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ईरान युद्ध के बीच सबकुछ बदला, गोल्ड, सिल्वर, शेयर बाजार और तेल कीमतों में हलचल,जानें कल मार्केट पर क्या होगा असर
Current image: Iran War Impact

Iran War Impact: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने एक बार फिर से वैश्विक बाजारों की चिंता बढ़ा दी है। बता दें कि अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद हालात बेहद गंभीर हो गए हैं। दरअसल, इस युद्ध की आंच अब ग्लोबल मार्केट पर साफ दिखाई दे सकती है। जिसमें कल सोमवार को जब भारतीय और एशियाई बाजार खुलेंगे, तो निवेशकों की नजर सबसे पहले कच्चे तेल, शेयर बाजार, सोना-चांदी और डॉलर की चाल पर होगी।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह संघर्ष अगर लंबा चलता है, तो इसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर भी पड़ेगा। पेट्रोल-डीजल महंगे हो सकते हैं, शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है और सुरक्षित निवेश की मांग तेज हो सकती है। आइए जानते हैं कि इस युद्ध का किन-किन सेक्टर पर क्या असर पड़ सकता है।

पहला असर कच्चे तेल की कीमतों में उछाल

जानकारी के लिए बता दें कि ईरान दुनिया के बड़े तेल उत्पादक देशों में शामिल है। वहीं,अगर युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से सप्लाई बाधित होती है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ेगा। दुनिया का करीब 20% तेल इसी रास्ते से गुजरता है।

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अगर तनाव सीमित रहा तो ब्रेंट क्रूड 80 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है। लेकिन अगर संघर्ष बढ़ा और सप्लाई में बाधा आई, तो कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच सकती हैं। फिलहाल युद्ध से पहले कीमतें करीब 73 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थीं। जिसमें तेल की कीमतों में उछाल का असर सीधे भारत जैसे आयातक देशों पर पड़ेगा। पेट्रोल-डीजल महंगे हो सकते हैं, जिससे महंगाई बढ़ने की आशंका है।

दूसरा असर शेयर बाजार में मचेगी हलचल

दरअसल, युद्ध की खबरों के बीच वैश्विक शेयर बाजारों में अस्थिरता बढ़ना तय माना जा रहा है। अमेरिकी और एशियाई बाजारों में सोमवार को गिरावट के साथ शुरुआत हो सकती है। जिसमें पहले से ही बाजार कई वजहों से दबाव में थे। ऐसे में नया भू-राजनीतिक संकट निवेशकों की चिंता और बढ़ा सकता है। डर का पैमाना माने जाने वाला VIX इंडेक्स इस साल पहले ही बढ़ चुका है। वहीं,भारतीय बाजार की बात करें तो बैंकिंग, आईटी और ऑटो सेक्टर पर दबाव दिख सकता है। वहीं डिफेंस सेक्टर के शेयरों में तेजी देखने को मिल सकती है। एविएशन कंपनियों के शेयरों पर तेल महंगा होने का असर नकारात्मक हो सकता है। बता दें कि निवेशकों को फिलहाल सावधानी बरतने और घबराहट में फैसला लेने से बचने की सलाह दी जा रही है।

तीसरा असर करेंसी मार्केट में उथल-पुथल

वैश्विक संघर्ष का असर मुद्रा बाजार पर भी पड़ेगा। जिसमें अगर तेल सप्लाई बाधित होती है, तो अमेरिकी डॉलर मजबूत हो सकता है। अमेरिका खुद भी ऊर्जा निर्यातक देश है, इसलिए ऊंची तेल कीमतों से उसे कुछ हद तक फायदा हो सकता है। जापानी येन और स्विस फ्रैंक जैसी सुरक्षित मानी जाने वाली मुद्राओं में मजबूती आ सकती है। दूसरी ओर उभरते बाजारों की मुद्राएं दबाव में आ सकती हैं। भारतीय रुपया भी डॉलर के मुकाबले कमजोर हो सकता है, खासकर अगर विदेशी निवेशक बाजार से पैसा निकालते हैं।

चौथा असर सोना-चांदी में तेज उछाल संभव

बता दें कि जब भी दुनिया में तनाव बढ़ता है, निवेशक सुरक्षित ठिकानों की तलाश करते हैं। ऐसे समय में सोना सबसे पसंदीदा विकल्प बनता है। जिसमें 2026 में अब तक सोने ने अच्छा रिटर्न दिया है और कीमतें मजबूत बनी हुई हैं। अगर युद्ध बढ़ता है, तो सोने की कीमतों में और तेजी आ सकती है। चांदी भी निवेशकों को आकर्षित कर सकती है।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि गोल्ड में 22% तक की बढ़त इस साल देखी जा चुकी है। आने वाले दिनों में इसमें और उछाल संभव है।

बॉन्ड और क्रिप्टो पर असर

अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की मांग बढ़ सकती है, क्योंकि निवेशक सुरक्षित ऑप्शन चुनते हैं। अब इससे बॉन्ड यील्ड में गिरावट आ सकती है।
हालांकि, क्रिप्टोकरेंसी खासकर बिटकॉइन को अब पहले जैसा सुरक्षित निवेश नहीं माना जा रहा। पिछले दो महीनों में इसकी कीमत में भारी गिरावट देखी गई है। इसलिए निवेशक फिलहाल पारंपरिक सुरक्षित विकल्पों की ओर ज्यादा रुख कर रहे हैं।

भारत पर क्या होगा असर

भारत कच्चे तेल का बड़ा आयातक है। अब अगर तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पास पहुंचती हैं, तो इससे भारत का आयात बिल बढ़ेगा। इसका असर चालू खाता घाटे और महंगाई पर पड़ सकता है।वहीं, शेयर बाजार में भी विदेशी निवेशकों की बिकवाली देखने को मिल सकती है। हालांकि डिफेंस और एनर्जी सेक्टर को फायदा हो सकता है। जिसके बाद सरकार हालात पर नजर बनाए हुए है। जरूरत पड़ने पर रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व का इस्तेमाल किया जा सकता है।

निवेशकों के लिए क्या रणनीति

अब ऐसे में एक्सपर्ट्स की सलाह है कि ऐसे समय में घबराकर निवेश फैसले न लें। पोर्टफोलियो में विविधता बनाए रखें। कुछ हिस्सा गोल्ड या सुरक्षित बॉन्ड में रखना समझदारी हो सकती है। लॉन्ग टर्म निवेशकों को बाजार की गिरावट को अवसर के रूप में देखना चाहिए। शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स को ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए।

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