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Joe Kent Resignation: ईरान युद्ध के विरोध में काउंटर टेररिज्म चीफ जो केंट का इस्तीफा, इजरायल दबाव का आरोप
Current image: Joe Kent Resignation

Joe Kent Resignation: अमेरिका की राजनीति और वैश्विक कूटनीति के बीच एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। जिसमें डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन को उस समय बड़ा झटका लगा जब नेशनल काउंटर टेररिज्म सेंटर (NCTC) के डायरेक्टर जो केंट ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। जिसके बाद उन्होंने यह कदम ईरान के खिलाफ जारी युद्ध का विरोध करते हुए उठाया है।

जानकारी के लिए बता दें कि जो केंट का इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब अमेरिका, इजरायल के साथ मिलकर ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई कर रहा है। यह घटनाक्रम न सिर्फ अमेरिकी प्रशासन के भीतर मतभेद को उजागर करता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस युद्ध को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।

अंतरात्मा की आवाज का हवाला देकर इस्तीफा

जो केंट ने अपने इस्तीफे की घोषणा सोशल मीडिया के जरिए की है। जिसमें उन्होंने साफ कहा है कि उनकी अंतरात्मा इस युद्ध का समर्थन नहीं करती है। केंट के अनुसार, अमेरिका को इस युद्ध में शामिल होने की कोई जरूरत नहीं थी। जिसमें उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा है कि तेहरान की ओर से अमेरिका को कोई सीधा या तत्काल खतरा नहीं था। इसके बावजूद युद्ध शुरू किया गया, जो उनके अनुसार गलत निर्णय है।

इजरायल के दबाव का आरोप

जो केंट ने अपने बयान में सबसे बड़ा आरोप यह लगाया कि यह युद्ध इजरायल के दबाव में शुरू किया गया है। साथ ही, अमेरिका ने अपनी स्वतंत्र नीति के बजाय इजरायल और उसकी लॉबी के प्रभाव में आकर यह फैसला लिया है। यह आरोप बेहद गंभीर माना जा रहा है, क्योंकि इससे अमेरिका की विदेश नीति की स्वायत्तता पर सवाल उठते हैं। केंट के मुताबिक, इस तरह के फैसले से अमेरिका की वैश्विक छवि को भी नुकसान हो सकता है।

28 फरवरी से शुरू हुआ युद्ध

जानकारी के मुताबिक, 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर हमला शुरू किया था। इस सैन्य कार्रवाई में तेहरान सहित कई रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया गया। दरअसल, इन हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत हो गई। जिसके बाद यह घटना पूरे मिडिल ईस्ट में तनाव का बड़ा कारण बन गई।

ईरान का पलटवार और बढ़ता तनाव

अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने भी कड़ा जवाब दिया। ईरान ने मिडिल ईस्ट में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए और कई ठिकानों को नुकसान पहुंचाया।इसके अलावा, ईरान ने इजरायल के प्रमुख शहर तेल अवीव पर भी मिसाइल हमले किए। इस जवाबी कार्रवाई से युद्ध और भी उग्र हो गया है। जिसमें दोनों पक्षों के बीच लगातार हमले जारी हैं और किसी भी पक्ष के पीछे हटने के संकेत नहीं मिल रहे हैं।

नए सुप्रीम लीडर का सख्त रुख

अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान में नेतृत्व परिवर्तन हुआ है। जिसमें नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने अमेरिका और इजरायल के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है।उन्होंने साफ तौर पर सीजफायर (युद्धविराम) के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि जब तक अमेरिका और इजरायल हमले बंद नहीं करते, तब तक ईरान भी पीछे नहीं हटेगा।

ट्रंप का भी सख्त बयान

बता दें कि दूसरी ओर, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी अपने रुख में कोई नरमी नहीं दिखाई है। जिसमें उन्होंने कहा है कि अमेरिका ईरान के खिलाफ अपनी कार्रवाई जारी रखेगा और हमले नहीं रोके जाएंगे।जिसके बाद ट्रंप का यह बयान साफ संकेत देता है कि आने वाले समय में यह युद्ध और लंबा खिंच सकता है।

अमेरिका के अंदर बढ़ते मतभेद

जो केंट का इस्तीफा यह दिखाता है कि अमेरिका के अंदर इस युद्ध को लेकर गंभीर मतभेद हैं। कई अधिकारी और विश्लेषक इस फैसले पर सवाल उठा रहे हैं।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस तरह के इस्तीफे से प्रशासन की एकजुटता पर असर पड़ सकता है और नीति-निर्माण में अस्थिरता आ सकती है।

वैश्विक असर और चिंताएं

ईरान और अमेरिका के बीच यह युद्ध सिर्फ दो देशों तक सीमित नहीं है। बता दें कि इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है।

  • मिडिल ईस्ट में अस्थिरता बढ़ रही है
  • तेल की कीमतों में उछाल की आशंका है।
  • वैश्विक व्यापार प्रभावित हो सकता है।
  • तीसरे विश्व युद्ध जैसी चिंताएं भी जताई जा रही हैं।

क्या आगे बढ़ेगा युद्ध

दरअसल, मौजूदा हालात को देखते हुए यह कहना मुश्किल है कि यह युद्ध कब खत्म होगा। दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर अड़े हुए हैं।एक तरफ अमेरिका और इजरायल सैन्य दबाव बनाए हुए हैं, तो दूसरी तरफ ईरान भी पूरी ताकत से जवाब दे रहा है। ऐसे में हालात और बिगड़ने की आशंका बनी हुई है।

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Author

  • Aparna Panwar

    अपर्णा पवांर, एक हिंदी कंटेंट राइटर है, जिन्होंने डिजिटल मीडिया में अपनी लेखनी से पहचान बनाई। आज वे “Khaber Aaj Ki” में हिंदी कंटेंट राइटर के पद पर काम करते हुए पत्रकारिता को अपना जुनून मानती हैं। उनके विचारों में खबरें केवल सूचनाएं नहीं, बल्कि लोगों तक सच्चाई पहुँचाने का माध्यम हैं।

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