
FCRA Amendment Bill: संसद का मानसून सत्र आज सोमवार को काफी अहम रहने वाला है। बता दें की केंद्र सरकार इस दिन तीन महत्वपूर्ण विधेयकों को संसद में पेश करने की तैयारी में है। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) एक्ट यानी FCRA संशोधन विधेयक 2026 को लेकर हो रही है। इसके अलावा इंडियन स्टैटिस्टिकल इंस्टीट्यूट (ISI) बिल 2026 और बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल 2026 भी संसद के एजेंडे में शामिल हो सकते हैं।
जानकारी के लिए बता दें इन विधेयकों का असर देश की गैर-सरकारी संस्थाओं (NGO), बैंकिंग व्यवस्था, न्यायिक प्रक्रिया और सांख्यिकी शिक्षा से जुड़े संस्थानों पर पड़ सकता है। ऐसे में सरकार और विपक्ष दोनों की नजर इन विधेयकों पर बनी हुई है।
FCRA संशोधन विधेयक क्यों है सबसे ज्यादा चर्चा में?
FCRA संशोधन विधेयक 2026 सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बना हुआ है। जिसमें यह विधेयक पहली बार 25 मार्च 2026 को लोकसभा में पेश किया गया था। हालांकि, उस समय विपक्षी दलों, कई सामाजिक संगठनों और विभिन्न संस्थाओं ने इस पर आपत्ति जताई थी। विरोध को देखते हुए सरकार ने इसे आगे की चर्चा के लिए रोक दिया था।
ऐसे में अब सरकार एक बार फिर इस विधेयक को संसद में पेश कर इसे पारित कराने की कोशिश कर सकती है। जिसमें माना जा रहा है कि इस पर संसद के अंदर और बाहर दोनों जगह व्यापक बहस देखने को मिल सकती है।
क्या है FCRA कानून?
FCRA यानी Foreign Contribution (Regulation) Act एक ऐसा कानून है जो यह तय करता है कि भारत में कोई गैर-सरकारी संस्था, ट्रस्ट, सोसायटी या अन्य संगठन विदेश से आर्थिक सहायता या दान किस प्रकार प्राप्त करेगा और उसका उपयोग किस उद्देश्य के लिए करेगा।
इस कानून का मुख्य उद्देश्य विदेशी फंडिंग में पारदर्शिता बनाए रखना और यह सुनिश्चित करना है कि विदेशी धन का इस्तेमाल देश विरोधी या गैर-कानूनी गतिविधियों में न हो।
संशोधन विधेयक में क्या बदलाव प्रस्तावित हैं?
सरकार द्वारा प्रस्तावित संशोधन में कई नए प्रावधान शामिल किए गए हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि यदि किसी संस्था का FCRA रजिस्ट्रेशन रद्द हो जाता है, समाप्त हो जाता है या संस्था स्वयं उसे वापस कर देती है, तो सरकार एक निर्धारित प्राधिकरण (Designated Authority) नियुक्त कर सकेगी। बता दें यह प्राधिकरण संबंधित संस्था के विदेशी फंड और उससे जुड़े परिसंपत्तियों (Assets) का प्रबंधन करेगा।
सरकार का कहना है कि इससे विदेशी धन के दुरुपयोग पर रोक लगेगी और वित्तीय पारदर्शिता मजबूत होगी। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाएगा कि विदेशी सहायता का उपयोग केवल वैध और निर्धारित उद्देश्यों के लिए ही किया जाए।
विपक्ष और सामाजिक संगठनों की क्या आपत्ति है?
