न रहें।
वहीं, हमले के समय इलाके के कई मोबाइल टावरों को जाम कर दिया गया था, जिससे सुरक्षा टीम को समय पर चेतावनी नहीं मिल सकी।
मिडिल ईस्ट में बढ़ सकता है तनाव
दरअसल, तेहरान पर हुए इस हमले के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। जिसमें एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर इस तरह के हाई-टेक हथियारों का इस्तेमाल बढ़ता है तो क्षेत्र में सैन्य संघर्ष और खतरनाक रूप ले सकता है। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं और कई अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां अभी भी इस मामले की जांच कर रही हैं।
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