Skip to main content Scroll Top
NEET Paper Leak Protest: अभिजीत दिपके का सरकार को संदेश, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक जारी रहेगा आंदोलन

NEET Paper Leak Protest: अभिजीत दिपके का सरकार को संदेश

NEET Paper Leak Protest: नीट पेपर लीक को लेकर देशभर में चल रही बहस के बीच दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों का प्रदर्शन लगातार जारी है। इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने एक बार फिर से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई है। जिसमें उनका कहना है कि यदि सरकार छात्रों की मांगों को गंभीरता से नहीं लेती और शिक्षा मंत्री को पद से नहीं हटाती, तो आंदोलन को पूरे देश में विस्तार दिया जाएगा।

आपकी जानकारी के लिए बता दें अभिजीत दिपके ने एक समाचार चैनल से बातचीत में कहा कि सरकार के लिए सबसे बेहतर फैसला यही होगा कि धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा दें। जिसमें उन्होंने दावा किया कि इससे छात्रों के बीच सरकार का भरोसा कुछ हद तक बहाल हो सकता है। साथ ही यह भी कहा कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो संगठन भविष्य में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की मांग भी उठाएगा।

छात्रों के आंदोलन को मिलेगा राष्ट्रीय स्वरूप

दिपके ने साफ कहा है कि यह आंदोलन किसी भी एक संगठन या राज्य तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित कराने के लिए देशभर के छात्रों को एक मंच पर लाया जाएगा। उन्होंने कहा कि कई राज्यों से छात्र लगातार इस आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं और आने वाले दिनों में बड़े स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल एक परीक्षा का मुद्दा नहीं है, बल्कि लाखों युवाओं के भविष्य का सवाल है। ऐसे में सरकार को जल्द कोई ठोस कदम उठाना चाहिए।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग फिर दोहराई

अभिजीत दिपके का कहना कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री के रहते छात्रों का विश्वास दोबारा कायम करना मुश्किल होगा। साथ ही, शिक्षा व्यवस्था में हुई कथित गड़बड़ियों की नैतिक जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। इसी वजह से उनकी पहली और सबसे बड़ी मांग धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है। जिसमें उन्होंने कहा कि सरकार यदि छात्रों की आवाज सुनना चाहती है तो सबसे पहले इस मांग पर सकारात्मक निर्णय लेना होगा। केवल बातचीत से समाधान नहीं निकलेगा, बल्कि ठोस कार्रवाई की आवश्यकता है।

विपक्ष के समर्थन पर क्या बोले दिपके

प्रदर्शन के दौरान कई विपक्षी नेताओं और दलों ने छात्रों के आंदोलन का समर्थन किया है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए अभिजीत दिपके ने कहा कि इस मुद्दे को राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि जिन राजनीतिक दलों ने अपने मतभेदों को अलग रखते हुए छात्रों के हित में समर्थन दिया है, उनका संगठन आभार व्यक्त करता है। उनका मानना है कि शिक्षा और युवाओं का भविष्य किसी भी राजनीतिक विचारधारा से ऊपर होना चाहिए।

सोनम वांगचुक के फैसले का किया स्वागत

क्लाइमेट एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक द्वारा अपना अनशन समाप्त किए जाने पर भी अभिजीत दिपके ने प्रतिक्रिया दी है। जिसमें उन्होंने कहा कि संगठन इस फैसले से खुश है और स्वयं उन्होंने भी वांगचुक से स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए अनशन समाप्त करने का अनुरोध किया था।

दिपके ने कहा कि सोनम वांगचुक का इस आंदोलन में योगदान बेहद महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने छात्रों की आवाज को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई है। हालांकि, उनके अनशन समाप्त करने का मतलब यह नहीं है कि आंदोलन खत्म हो गया है। संगठन अपनी मांगों को लेकर पहले की तरह सक्रिय रहेगा।

सरकार से बातचीत पर अभी संतोष नहीं

सरकार और आंदोलनकारियों के बीच अब तक कई दौर की बातचीत हो चुकी है। हालांकि, अभिजीत दिपके का कहना है कि अभी तक उनकी प्रमुख मांगों पर कोई आधिकारिक आश्वासन नहीं मिला है। जिसमें उन्होंने कहा कि सरकार ने बातचीत जारी रखने की बात कही है और अगली बैठक के लिए भी बुलाया गया है। लेकिन जब तक लिखित या आधिकारिक रूप से मांगों पर सहमति नहीं मिलती, तब तक संगठन संतुष्ट नहीं होगा। उनका कहना है कि केवल मौखिक आश्वासन से छात्रों का भरोसा वापस नहीं आएगा। सरकार को स्पष्ट निर्णय लेना होगा।

आंदोलन जारी रखने का ऐलान

दरअसल अभिजीत दिपके ने दोहराया कि जब तक धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा नहीं देते, तब तक जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी रहेगा। ऐसे में यदि सरकार इस मांग को नजरअंदाज करती है, तो आंदोलन को देश के अलग-अलग राज्यों तक ले जाया जाएगा। साथ ही भविष्य की रणनीति पर संगठन लगातार काम कर रहा है और कई छात्र संगठनों के साथ संपर्क बनाए रखा जा रहा है। जरूरत पड़ने पर बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे।

छात्रों की मुख्य मांगें

प्रदर्शन कर रहे छात्रों और संगठन की ओर से सरकार के सामने कई मांगें रखी गई हैं। इनमें प्रमुख रूप से परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने, पेपर लीक की घटनाओं पर सख्त कार्रवाई, दोषियों को कठोर सजा और जवाबदेही तय करने की मांग शामिल है। साथ ही शिक्षा व्यवस्था में सुधार और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए मजबूत तंत्र विकसित करने की भी मांग की जा रही है।

सरकार के सामने बढ़ती चुनौती

नीट पेपर लीक का मुद्दा अब केवल परीक्षा तक सीमित नहीं रह गया है। यह राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बन चुका है। सरकार के सामने एक ओर छात्रों की नाराजगी है तो दूसरी ओर विपक्ष लगातार इस मुद्दे पर सरकार को घेर रहा है।

अब आने वाले दिनों में सरकार और आंदोलनकारियों के बीच होने वाली अगली बैठक पर सभी की नजर रहेगी। यदि बातचीत से कोई सकारात्मक समाधान निकलता है तो विवाद कम हो सकता है, लेकिन यदि सहमति नहीं बनती है तो आंदोलन और तेज होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

ये भी पढ़ें: Paper Leak Amendment Bill: ‘पेपर लीक संशोधन बिल’ पर कैबिनेट में मंजूरी, मोदी सरकार का बड़ा एक्शन- अब 10 साल जेल और ₹10 करोड़ जुर्माना

Author

  • Aparna Panwar

    अपर्णा पवांर, एक हिंदी कंटेंट राइटर है, जिन्होंने डिजिटल मीडिया में अपनी लेखनी से पहचान बनाई। आज वे “Khaber Aaj Ki” में हिंदी कंटेंट राइटर के पद पर काम करते हुए पत्रकारिता को अपना जुनून मानती हैं। उनके विचारों में खबरें केवल सूचनाएं नहीं, बल्कि लोगों तक सच्चाई पहुँचाने का माध्यम हैं।

Related Posts

लेटेस्ट ➤

Advertising Banner
305x250