Skip to main content Scroll Top
Vijaya Ekadashi Vrat Katha: विजया एकादशी में इस कथा का पाठ करें,भगवान विष्णु दिलाएंगे हर बाधा से विजय
Current image: Vijaya Ekadashi 2026 Vrat Katha

Vijaya Ekadashi Vrat Katha: हर साल फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को विजया एकादशी का व्रत रखा जाता है. हिंदू धर्मग्रंथों में एकादशी व्रत का विशेष महत्व बताया गया है और विजया एकादशी को तो सबसे फलदायी व्रतों में गिना जाता है. मान्यता है कि जो व्यक्ति श्रद्धा और नियमों के साथ यह व्रत करता है, उसे जीवन के हर क्षेत्र में सफलता मिलती है और शत्रुओं पर भी विजय प्राप्त होती है. वर्ष 2026 में विजया एकादशी 13 फरवरी को मनाई जाएगी. इस दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा की जाती है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, विजया एकादशी का व्रत रखने और पद्म पुराण में वर्णित कथा का पाठ करने से जीवन की बड़ी से बड़ी बाधाएं भी दूर हो जाती हैं.

विजया एकादशी का धार्मिक महत्व

हिंदू धर्म में एकादशी व्रत को सबसे प्रभावशाली व्रतों में से एक माना गया है. मान्यता है कि इस व्रत से मिलने वाला पुण्य केवल स्वयं तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसे अपने पितरों या किसी जरूरतमंद के नाम पर भी समर्पित किया जा सकता है.

विजया एकादशी के बारे में कहा जाता है कि:

  • इस व्रत से हर कार्य में सफलता मिलती है.
  • जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है.
  • अंत में मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग खुलता है.
  • शत्रुओं और बाधाओं पर विजय प्राप्त होती है.

इसी कारण इसे ‘विजया’ एकादशी कहा गया है, यानी विजय दिलाने वाली एकादशी.

क्यों खास है विजया एकादशी?

विजया एकादशी का संबंध सिर्फ व्रत से नहीं, बल्कि कर्म और साधना से भी जुड़ा है. धर्मग्रंथों में वर्णन है कि जो व्यक्ति इस दिन मन, वचन और कर्म से शुद्ध होकर व्रत रखता है, उसके जीवन से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है. इस दिन पीले रंग की वस्तुओं का दान करना बहुत शुभ माना जाता है. पीला रंग भगवान विष्णु का प्रिय माना जाता है और यह समृद्धि व शुभता का प्रतीक है. दान करने से पुण्य में वृद्धि होती है और व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं.

विजया एकादशी व्रत कथा

धार्मिक ग्रंथ पद्म पुराण में विजया एकादशी की कथा का वर्णन मिलता है. कथा के अनुसार, एक समय भगवान श्रीराम लंका पर विजय प्राप्त करने के लिए समुद्र पार करना चाहते थे. लेकिन समुद्र पार करने में अनेक बाधाएं आ रही थीं. तब श्रीराम ने अपने गुरु और ऋषि-मुनियों से उपाय पूछा.ऋषियों ने उन्हें विजया एकादशी का व्रत रखने की सलाह दी. भगवान श्रीराम ने पूरे विधि-विधान से विजया एकादशी का व्रत रखा, भगवान विष्णु की पूजा की और कथा का पाठ किया. इस व्रत के प्रभाव से समुद्र पार करने का मार्ग सरल हुआ और अंततः भगवान श्रीराम ने रावण पर विजय प्राप्त की. तभी से यह मान्यता बनी कि जो व्यक्ति इस एकादशी का व्रत और कथा का पाठ करता है, उसे हर कठिनाई में विजय मिलती है.

विजया एकादशी व्रत की पूजा विधि

अगर आप विजया एकादशी का पूरा फल पाना चाहते हैं, तो पूजा विधि को सही तरीके से अपनाएं:

  • सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें
  • घर में भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें
  • व्रत का संकल्प लें
  • भगवान विष्णु को पीले फूल, फल और तुलसी दल अर्पित करें
  • “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें
  • पद्म पुराण में वर्णित विजया एकादशी व्रत कथा का पाठ करें
  • दिनभर फलाहार या निर्जला व्रत रखें
  • अगले दिन द्वादशी को व्रत का पारण करें

व्रत में क्या खाएं और क्या न खाएं?

  • विजया एकादशी के दिन व्रती को सात्विक भोजन करना चाहिए.
  • फल, दूध, साबूदाना, कुट्टू का आटा आदि लिया जा सकता है.
  • चावल और अन्न का सेवन व्रत के दिन वर्जित माना जाता है.
  • तामसिक भोजन और नशे से दूर रहें.

विजया एकादशी पर दान का महत्व

इस दिन पीले वस्त्र, चने की दाल, केले, हल्दी या मिठाई का दान करना बहुत शुभ माना जाता है. मान्यता है कि दान करने से व्रत का पुण्य कई गुना बढ़ जाता है. जरूरतमंदों को भोजन कराना भी इस दिन बहुत फलदायी माना जाता है.

आज के व्यस्त जीवन में लोग मानसिक तनाव, नौकरी की परेशानी, पारिवारिक विवाद और स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं. ऐसे में विजया एकादशी का व्रत आत्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है. धार्मिक विद्वानों के अनुसार, यह व्रत केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मसंयम और आत्मशुद्धि का माध्यम भी है. इससे व्यक्ति अपने भीतर धैर्य और सकारात्मक सोच विकसित करता है.

Related Posts

लेटेस्ट ➤

Advertising Banner
305x250