FCRA संशोधन विधेयक का कई राजनीतिक दलों, चर्च संगठनों, सामाजिक संस्थाओं और गैर-सरकारी संगठनों ने विरोध किया है। आलोचकों का कहना है कि यदि सरकार को किसी संस्था की संपत्ति और फंड के प्रबंधन का अधिकार मिल जाता है तो इससे गैर-सरकारी संगठनों की स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है। उनका मानना है कि इस तरह के प्रावधानों से सरकार का नियंत्रण बढ़ेगा और सामाजिक संस्थाओं के कामकाज पर असर पड़ सकता है। कई संगठनों ने सरकार से इस विधेयक पर व्यापक चर्चा और सभी हितधारकों से सलाह लेने की मांग भी की है।
गृह मंत्री अमित शाह ने की अहम बैठक
संसद में विधेयक पेश होने से पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और कई वरिष्ठ मंत्रियों के साथ बैठक कर रणनीति पर चर्चा की।
अधिकारीयों के अनुसार सरकार संसद में इस विधेयक को लेकर विपक्ष के सवालों का जवाब देने की तैयारी कर रही है। सरकार चाहती है कि विधेयक पर विस्तृत चर्चा के बाद इसे पारित कराया जाए।
CBCI ने सरकार से की पुनर्विचार की अपील
कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया (CBCI) ने भी सरकार से अपील की है कि प्रस्तावित संशोधनों पर दोबारा विचार किया जाए।
संगठन का कहना है कि इस विषय पर सभी संबंधित पक्षों से व्यापक चर्चा होनी चाहिए ताकि ऐसा कानून बनाया जा सके जो पारदर्शिता भी बनाए रखे और सामाजिक संस्थाओं की स्वतंत्रता भी प्रभावित न हो।
इंडियन स्टैटिस्टिकल इंस्टीट्यूट बिल 2026 क्या है?
सरकार संसद में इंडियन स्टैटिस्टिकल इंस्टीट्यूट (ISI) बिल 2026 भी पेश कर सकती है। इस विधेयक का उद्देश्य भारतीय सांख्यिकी संस्थान के लिए आधुनिक कानूनी ढांचा तैयार करना है। इसके जरिए संस्थान की प्रशासनिक व्यवस्था, शैक्षणिक संरचना और संचालन प्रणाली को मजबूत बनाया जाएगा।
सरकार का मानना है कि इससे डेटा साइंस, सांख्यिकी अनुसंधान और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में संस्थान की भूमिका और अधिक प्रभावी होगी। साथ ही नई तकनीकों और आधुनिक शोध को बढ़ावा मिलेगा।
बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल 2026 क्यों है महत्वपूर्ण?
तीसरा अहम विधेयक बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल 2026 है। इसका मुख्य उद्देश्य अदालतों में बैंकिंग रिकॉर्ड को साक्ष्य के रूप में स्वीकार करने की प्रक्रिया को आधुनिक बनाना है। वर्तमान समय में अधिकांश बैंकिंग सेवाएं डिजिटल माध्यम से संचालित होती हैं। ऐसे में पुराने कानूनों को नई तकनीक के अनुरूप बनाने की जरूरत महसूस की जा रही है।
प्रस्तावित विधेयक के तहत इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और डिजिटल बैंकिंग दस्तावेजों को कानूनी रूप से अधिक स्पष्ट मान्यता देने का प्रावधान किया जा सकता है। इससे न्यायिक प्रक्रिया तेज और अधिक प्रभावी बनने की उम्मीद है।
संसद में विपक्ष का क्या रहेगा रुख?
दरअसल इन तीनों विधेयकों को लेकर विपक्ष सरकार को घेरने की तैयारी में है। विशेष रूप से FCRA संशोधन विधेयक पर विपक्ष सरकार से कई सवाल पूछ सकता है।
विपक्ष का कहना है कि किसी भी कानून में बदलाव से पहले व्यापक चर्चा और सभी पक्षों की राय लेना जरूरी है। वहीं सरकार का दावा है कि इन संशोधनों का उद्देश्य केवल पारदर्शिता बढ़ाना, कानून को आधुनिक बनाना और प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करना है।
अब आगे क्या होगा?
ऐसे में यदि सरकार सोमवार को इन विधेयकों को संसद में पेश करती है तो उन पर चर्चा शुरू होगी। इसके बाद सदन की प्रक्रिया के अनुसार संशोधनों पर विचार किया जाएगा और आवश्यक होने पर मतदान भी कराया जा सकता है।
राजनीतिक एक्सपर्ट्स का मानना है कि FCRA संशोधन विधेयक पर सबसे ज्यादा बहस होने की संभावना है, जबकि ISI बिल और बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल को लेकर भी विपक्ष अपने सुझाव और आपत्तियां रख सकता है।
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अपर्णा पवांर, एक हिंदी कंटेंट राइटर है, जिन्होंने डिजिटल मीडिया में अपनी लेखनी से पहचान बनाई। आज वे “Khaber Aaj Ki” में हिंदी कंटेंट राइटर के पद पर काम करते हुए पत्रकारिता को अपना जुनून मानती हैं। उनके विचारों में खबरें केवल सूचनाएं नहीं, बल्कि लोगों तक सच्चाई पहुँचाने का माध्यम हैं।






