
Surajkund Mela Accident: हरियाणा के फरीदाबाद में चल रहे प्रसिद्ध सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय मेले में शनिवार को एक दर्दनाक हादसा हो गया. मेले में लगा एक झूला अचानक टूटकर गिर गया, जिससे एक SHO समेत दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि करीब दर्जनभर लोग घायल हो गए. हादसे के वक्त झूले पर कई लोग सवार थे. इस घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी और मेले की सुरक्षा व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. इस बड़े हादसे के बाद फरीदाबाद पुलिस ने जांच के लिए विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया है. यह टीम हादसे के कारणों की गहराई से जांच करेगी और यह पता लगाएगी कि इस दुर्घटना के लिए कौन-कौन जिम्मेदार है.
SIT का गठन: कौन करेगा जांच?
फरीदाबाद पुलिस द्वारा गठित SIT में एसीपी क्राइम वरुण दहिया, एक इंस्पेक्टर और एक सब-इंस्पेक्टर को शामिल किया गया है.यह टीम तकनीकी जांच के साथ-साथ प्रशासनिक लापरवाही के पहलुओं की भी पड़ताल करेगी. पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, SIT की जिम्मेदारी होगी कि वह झूले की फिटनेस, उसकी नियमित जांच (सेफ्टी ऑडिट), मेंटेनेंस रिकॉर्ड और ऑपरेटर की ट्रेनिंग से जुड़ी सभी जानकारियां जुटाए. इसके साथ ही यह भी देखा जाएगा कि आयोजकों और ठेकेदारों ने सुरक्षा मानकों का पालन किया या नहीं.
कैसे हुआ हादसा?
आस-पास के लोगों के अनुसार, हादसा उस समय हुआ जब झूला तेजी से घूम रहा था.अचानक एक तेज आवाज आई और झूले का एक हिस्सा टूटकर नीचे गिर गया. देखते ही देखते झूले पर बैठे लोग जमीन पर गिर पड़े. घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई. लोग अपने परिजनों को ढूंढते नजर आए और कई लोग घायलों की मदद के लिए दौड़े.मेले में मौजूद सुरक्षाकर्मियों और पुलिस ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया और घायलों को नजदीकी अस्पताल पहुंचाया.
इस हादसे में एक SHO समेत दो लोगों की मौत हो गई.दोनों की पहचान की जा चुकी है. हादसे में घायल हुए लोगों को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है.
डॉक्टरों के मुताबिक, कई घायलों को सिर और हाथ-पैर में गंभीर चोटें आई हैं. अस्पताल प्रशासन ने कहा है कि सभी घायलों का इलाज जारी है और जरूरत पड़ने पर उन्हें विशेष चिकित्सा सुविधा दी जा रही है.
पहले भी हो चुका है सूरजकुंड मेले में हादसा
यह सूरजकुंड मेले में हुआ दूसरा बड़ा हादसा बताया जा रहा है. इससे पहले मेले में एक गेट गिरने से दो लोग घायल हो गए थे. लगातार हो रही घटनाओं ने आयोजकों और प्रशासन की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि इतने बड़े और भीड़भाड़ वाले आयोजन में सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए था. दो बार हादसा होना इस बात का संकेत है कि कहीं न कहीं व्यवस्थाओं में कमी रही है.
सूरजकुंड मेला देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करता है. हर साल यहां लाखों लोग आते हैं. ऐसे में झूलों और अन्य मनोरंजन साधनों की सुरक्षा जांच बेहद जरूरी होती है. विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी झूले या राइड को चलाने से पहले तकनीकी जांच और नियमित निरीक्षण होना चाहिए. इसके अलावा ऑपरेटरों को ट्रेनिंग देना और भीड़ नियंत्रण की व्यवस्था मजबूत करना भी जरूरी है. हादसे के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या झूले की समय-समय पर जांच की गई थी या नहीं.
प्रशासन और आयोजकों की प्रतिक्रिया
हादसे के बाद प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से उस झूले को बंद करा दिया है और मेले में लगे अन्य झूलों की भी जांच के आदेश दिए हैं. आयोजकों का कहना है कि वे पुलिस और प्रशासन को हर तरह का सहयोग देंगे. प्रशासन ने यह भी आश्वासन दिया है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.अगर जांच में किसी अधिकारी या ठेकेदार की लापरवाही सामने आती है, तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
पीड़ित परिवारों का दर्द
हादसे में जान गंवाने वालों के परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है. परिजनों का कहना है कि वे सिर्फ मेले का आनंद लेने आए थे, लेकिन यह खुशी मातम में बदल गई. एक मृतक के परिजन ने बताया, “हम अपने परिवार के साथ मेले में घूमने आए थे. किसी ने सोचा भी नहीं था कि झूला मौत का कारण बन जाएगा” पीड़ित परिवारों ने प्रशासन से दोषियों पर सख्त कार्रवाई और मुआवजे की मांग की है.
क्या कहती है SIT की जांच?आगे क्या होगा?
SIT ने शुरुआती जांच में झूले के टूटने की तकनीकी वजहों पर फोकस किया है. टीम यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कहीं झूले के पुर्जे पुराने या खराब तो नहीं थे. इसके अलावा यह भी देखा जा रहा है कि क्या झूले की क्षमता से ज्यादा लोग सवार थे. वहीं, पुलिस सूत्रों के मुताबिक, झूले के ऑपरेटर और ठेकेदार से पूछताछ की जा रही है. कुछ कर्मचारियों को भी बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया गया है.
SIT की जांच रिपोर्ट आने के बाद यह साफ होगा कि हादसा तकनीकी खराबी की वजह से हुआ या मानवीय लापरवाही से रिपोर्ट के आधार पर पुलिस आगे की कार्रवाई करेगी. प्रशासन ने यह भी संकेत दिए हैं कि भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए सुरक्षा नियमों को और सख्त किया जाएगा. बड़े मेलों और आयोजनों में झूलों की फिटनेस जांच के लिए स्वतंत्र एजेंसियों को शामिल करने पर भी विचार किया जा सकता है.






